Health Budget : सरकार ने 2026–27 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए 1.06 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया है. यह राशि पिछले साल के मुकाबले करीब 10% ज्यादा है, जिससे साफ है कि हेल्थ सेक्टर प्राथमिकता में है. फिलहाल भारत अपने जीडीपी का लगभग 3.3% स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कर रहा है.
दुनिया के बड़े देशों से तुलना करें तो अमेरिका स्वास्थ्य पर सबसे आगे है और अपनी जीडीपी का 16–17% इस पर लगाता है. रूस करीब 5% से ज्यादा और चीन लगभग 5% के आसपास खर्च करता है.
पाकिस्तान का खर्च काफी कम
स्वास्थ्य बजट के मामले में पाकिस्तान कई देशों से पीछे है. उसका हेल्थ स्पेंड जीडीपी के 1% के आसपास या उससे भी कम है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025–26 में पाकिस्तान का हेल्थ बजट पहले के मुकाबले घटाया गया.
स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बड़े प्रावधान
सरकार ने अलग-अलग स्वास्थ्य कार्यक्रमों और संस्थानों के लिए फंड तय किए हैं:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक
मेडिकल रिसर्च और ICMR के लिए करीब 4,800 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट में बढ़ोतरी
आयुष्मान भारत योजना के लिए अतिरिक्त फंड
डिजिटल हेल्थ और टेली-मेंटल हेल्थ सेवाओं के लिए अलग आवंटन
एम्स दिल्ली के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान
इसके साथ ही आयुर्वेद संस्थानों के विस्तार, बायोफार्मा निवेश और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर भी जोर है.
सरकार ने कई गंभीर बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला लिया है, जिससे इलाज का खर्च कम होने की उम्मीद है. आने वाले समय में देशभर में क्षेत्रीय मेडिकल हब भी विकसित किए जाएंगे.
Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026–27 में बांग्लादेश, मालदीव समेत कई साझेदार देशों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है. हालांकि, बांग्लादेश और मालदीव के लिए तय की गई सहायता राशि में कटौती की गई है.
भारत किस देश को कितनी आर्थिक मदद देगा? (राशि ₹ करोड़ में)
क्रम
देश
2024-25 (वास्तविक)
2025-26 (संशोधित)
2026-27 (बजट)
1
अफगानिस्तान
42.43
100.00
150.00
2
बांग्लादेश
59.15
120.00
60.00
3
भूटान
2485.08
2150.00
2288.56
4
नेपाल
701.62
700.00
800.00
5
श्रीलंका
317.41
300.00
400.00
6
मालदीव
480.26
600.00
550.00
7
मंगोलिया
8.29
5.00
25.00
8
अन्य विकासशील देश
77.91
150.00
80.00
9
अफ्रीकी देश
201.83
225.00
225.00
10
यूरेशियाई देश
24.13
40.00
38.00
11
लैटिन अमेरिकी देश
91.60
60.00
120.00
12
मॉरीशस
580.10
500.00
550.00
13
सेशेल्स
28.83
19.00
19.00
14
म्यांमार
410.82
350.00
300.00
सरकार ने कई देशों के लिए बढ़ाई आर्थिक सहायता, भूटान सबसे आगे
सरकार ने कुछ देशों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने का फैसला किया है. सबसे बड़ी बढ़ोतरी भूटान के लिए घोषित की गई है. इसके अलावा नेपाल, श्रीलंका और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों के लिए भी मदद में इजाफा किया गया है. साथ ही तीन अन्य देशों को दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाने की भी घोषणा हुई है. (राशि ₹ करोड़ में है)
क्रम
देश
2025-26 (संशोधित)
2026-27 (बजट)
बदलाव
1
भूटान
2150.00
2288.56
+138.56
2
नेपाल
700.00
800.00
+100.00
3
श्रीलंका
300.00
400.00
+100.00
4
लैटिन अमेरिकी देश
60.00
120.00
+60.00
5
मॉरीशस
500.00
550.00
+50.00
6
अफगानिस्तान
100.00
150.00
+50.00
7
मंगोलिया
5.00
25.00
+20.00
भारत ने पांच देशों की आर्थिक सहायता में की कटौती, बांग्लादेश और मालदीव शामिल
भारत ने बांग्लादेश और मालदीव समेत कुल पांच देशों के लिए तय आर्थिक सहायता में कमी करने की घोषणा की है. (राशि ₹ करोड़ में है)
Kharsawan : खरसावां के आकर्षणी मैदान में कोल्हान प्रमंडल पान (तांती) समाज कल्याण समिति की खरसावां-कुचाई इकाई द्वारा भव्य वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया गया. इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा नई पीढ़ी को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना रहा. समारोह की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष निरंजन तांती ने की.
