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Bhagalpur News : विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर आवागमन दोबारा शुरू कराने की कवायद तेज हो गयी है. विभाग ने तत्काल राहत व्यवस्था के तहत अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिये बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. बीआरओ की तकनीकी टीम सेतु का निरीक्षण कर चुकी है और प्रभावित हिस्से की लंबाई-चौड़ाई का आकलन भी पूरा कर लिया गया है.
अधिकारियों के अनुसार बेली ब्रिज निर्माण के लिये जरूरी सामग्री राउरकेला स्थित हेडक्वार्टर से मंगायी जायेगी. मटेरियल आने में करीब सात दिनों का समय लग सकता है. सामग्री पहुंचते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा. विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि मौसम और तकनीकी परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो करीब 15 दिनों में हल्के वाहनों की आवाजाही बहाल हो सकती है.
दो मोर्चों पर चलेगी कार्रवाई
विभाग ने इस पूरे मामले में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर तैयारी शुरू की है. हेडक्वार्टर की ओर से दो अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किये जा रहे हैं. पहला प्रस्ताव बीआरओ को अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण के लिये भेजा जायेगा, जबकि दूसरा स्थायी मरम्मत योजना से संबंधित होगा. उद्देश्य यह है कि फिलहाल यातायात बहाल किया जाये और साथ ही स्थायी समाधान की प्रक्रिया भी जारी रहे.
मंत्रालय को भेजा जायेगा प्रस्ताव
एनएच साउथ विंग, बिहार के मुख्य अभियंता संजय भारती ने बताया कि प्रस्ताव लगभग तैयार कर लिया गया है. इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नयी दिल्ली को भेजा जायेगा. इसकी प्रति बीआरओ को भी उपलब्ध करायी जायेगी, ताकि निर्माण प्रक्रिया में देरी न हो. विभाग ने स्पष्ट किया है कि बेली ब्रिज के माध्यम से तत्काल रिस्टोरेशन का निर्णय लिया जा चुका है.
उच्चस्तरीय बैठक में बनी सहमति
पथ निर्माण विभाग, पटना में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रभावित हिस्से पर अस्थायी बेली ब्रिज बनाने को मंजूरी दी गयी. बैठक में आईआईटी पटना और बीआरओ की तकनीकी रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि क्षतिग्रस्त स्पैन पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और यातायात आंशिक रूप से बहाल किया जा सके.
बीआरओ की तकनीकी विशेषज्ञता पर भरोसा
विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में तेजी से पुल निर्माण करने का अनुभव बीआरओ के पास है. इसी कारण एजेंसी को इस कार्य में शामिल किया गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्माण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जायें.
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