Bhagalpur : भारतीय मजदूर संघ एवं राष्ट्रीय बैंक अधिकारी संगठन से संबद्ध बिहार राज्य यूको बैंक अधिकारी संघ के आह्वान पर, यूको बैंक में कार्यरत भागलपुर के सभी अधिकारीगण एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन पर रहे. इस धरने में अलग-अलग शाखा और अन्य बैंक के साथ भारतीय मजदूर संघ से लगभग 500 लोग शामिल हुए.
धरने का मुख्य उद्देश्य और अधिकारियों की मांगें
धरने का मुख्य उद्देश्य वर्तमान परिदृश्य में बैंककर्मी अत्यधिक तनाव का सामना कर रहे हैं और कार्य-जीवन संतुलन नहीं बना पा रहे. अधिकारियों ने कहा कि “महिलाओं, दिव्यांगजनों और अधिकारियों पर क्रूर हमला बंद होना चाहिए”, क्योंकि स्वास्थ्य, परिवार और कार्यालय तीनों महत्वपूर्ण हैं.
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अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि तीनों को बराबर समय देना अनिवार्य है, यानी स्वास्थ्य, परिवार और कार्यालय को 8-8 घंटे दिया जाना जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूको बैंक भागलपुर का प्रबंधन सभी दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर रहा है और बिहारी भावनाओं को कुचल रहा है, जिस पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए.
धरने का नेतृत्व और प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
इस विशाल धरना प्रदर्शन की अगुवाई भारतीय मजदूर संघ बिहार के महासचिव संजय सिन्हा, अध्यक्ष राजेश कुमार पाल, और अखिल भारतीय यूको बैंक अधिकारी महासंघ के अध्यक्ष चंद्र मोहन सिंह ने की.
साथ ही Nobo सभी बैंक के महासचिव कुमार अविनाश और अध्यक्ष अभिषेक सिन्हा भी धरने में मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन BSUCBOA के अध्यक्ष श्री अवनीश वर्मा एवं अंचल सचिव आनंद कुमार सिंह ने किया.
अन्य नेताओं और संगठनों का समर्थन
धरने में बिहार राज्य बैंकर्स समिति के अध्यक्ष श्री अभिषेक सिन्हा और उप महासचिव श्री रोहित कुमार उपस्थित थे.
बिहार राज्य SC/ST एवं OBC परिषद के सचिव श्री योगेश कुमार ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ सहमति व्यक्त की और प्रबंधन के कृत्यों पर असंतोष जताया.
इसके अलावा बिहार के उप महासचिव श्री श्याम कुमार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.
इन सभी नेताओं और संगठनों ने धरने के दौरान प्रबंधन के खिलाफ स्पष्ट समर्थन दिया और अधिकारियों की मांगों को सही ठहराया.
प्रबंधन को चेतावनी और भविष्य की रणनीति
धरने के दौरान अधिकारियों ने प्रबंधन को अपनी मांगें सौंप दी. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार सुबह तक इन मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में विस्तृत विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल कामकाजी परिस्थितियों में सुधार और कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन द्वारा नियमों और दिशानिर्देशों का पालन न करना, कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव डालना और बिहारी भावनाओं को नजरअंदाज करना अस्वीकार्य है.
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