कार्यक्रम की शुरुआत समाज के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मुकुंदराम तांती की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई. इसके बाद सभा का औपचारिक संचालन प्रारंभ हुआ, जिसमें समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई.
केंद्रीय अध्यक्ष मोतीलाल दास ने अपने संबोधन में कहा कि पान (तांती) समुदाय अनुसूचित जाति वर्ग में आता है, लेकिन सरकारी अभिलेखों और कागजी त्रुटियों के कारण तांती उपनाम रखने वाले अनेक लोग आज भी आरक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पान और तांती एक ही जाति के हिस्से हैं, इसलिए दोनों को समान रूप से लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि दस्तावेजी गड़बड़ियों को जल्द सुधारा जाए ताकि पात्र लोगों को उनका संवैधानिक हक मिल सके.
समिति के संस्थापक उमाकांत दास ने कहा कि समाज लंबे समय से अपनी जायज़ मांगों को लेकर आवाज उठाता रहा है. यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए तो समाज चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा. उन्होंने लोगों से संगठित रहने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक बनने की अपील की.
जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और समाज को भरोसा दिलाया कि कागजी विसंगतियों को दूर कराने में वे हरसंभव सहयोग करेंगे. उन्होंने सामाजिक विकास के कार्यों में भी साथ देने की बात कही.
प्रखंड अध्यक्ष निरंजन तांती ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी समाज की प्रगति शिक्षा, जागरूकता और एकता पर निर्भर करती है. उन्होंने लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर समाजहित में काम करने का आह्वान किया. साथ ही बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने की जरूरत बताई. उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति को समाज के विकास की आधारशिला बताया.
मेधावी छात्रों को मिला सम्मान
समारोह का एक खास आकर्षण मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान समारोह रहा. मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मंच पर बुलाकर पुरस्कार और प्रशस्ति देकर सम्मानित किया गया. सम्मान पाने वालों में दीपांशु तांती, चंदन कुमार दास, लाडली पात्रो, उत्तम कुमार तांती, दिया दास, केशव तांती, सपना दास, पवन कुमार तांती, तनीशा तांती, पुनम तांती और ज्योत्सना कुमारी शामिल रहे. इस दौरान अभिभावकों और समाज के लोगों ने बच्चों की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग देने का संकल्प लिया.
कार्यक्रम में केंद्रीय महासचिव हरिश चंद्र भंज, उपाध्यक्ष चुलने दंडपाट, नागेंद्र तांती, प्रवक्ता जगदीश दास, दिलीप तांती, देवीलाल तांती, रोहित दास, श्रीकांत दास, अर्जुन मल्लिक, परमेश्वर तांती, सुशील तांती, उपेंद्र तांती, अनोज दास, शरद पान, राहुल तांती, शिल्पा दास, लक्ष्मी तांती, बनीता तांती, प्रतिमा तांती समेत समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे.
समारोह का समापन समाज की एकजुटता और शिक्षा को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ.
Union Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) संशोधन की समय-सीमा बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन आयकर दरों में कोई राहत नहीं दी. नौकरी-पेशा वर्ग को इस बार भी टैक्स स्लैब में किसी बदलाव का लाभ नहीं मिला.
