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Saturday, January 17, 2026
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Bihar News : बिहार के इस फोरलेन परियोजना की लागत में 15.46 करोड़ की कटौती, जारी हुआ टेंडर

Bihar News : लोहिया पुल से अलीगंज तक प्रस्तावित 3.70 किमी फोरलेन परियोजना की लागत में बड़ा बदलाव किया गया है. 50.17 करोड़ की जगह अब 34 करोड़ 70 लाख 90 हजार रुपये में सड़क निर्माण कराने की योजना स्वीकृत हुई है. लागत घटने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

Bihar News : लोहिया पुल से अलीगंज तक 3.70 किलोमीटर फोरलेन सड़क निर्माण का शिलान्यास पहले ही हो चुका है, मगर परियोजना की लागत में बड़ा बदलाव सामने आया है. शुरू में इस फोरलेन की लागत 50.17 करोड़ तय थी, जबकि अब इसे मात्र 34 करोड़ 70 लाख 90 हजार रुपये में पूरा करने की योजना स्वीकृत की गई है. नयी राशि के आधार पर प्रस्ताव जारी होते ही कुल 15 करोड़ 46 लाख 10 हजार रुपये की कटौती पर चर्चाओं और संदेहों का दौर तेज हो गया है.

लागत घटी तो उठने लगे कई तरह के सवाल

फोरलेन की निर्माण लागत में अचानक हुई भारी कमी ने गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि शुरुआती अनुमान सही था तो अब कम राशि में वही काम कैसे संभव होगा? और यदि कम लागत में ही सड़क बन सकती है तो शुरुआत में लगभग 50 करोड़ का प्रावधान क्यों रखा गया? दोनों स्थितियां विभाग की योजना प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर रही हैं.

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एक तरफ विभाग लागत घटाने को तकनीकी स्वीकृति के बाद का परिणाम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर निर्माण से पहले ही सड़क की मजबूती पर चर्चा शुरू हो गई है.

टेंडर की समयसीमा तय, साल भर में बनकर तैयार होना अनिवार्य

  • परियोजना के लिए विभाग ने निविदा जारी कर दी है.
  • 23 दिसंबर — टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि
  • 24 दिसंबर — टेक्निकल बिड खोला जाएगा

चयनित एजेंसी को अनुबंध मिलने के बाद 12 महीनों के भीतर फोरलेन सड़क निर्माण पूरा करना अनिवार्य होगा.

भागलपुर–अगरपुर–कोतवाली फोरलेन: एस्टिमेट भेजा गया, जांच शुरू

भागलपुर–अगरपुर–कोतवाली फोरलेन परियोजना का एस्टिमेट मुख्यालय को भेजा जा चुका है और कमेटी स्तर पर जांच शुरू है. अभी तकनीकी स्वीकृति नहीं मिली है, लेकिन इस परियोजना की लागत में भी कटौती की संभावना जताई जा रही है.

टेक्निकल सेंशन में कम हुआ एस्टिमेट

पथ निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अरविंद गुप्ता ने बताया कि
लागत में कमी टेक्निकल सेंशन के बाद हुई है. पहले की राशि अनुमानित थी और अब आवश्यकताओं की समीक्षा के बाद वास्तविक खर्च निर्धारित किया गया है.

उन्होंने कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग पर घटाई गई राशि खर्च होगी, जबकि बिजली विभाग से तार व पोल शिफ्टिंग का एस्टिमेट लंबित है. वन विभाग से एनओसी और क्लियरेंस चार्ज भी भुगतान करना है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
HelloCities24 से शुरुआत के दिनों से ही जुड़ी हैं. डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव है. राजनीतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण पत्रकारिता में गहरी रुचि रखती हैं.
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