इस खबर में क्या है?
Bhagalpur News: टीएमबीयू के MBA विभाग में लाखों रुपये की किताबों की खरीद को लेकर पुराना विवाद फिर सामने आ गया है. इस बार विभाग के एक पूर्व छात्र ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि खरीद में तय नियमों का पालन नहीं किया गया. उनका कहना है कि न टेंडर निकाला गया और न ही जरूरी प्रशासनिक अनुमोदन की औपचारिकताएं पूरी की गईं. मामले को लेकर विश्वविद्यालय की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
आश्वासन के बाद भी नहीं खुली रिपोर्ट
शिकायत करने वाले पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, उन्होंने पहले इस मामले को लोक शिकायत में उठाया था. विश्वविद्यालय की ओर से निष्पक्ष जांच का भरोसा मिलने पर उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया था. अब आरोप है कि जांच पूरी होने के बावजूद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे संदेह और गहरा गया है.
खरीद प्रक्रिया पर उठे नए सवाल
पूर्व छात्र का दावा है कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों में टेंडर से जुड़ी कोई प्रक्रिया दर्ज नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि शुरू में सीमित संख्या में पुस्तकों की स्वीकृति ली गई थी, लेकिन बाद में उससे कहीं अधिक किताबें खरीदी गईं. साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि खरीदी गई कई पुस्तकें उपयोग में नहीं हैं और पाठ्यक्रम से मेल नहीं खातीं.
रिपोर्ट जारी नहीं हुई तो कोर्ट का रास्ता
शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 10 दिनों का समय देते हुए कहा है कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो वह फिर से न्यायालय का रुख करेंगे. इस संबंध में कुलाधिपति, कुलपति और रजिस्ट्रार को भी दोबारा आवेदन दिया गया है.
विश्वविद्यालय ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, जांच समिति पहले ही इस मामले में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर चुकी है. समिति का कहना है कि पुस्तक खरीद निर्धारित नियमों के अनुसार हुई है और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं. विभाग की निदेशक डॉ निर्मला कुमारी ने भी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया विश्वविद्यालय की अनुमति से ही पूरी की गई थी.
इसे भी पढ़ें-कुप्पाघाट आश्रम में 30 अप्रैल को महर्षि मेंहीं परमहंस की 142वीं जयंती
इसे भी पढ़ें-भागलपुर में ROB के ड्राइंग को रेलवे की मंजूरी, 2027 तक जाम से राहत की उम्मीद