सरकार ने साफ किया है कि पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाएं पहले की तरह लागू रहेंगी. यानी करदाताओं को वही स्लैब फॉलो करने होंगे जो पहले से लागू हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस आय वर्ग पर कितना टैक्स लागू रहेगा.
नीचे वित्त वर्ष 2025-26 और 2024-25 के टैक्स स्लैब विस्तार से दिए गए हैं.
वित्त वर्ष 2025-26 : टैक्स स्लैब
पुरानी कर व्यवस्था (सामान्य करदाता)
आय
टैक्स
₹2.5 लाख तक
शून्य
₹2.5–5 लाख
5%
₹5–10 लाख
₹12,500 + 20%
₹10 लाख+
₹1,12,500 + 30%
₹50 लाख+
सरचार्ज
नई कर व्यवस्था (सामान्य करदाता)
आय
टैक्स
₹3 लाख तक
शून्य
₹3–7 लाख
5%
₹7–10 लाख
₹20,000 + 10%
₹10–12 लाख
₹50,000 + 15%
₹12–15 लाख
₹80,000 + 20%
₹15 लाख+
₹1,40,000 + 30%
वरिष्ठ नागरिक (60–80 वर्ष) – पुरानी व्यवस्था
आय
टैक्स
₹3 लाख तक
शून्य
₹3–5 लाख
5%
₹5–10 लाख
20%
₹10 लाख+
30%
वरिष्ठ नागरिक – नई व्यवस्था
आय
टैक्स
₹3 लाख तक
शून्य
₹3–7 लाख
5%
₹7–10 लाख
10%
₹10–15 लाख
15–20%
₹15 लाख+
30%
अति वरिष्ठ नागरिक (80+) – पुरानी व्यवस्था
आय
टैक्स
₹5 लाख तक
शून्य
₹5–10 लाख
20%
₹10 लाख+
30%
नई व्यवस्था (सभी आयुवर्ग)
आय
टैक्स
₹3 लाख तक
शून्य
₹3–7 लाख
5%
₹7–15 लाख
10–20%
₹15 लाख+
30%
पुरानी व्यवस्था (सामान्य करदाता)
आय
टैक्स
₹2.5 लाख तक
शून्य
₹2.5–5 लाख
5%
₹5–10 लाख
₹12,500 + 20%
₹10 लाख+
₹1,12,500 + 30%
नई व्यवस्था (सामान्य करदाता)
आय
टैक्स
₹2.5 लाख तक
शून्य
₹2.5–5 लाख
5%
₹5–7.5 लाख
₹12,500 + 10%
₹7.5–10 लाख
₹37,500 + 15%
₹10–12.5 लाख
₹75,000 + 20%
₹12.5–15 लाख
₹1,25,000 + 25%
₹15 लाख+
₹1,87,500 + 30%
वरिष्ठ नागरिक – पुरानी व्यवस्था
आय
टैक्स
₹3 लाख तक
शून्य
₹3–5 लाख
5%
₹5–10 लाख
20%
₹10 लाख+
30%
वरिष्ठ नागरिक – नई व्यवस्था
आय
टैक्स
₹2.5 लाख तक
शून्य
₹2.5–5 लाख
5%
₹5–7.5 लाख
₹12,500 + 10%
₹7.5–10 लाख
₹37,500 + 15%
₹10–12.5 लाख
₹75,000 + 20%
₹12.5–15 लाख
₹1,25,000 + 25%
₹15 लाख+
30%
अति वरिष्ठ नागरिक – पुरानी व्यवस्था
आय
टैक्स
₹5 लाख तक
शून्य
₹5–10 लाख
20%
₹10 लाख+
30%
नई व्यवस्था (सभी आयुवर्ग)
आय
टैक्स
₹2.5 लाख तक
शून्य
₹2.5–5 लाख
5%
₹5–7.5 लाख
₹12,500 + 10%
₹7.5–10 लाख
₹37,500 + 15%
₹10–12.5 लाख
₹75,000 + 20%
₹12.5–15 लाख
₹1,25,000 + 25%
₹15 लाख+
₹1,87,500 + 30%
📌 नोट: धारा 87A के तहत छूट लागू रहेगी। हेल्थ और एजुकेशन सेस 4% अतिरिक्त लगेगा.
