UPI MDR को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामला सिर्फ 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क तक सीमित नहीं रहा. अदालत ने सीधे यह सवाल उठाया कि इस चार्ज से कमाई आखिर किसे होगी, इसमें कर देने वाली कौन-सी इकाई शामिल है और इसे फीस माना जाए या किसी तरह का टैक्स. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र के फैसले पर अंतरिम रोक नहीं लगाई, लेकिन केंद्र, RBI और अन्य पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- चार्ज से किसे फायदा होगा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान UPI MDR की व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए.
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अदालत ने पूछा कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर लगाए जाने वाले चार्ज से कमाई किसे होगी. पीठ ने यह भी जानना चाहा कि इस व्यवस्था में कर देने वाली कौन-सी इकाई शामिल है और प्रस्तावित चार्ज को फीस माना जाएगा या यह किसी तरह का टैक्स है.
चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और अन्य संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
यह मामला 2,000 रुपये से अधिक के कुछ P2M UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका से जुड़ा है. हालांकि अदालत ने इस स्तर पर केंद्र के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया.
केंद्र ने बताया- 96% यूजर्स प्रभावित नहीं होंगे
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा. उनके मुताबिक करीब 96% UPI उपयोगकर्ताओं के लेनदेन इससे प्रभावित नहीं होंगे.
नई व्यवस्था के तहत पात्र P2M UPI लेनदेन पर 2,000 रुपये से अधिक की राशि के मामले में MDR का प्रावधान किया गया है. सामान्य दर 0.4% है और प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम MDR 300 रुपये रखा गया है.
P2P भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया
P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI भुगतान पर किसी भी राशि के लिए MDR नहीं लगाया जाएगा. P2P लेनदेन UPI के कुल वॉल्यूम का करीब 37% और कुल मूल्य का लगभग 70% है.
छोटे मूल्य के लेनदेन भी प्रस्तावित MDR से बाहर हैं. वहीं कुछ क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क तय किया गया है.
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का निश्चित MDR होगा. म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉक ब्रोकर या डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR निर्धारित है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है.
सरकार ने MDR को टैक्स नहीं बताया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले कह चुकी हैं कि MDR का बोझ UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. उनके अनुसार यह शुल्क भुगतान सेवा से जुड़े ऑपरेटरों के बीच रहेगा.
उन्होंने MDR को टैक्स या सेस नहीं बताया था और कहा था कि इससे मिलने वाली राशि भारत की संचित निधि में नहीं जाएगी. इसे भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराने और बेहतर बनाने से जुड़ी सेवा प्रदाताओं के बीच की फीस बताया गया था.
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अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी इसी शुल्क की प्रकृति को लेकर सवाल सामने आया है. अदालत के सवालों और केंद्र तथा RBI के जवाब से आगे इस व्यवस्था की कानूनी स्थिति को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकती है.
छह साल बाद बदली मुफ्त UPI व्यवस्था
करीब छह साल तक मुफ्त रही UPI व्यवस्था में बदलाव करते हुए सरकार ने 15 अक्टूबर से कुछ P2M भुगतान पर MDR लागू करने का फैसला किया है. हालांकि P2P भुगतान और छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन को इससे बाहर रखा गया है.
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