PM Modi Dussehra Speech : दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में दशहरा समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया. रावण दहन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने देश के मान-सम्मान की रक्षा, सामाजिक एकता बनाए रखने और भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत रखने वाली मानसिकता से मुकाबला करने की जरूरत बतायी. प्रधानमंत्री ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरे देश से एकजुट रहने की अपील की.
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Vijaya Dashami celebrates the victory of good over evil. It reminds us of the enduring strength of truth and righteousness. https://t.co/jJSlQdNhu2
— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
देश की एकता और संस्कृति की रक्षा पर जोर
विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री ने बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को देश की एकता और सामाजिक सद्भाव से जोड़ा. उन्होंने कहा कि देश को कमजोर करने वाली ताकतों का सामना करने के लिए नागरिकों को मिलकर काम करना होगा. उनके संबोधन में राष्ट्रीय सम्मान, सामाजिक एकता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश प्रमुख रहा.

पीएम मोदी ने बतायीं ये तीन चुनौतियां
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तीन चुनौतियों का उल्लेख किया. पहली चुनौती देश के मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें हैं. दूसरी चुनौती समाज में फूट और विभाजन पैदा करने वाली सोच है. तीसरी चुनौती भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता है.
उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता, एकजुटता और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका को अहम बताया. प्रधानमंत्री का संदेश था कि देश की प्रतिष्ठा, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.
राम राज्य का अर्थ जनता का कल्याण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए राम राज्य की अवधारणा पर भी बात की. उन्होंने ऐसे शासन की अहमियत बतायी, जिसमें जनता का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण हो. इस विचार में न्याय, समानता और सभी को आगे बढ़ने का अवसर देने को प्राथमिकता दी जाती है.
राम राज्य की अवधारणा के तहत समाज के किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. गरीबों और वंचितों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना तथा जरूरतमंदों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है.

आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत तक का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया. उन्होंने संसाधनों के सही इस्तेमाल, मेहनत, नयी सोच और लोगों की भागीदारी को देश की तरक्की के लिए जरूरी बताया.
आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में सामान का उत्पादन करना नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और अलग-अलग क्षेत्रों में निर्भरता कम करना भी है. प्रधानमंत्री के संबोधन में देश की एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और विकास के लक्ष्य को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश रहा.
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