नोट: धारा 87A के तहत योग्य करदाताओं को निर्धारित सीमा तक टैक्स राहत मिलेगी. लागू नियमों के अनुसार सरचार्ज और 4% हेल्थ व एजुकेशन सेस अलग से जोड़ा जाएगा. नई कर व्यवस्था चुनने पर ज्यादातर छूट और डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता.
Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026-27 में मोदी सरकार ने महिला सशक्तिकरण के अपने एजेंडे को जारी रखने का संकेत दिया है. हालांकि इस बार महिलाओं के लिए कोई बहुत बड़ा या विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया, फिर भी कुछ अहम पहलें सामने आई हैं जो महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं.
सरकार ने महिला उद्यमियों को सहयोग देने के लिए कम्युनिटी-ओन्ड रिटेल स्टोर्स यानी सामुदायिक स्वामित्व वाली खुदरा दुकानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा है. इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर मिलेंगे. इसके अलावा महिलाओं के नेतृत्व में मत्स्य पालन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों की महिलाओं को आय के नए साधन मिल सकें.
सरकार की चर्चित ‘लखपति दीदी’ योजना को भी जारी रखने की घोषणा की गई है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. सरकार मानती है कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है.
महिला शिक्षा को प्राथमिकता
महिलाओं की शिक्षा को लेकर भी बजट में जोर दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि देश के हर जिले में एक बालिका छात्रावास स्थापित किया जाएगा. इसका मकसद उन लड़कियों को सुरक्षित और सुलभ आवास उपलब्ध कराना है जो उच्च शिक्षा के लिए अपने घर से दूर शहरों में आती हैं. इससे पढ़ाई के दौरान उन्हें रहने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा और अधिक लड़कियां उच्च शिक्षा के लिए आगे आएंगी.
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने सरकार के तीन प्रमुख कर्तव्यों का जिक्र किया, जिनमें जन आकांक्षाओं को पूरा करना भी शामिल है. महिलाओं के लिए घोषित ये कदम उसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं.
पिछले बजट से तुलना
अगर पिछले साल के बजट पर नजर डालें तो वह GYAN—गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी—पर केंद्रित था. उस समय जेंडर बजट के तहत 4.49 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो उससे पहले के साल की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक था. यह राशि कुल बजट का करीब 8.8 फीसदी हिस्सा थी और उसे महिला-उन्मुख बजट के तौर पर पेश किया गया था.
इस बार भले ही बड़ी घोषणाएं कम दिखीं, लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि महिला सशक्तिकरण उसकी नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा. उद्यमिता, शिक्षा और आजीविका के जरिए महिलाओं को मजबूत बनाने की दिशा में ये कदम आगे भी जारी रह सकते हैं.
Bihar Crime : बेगूसराय जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसमें खोदाबंदपुर थाना क्षेत्र में एक युवक की निर्मम हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई है. मामला बाड़ा वार्ड नंबर 5 का है, जहां अपराधियों ने पहले तेज धारदार हथियार से हमला किया और फिर गोली मारकर युवक की हत्या कर दी. घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है.
परीक्षा देकर घर लौटा था युवक
मृतक की पहचान 22 वर्षीय प्रियांशु राज उर्फ बादल के रूप में हुई है. वह योगेंद्र पासवान का पुत्र और बाड़ा वार्ड नंबर 5 का निवासी था. परिजनों के अनुसार प्रियांशु बीएससी नर्सिंग की परीक्षा देकर शनिवार को ही घर लौटा था. इसके अगले ही दिन रात में उसकी हत्या कर दी गई. इससे परिवार में मातम पसरा है.
मौके से मिले खोखे और मोबाइल
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने मौके से तीन खोखे बरामद किए हैं. वहीं मृतक का मोबाइल फोन पास के खेत में फेंका हुआ मिला, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है. प्रारंभिक जांच में मामला सुनियोजित हत्या का लग रहा है.
सूचना मिलते ही मंझौल एसडीपीओ नवीन कुमार, थानाध्यक्ष चंदन कुमार, अपर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार, एसआई विनय कुमार पांडेय और एएसआई विवेक कांत शेखर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय भेज दिया है.
फिलहाल पुलिस हत्या के कारणों और आरोपियों की पहचान में जुटी है. आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और मामले की गहन जांच जारी है.
Road Accident: बक्सर जिले में एनएच-922 पर रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. इस दुर्घटना में एक ही परिवार के चार लोगों की मौके पर ही जान चली गई. हादसा तब हुआ जब कार में सवार चार लोग बक्सर की तरफ जा रहे थे. जैसे ही उनकी गाड़ी चंदा गांव के पास पहुंची, सामने से आ रहे तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भयानक थी कि कार बुरी तरह चकनाचूर हो गई और घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई. कार में मौजूद दो पुरुष और दो महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.
मृतकों की पहचान हुई
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को तुरंत सदर अस्पताल, बक्सर पहुंचाया गया. हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया. मृतकों की पहचान एसएसबी जवान सुजीत कुमार पांडेय, ओमकार पांडेय, गिरजा देवी और मंजू देवी के रूप में हुई है. बताया गया कि सभी लोग स्वर्गीय चितरंजन पांडेय के परिवार से जुड़े थे. मृतकों में दो सगे भाई और दो बहनें शामिल थीं, जिससे परिवार पर एक साथ दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
परिजनों के मुताबिक घर में 2 फरवरी को तिलक समारोह होना था. उसी की तैयारी को लेकर परिवार के लोग गंगा पूजा और खरीदारी के लिए कार से बक्सर जा रहे थे. लेकिन रास्ते में ही यह भीषण हादसा हो गया और खुशियों का माहौल पलभर में मातम में बदल गया.
परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह के वक्त इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था. विजिबिलिटी कम होने के बावजूद कई वाहन तेज रफ्तार में चल रहे थे. आशंका जताई जा रही है कि कोहरे की वजह से ट्रक चालक को सामने चल रही कार दिखाई नहीं दी, जिससे यह टक्कर हुई.
पुलिस जांच में जुटी
हादसे की सूचना मिलते ही नया भोजपुर थाना की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. साथ ही दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात सामान्य कराया गया. फिलहाल पुलिस टक्कर मारकर फरार हुए ट्रक और उसके चालक की तलाश में जुटी है. मामले की जांच जारी है.
Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आम बजट 2026 पेश किए जाने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है. बजट को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के नेता इसे विकासोन्मुख और दूरदर्शी बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने कई बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बजट को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की.
रोहिणी आचार्य का बजट पर जबरदस्त हमला
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में बजट की तुलना पुराने सामान को नए पैकेज में पेश करने से की. उन्होंने लिखा कि बजट में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का कोई ठोस खाका नजर नहीं आता. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि डिजिटल कंटेंट क्रिएशन को बढ़ावा देने की बात तो कही गई है, लेकिन देश के शिक्षित और अशिक्षित युवाओं के लिए वास्तविक रोजगार के अवसर कैसे पैदा होंगे और किन क्षेत्रों में जॉब क्रिएशन होगा, इस पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
पुराने सामान को नए डिब्बे में नए लेबल के साथ परोसने जैसा ही है बजट ..
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी कैसे होगी ? इस पर बजट में कोई स्पष्टता नहीं है , डिजिटल कंटेंट क्रिएशन को बढ़ावा देने की बात की गयी है , मगर देश की शिक्षित व् गैर – शिक्षित… pic.twitter.com/5tdOo1uwt7
रोहिणी ने आगे लिखा कि देश के सबसे गंभीर मुद्दों में शामिल रोजगार और क्षेत्रीय जरूरतों पर बजट पर्याप्त स्पष्टता नहीं देता. खासकर बिहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के लिए बाढ़ प्रबंधन, बाढ़ रोकथाम, बाढ़ के बाद पुनर्वास और सिंचाई ढांचे के विकास हेतु लंबे समय से विशेष पैकेज की मांग की जा रही है, लेकिन इस बजट में ऐसे किसी विशेष प्रावधान का न होना निराशाजनक है. उन्होंने इसे बिहार की जरूरतों की अनदेखी करार दिया.
बीजेपी ने किया सराहना, सम्राट चौधरी ने ये कहा
जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं भाजपा और एनडीए के नेता बजट की जमकर तारीफ कर रहे हैं. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बजट को विकसित भारत के विजन की दिशा में अहम कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह बजट उस सोच को दर्शाता है जिसमें भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की ठोस तैयारी झलकती है.
सम्राट चौधरी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया है. उन्होंने कहा कि बजट में उन सेक्टरों पर विशेष ध्यान दिया गया है जो देश की आर्थिक मजबूती और भविष्य की प्रगति के लिए जरूरी हैं.
राजनीतिक बहस तेज
बजट के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. एक तरफ इसे विकास का रोडमैप बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे अधूरा और दिशाहीन बता रहा है. आने वाले दिनों में बजट को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं, क्योंकि रोजगार, क्षेत्रीय विकास और राज्य-विशेष पैकेज जैसे मुद्दे बिहार की राजनीति में हमेशा से अहम रहे हैं.
Union Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स के लिए कई महत्वपूर्ण राहतों की घोषणा की है. इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) रिवाइज करने की समय-सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव इसमें प्रमुख है. अब करदाता मामूली फीस का भुगतान करके 31 दिसंबर की बजाय 31 मार्च तक अपने रिटर्न को संशोधित कर सकेंगे. इसका उद्देश्य करदाताओं को गलतियों को सुधारने और अनावश्यक पेनल्टी से बचाने में मदद करना है.
ITR फाइलिंग के लिए अलग-अलग समयसीमा
फाइनेंस मंत्री ने आईटीआर फाइलिंग की समय-सीमा को विभिन्न प्रकार के करदाताओं के लिए अलग-अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फाइल करने वाले करदाता 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे. वहीं, नॉन-ऑडिट व्यवसाय और ट्रस्ट को 31 अगस्त तक रिटर्न जमा करने की अनुमति होगी. इसका मकसद आईटीआर प्रोसेसिंग को सरल और टैक्सपेयर्स के लिए सुविधाजनक बनाना है.
छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमेटेड सुविधा
छोटे करदाताओं के अनुपालन को आसान बनाने के लिए सरकार एक नियम-आधारित ऑटोमेटेड प्रोसेस शुरू करने जा रही है. इस प्रक्रिया के तहत असेसिंग ऑफिसर के पास आवेदन किए बिना ही कम या शून्य डिडक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त किया जा सकेगा. इससे टैक्स फाइलिंग का समय बचेगा और अनुपालन सरल होगा.
फॉर्म 15जी और 15एच की प्रक्रिया होगी आसान
कई कंपनियों में निवेश रखने वाले करदाताओं की सुविधा के लिए डिपॉजिटरी को फॉर्म 15जी और 15एच सीधे संबंधित कंपनियों को स्वीकार करने और उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाएगी. इससे टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी प्रक्रिया अधिक आसान और तेज होगी.
अपील अवधि में ब्याज से राहत
बजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई करदाता प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करता है, तो अपील की अवधि के दौरान जुर्माने की राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा. चाहे फैसला किसी भी पक्ष में आए, इस प्रावधान से विवादित मामलों में करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी.
ओवरसीज टूर प्रोग्राम पैकेज पर टीसीएस दर में कमी
डायरेक्ट टैक्स मोर्चे पर सरकार ने ओवरसीज टूर प्रोग्राम पैकेज पर टीसीएस दर को घटाकर 5% और 20% की बजाय 2% करने का प्रस्ताव रखा है. इसके अलावा, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत शिक्षा और मेडिकल उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर को 5% से घटाकर 2% किया जाएगा. इसका मकसद विदेश में पढ़ाई और चिकित्सा खर्चों को मिडिल क्लास परिवारों के लिए किफायती बनाना है.
एनआरआई, छात्रों और सहकारी समितियों के लिए लाभ
छात्रों, तकनीकी पेशेवरों और एनआरआई करदाताओं के लिए छह महीने की विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिले मुआवजे को आयकर से छूट दी जाएगी. अधिसूचित सहकारी समितियों के निवेश से प्राप्त लाभांश पर तीन साल की टैक्स छूट और कपास बीज व पशु आहार आपूर्ति करने वाले सहकारी सदस्यों के लिए छूट अवधि बढ़ाने का भी ऐलान किया गया है.
डेटा सेंटर और अनिवासी करदाताओं को राहत
भारत में डेटा सेंटर के माध्यम से वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स छूट दी जाएगी. वहीं, अनुमान आधारित कर भुगतान करने वाले अनिवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से राहत दी जाएगी. ये कदम डायरेक्ट टैक्स सिस्टम को सरल, करदाता-अनुकूल और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.
टीसीएस दरों में कमी जैसी महत्वपूर्ण राहत
बजट 2026-27 ने टैक्सपेयर्स के लिए समयसीमा विस्तार, ऑटोमेटेड प्रोसेस, फॉर्म 15जी-15एच की सरल प्रक्रिया, अपील अवधि में ब्याज से राहत और टीसीएस दरों में कमी जैसी महत्वपूर्ण राहतें दी हैं. इसके अलावा, छात्रों, एनआरआई, सहकारी समितियों और डेटा सेंटर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान पेश किए गए हैं. इन उपायों से डायरेक्ट टैक्स प्रणाली को और पारदर्शी, सरल और करदाता-अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है.
Budget 2026 : 01 फरवरी, 2026 रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 संसद में पेश किया. इस बजट में आम आयकरदाताओं के लिए कोई बड़ी छूट या बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और घरेलू खर्चों को लेकर कुछ अहम राहतें दी गई हैं. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयों की कीमतों में कमी की घोषणा इसके प्रमुख आकर्षणों में रही. बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि ‘सुधार एक्सप्रेस’ अपनी तय गति से आगे बढ़ रही है और सरकार इस गति को बनाए रखेगी. उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा कर्तव्य है कि हर परिवार, हर समुदाय और हर वर्ग तक संसाधन, सुविधाएं और अवसर पहुंचें.”
विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक वृद्धि का लाभ हर किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और युवा तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि श्रम संहिता, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश और एसटी में सुधार जैसी कई पहलों को पहले ही 15 अगस्त से लागू कर दिया गया है. उन्होंने सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा, “सरकार का कर्तव्य केवल आर्थिक वृद्धि करना नहीं है, बल्कि इसे बनाए रखना और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना भी है. हमारी कोशिश है कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाए.”
तीन कर्तव्य, तीन लक्ष्य
सीतारमण ने बजट में सरकार के तीन प्रमुख ‘कर्तव्य’ भी बताए, जिनसे न केवल अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, बल्कि गरीब और पिछड़े वर्गों की स्थिति भी मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि यह पहला बजट है जिसे कर्तव्य भवन में तैयार किया गया है और इसे सरकार के संकल्प के अनुरूप बनाया गया है.
पहला कर्तव्य: उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर और वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं के प्रति लचीलापन रखते हुए आर्थिक वृद्धि को तेज करना और उसे स्थायी बनाना.
दूसरा कर्तव्य: नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का विकास करना, ताकि वे भारत की प्रगति और समृद्धि में सक्रिय भागीदार बन सकें.
तीसरा कर्तव्य: ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विज़न के अनुरूप यह सुनिश्चित करना कि हर परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को संसाधनों तक पहुंच प्राप्त हो.
क्या सस्ता, क्या महंगा देखिए पूरी लिस्ट
क्या सस्ता
क्या महंगा
कैंसर, शुगर से जुड़ी दवाइयां
खनिज
सोलर एनर्जी से जुड़ी चीजें
स्क्रैप
चमड़ा और कपड़ा निर्यात
शराब
जूते, बैट्री
वायदा कारोबार करना
माइक्रोवेव ओवन
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रक्षा क्षेत्र में बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट
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विदेश में पढ़ाई और पैसा भेजना हुआ आसान
सरकार ने विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत बढ़ाई है. पहले एजुकेशन लोन लेकर विदेश भेजते समय TCS देना पड़ता था. अब मान्यता प्राप्त बैंक या संस्थान से लिए गए लोन पर यह TCS नहीं लगेगा. इससे विदेशी शिक्षा का खर्च थोड़ा कम हुआ है.
साथ ही, LRS (लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम) के तहत टैक्स-फ्री राशि की सीमा भी ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है. इसका मतलब है कि परिवार अब अपने बच्चों की विदेश पढ़ाई, इलाज या अन्य आवश्यक खर्चों के लिए अधिक पैसा बिना किसी अतिरिक्त टैक्स कटौती के भेज सकते हैं. इसका मकसद मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ने वाले अचानक वित्तीय बोझ को कम करना और छात्रों के लिए ग्लोबल एजुकेशन के अवसर आसान बनाना है.
स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत – दवाइयां सस्ती होंगी
बजट में ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना की शुरुआत की घोषणा की गई है. इसके तहत अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. इस पहल से विशेषकर शुगर (डायबिटीज) और कैंसर जैसी बीमारियों की जरूरी दवाओं की कीमतें कम होने की उम्मीद है. इससे मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज का खर्च कम होगा और जरूरी उपचार करवाना आसान होगा.
खेलकूद और घरेलू सामान में राहत
‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम को अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा. इसके तहत 10,000 करोड़ रुपये SMEs को आवंटित किए गए हैं, जिससे बैट, बॉल और फिटनेस गियर जैसे खेलकूद के सामान सस्ते होंगे. इससे खेलकूद में निवेश बढ़ेगा और बाजार में इन उत्पादों की बिक्री में भी तेजी आएगी.
मछुआरों और समुद्री उद्योग को बढ़ावा
अब भारत के जहाजों द्वारा EEZ और अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में पकड़ी गई मछलियों पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी. इससे समुद्री मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरों की आय में सुधार होगा. इसके परिणामस्वरूप समुद्री खाद्य सामग्री के दामों में भी थोड़ी कमी आ सकती है.
चमड़ा उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहारा
चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कुछ आवश्यक कच्चे माल और उत्पादों के आयात पर कस्टम ड्यूटी मुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे जूते, बेल्ट और बैग जैसी भारतीय लेदर वस्तुएं सस्ती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगी.
लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी छूट जारी रखी गई है. इससे भारत में बैटरी निर्माण बढ़ेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है. इसके साथ ही मोबाइल फोन और टैबलेट्स भी सस्ते होने की संभावना है.
किसानों और सहकारी समितियों के लिए राहत
कपास के बीज और पशु चारा सप्लाई करने वाले सहकारी समितियों को मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ा दी गई है. इसका उद्देश्य किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों को आर्थिक सहारा देना है.
टैक्स विवादों में राहत
यदि कोई करदाता पेनल्टी के खिलाफ पहली अपील प्राधिकरण (First Appellate Authority) के पास अपील करता है, तो सुनवाई के दौरान पेनल्टी पर कोई ब्याज नहीं लगेगा. इससे कर विवादों में लोगों पर तत्काल वित्तीय दबाव कम होगा.
अन्य राहतें और महंगाई
माइक्रोवेव, सोलर पैनल और इम्पोर्टेड लकड़ी के सामान सस्ते होंगे. इसके अलावा 17 दवाइयों और 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दवाओं के आयात पर कीमत में कमी आएगी.
वहीं, शराब, सिगरेट और पान मसाला जैसे उत्पाद महंगे होंगे. इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ सकता है.