शेखपुरा में ट्रक-ऑटो की जोरदार टक्कर, 5 की जान गई.
Bihar Road Accident: बिहार के शेखपुरा जिले में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब शेखपुरा–चेवाड़ा मार्ग पर मनिंडा गांव के पास ट्रक और ऑटो की आमने-सामने टक्कर हो गई. भिड़ंत इतनी तेज थी कि ऑटो का ढांचा चकनाचूर हो गया और मौके पर ही चार यात्रियों की मौत हो गई. अस्पताल में उपचार के दौरान एक और घायल ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई.
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने टूटे हुए ऑटो से घायलों को निकालकर शेखपुरा सदर अस्पताल पहुंचाया. डॉक्टरों के अनुसार, आठ लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं और कई की हालत नाजुक बनी हुई है.
हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव फैल गया. ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क पर जाम लगा दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराने की कोशिश की और यातायात बहाल करने का प्रयास किया.
PM Modi in Ayodhya: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अयोध्या पहुंचे और राम मंदिर के शिखर पर निर्मित भगवा धर्म ध्वजा फहराई. यह ध्वज मंदिर निर्माण कार्य की पूर्णता और सनातन आस्था की विजय का प्रतीक माना जा रहा है. पीएम मोदी का स्वागत साकेत महाविद्यालय में बने विशेष हेलीपैड पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत समेत हजारों श्रद्धालु और अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे.
#WATCH अयोध्या ध्वजारोहण | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ऐतिहासिक ध्वजारोहण से पहले शेषावतार मंदिर में पूजा-अर्चना की।
पूरी अयोध्या आज भव्य सजावट और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर है. शहर के कोने-कोने में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं. मुख्य कार्यक्रम में आठ विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है.
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
भक्तों में अद्भुत उत्साह देखने को मिल रहा है. एक बुज़ुर्ग श्रद्धालु ने कहा, “मैं भगवान के दर्शन के लिए जा रही हूं. मेरी बेटियां साथ हैं. आज अयोध्या अत्यंत सुंदर और दिव्य रूप में सजी है.”
विशेष ध्वजा का निर्माण
राम मंदिर पर फहराई गई यह ध्वजा गुजरात के अहमदाबाद में काश्यप मेवाड़ा ने हाथ से तैयार की. ध्वज निर्माण में मशीन का उपयोग नहीं किया गया और तीन परतों वाले मजबूत कपड़े का प्रयोग हुआ, जिसकी मजबूती पैराशूट फैब्रिक जैसी मानी जाती है. हर सिलाई और कढ़ाई हाथ से की गई और इसे तैयार करने में 25 दिन का समय लगा. यह ध्वज पूर्णतः स्वदेशी सामग्री से निर्मित है.
Bihar Cabinet : नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी नई सरकार आज अपनी पहली कैबिनेट बैठक करने जा रही है. सत्ता में वापसी के बाद यह पहला अवसर होगा जब मुख्यमंत्री के साथ दोनों डिप्टी सीएम—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—समेत सभी 26 मंत्री एक साथ बैठकर अगले कुछ महीनों का एजेंडा तय करेंगे. विधानसभा चुनाव के दौरान जिन मुद्दों को NDA ने प्राथमिकता दी थी, उन्हें औपचारिक मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है.
रोजगार और पलायन रोकने पर फोकस की तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में रोजगार सृजन की दिशा में शुरुआती कदम उठाए जा सकते हैं. विभागों से यह भी पूछा गया है कि किन परियोजनाओं में तत्परता से नियुक्तियों या कौशल कार्यक्रमों को तेज किया जा सकता है. चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा रोजगार को ‘शीर्ष एजेंडा’ बताया था, इसलिए पहली कैबिनेट से ही इसकी शुरुआत पर जोर दिया जा रहा है.
इसके साथ ही उन जिलों की योजनाओं की समीक्षा हो सकती है जहाँ से बड़े पैमाने पर श्रमिकों का पलायन होता है. सरकार स्थानीय स्तर पर उद्योग, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कुछ फैसले लेने की तैयारी में है.
विशेष विधानसभा सत्र बुलाने पर मुहर संभव
माना जा रहा है कि कैबिनेट विशेष विधानसभा सत्र के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे सकती है. सत्र को लेकर प्रशासन ने तैयारियाँ तेज कर दी हैं. पटना जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था मजबूत रखने के लिए DM के निर्देश पर जिले, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रोक दी हैं. यह रोक संभावित सत्र खत्म होने तक लागू रहेगी. अधिकारियों को व्यवस्था सुचारू रखने और सुरक्षा जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.
मंत्रियों ने संभाला कामकाज, विभागों में गतिविधि बढ़ी
सोमवार को कई मंत्रियों ने शुभ मुहूर्त में अपने-अपने विभागों का कार्यभार ग्रहण कर लिया.
बिजेंद्र यादव ने शराबबंदी विभाग की कमान संभाली.
सुरेंद्र मेहता ने पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का कार्यभार लिया.
संजय सिंह टाइगर ने श्रम संसाधन विभाग संभाला.
विजय कुमार सिन्हा को राजस्व और भूमि सुधार विभाग का कार्यभार दिया गया.
इसके पहले शनिवार को भी कई मंत्रियों ने पदभार ग्रहण किया था.
दीपक प्रकाश (उपेंद्र कुशवाहा के बेटे) ने पंचायती राज विभाग का कार्यभार संभाला.
अशोक चौधरी ने ग्रामीण कार्य विभाग संभाला.
श्रेयंसी सिंह ने आईटी विभाग की जिम्मेदारी ली.
इन लगातार विभागीय कार्यभार ग्रहणों के बाद सचिवालय और संबंधित मंत्रालयों में हलचल बढ़ गई है. सभी विभाग अपने-अपने एजेंडे तैयार कर पहली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुति देने की तैयारी में हैं.
पहली कैबिनेट के फैसलों पर राज्य की निगाहें
नई सरकार की पहली बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे यह साफ होगा कि सरकार प्रशासनिक कठोरता, योजनाओं की गति और वित्तीय अनुशासन को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ने वाली है. कई विभागों ने पहले ही फाइलें और प्रस्ताव सचिवालय भेज दिए हैं जिन पर आज निर्णय लिए जा सकते हैं.
Greater Patna Plan: बिहार में नई सरकार बनने के बाद शहरी ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने की तैयारी तेज हो गई है. मंगलवार की कैबिनेट बैठक में वह अहम निर्णय लिये जाने की उम्मीद है, जिसकी प्रतीक्षा कई वर्षों से की जा रही थी. पटना–सोनपुर के बीच विकसित होने वाली ‘ग्रेटर पटना’ ग्रीनफील्ड टाउनशिप इसी बदलाव का बड़ा आधार बनेगी. दिल्ली–एनसीआर मॉडल पर राजधानी को एक विस्तृत महानगरीय क्षेत्र में बदलने का रास्ता अब खुलता दिख रहा है.
पटना–सोनपुर बेल्ट में ‘न्यू पटना’ की तैयारी
नगर विकास विभाग की योजना के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत पटना को केंद्र में रखकर की जा रही है. सोनपुर के व्यापक भूभाग को जोड़ते हुए ‘न्यू पटना’ या ‘ग्रेटर पटना’ नाम से एक आधुनिक एवं सुव्यवस्थित ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव है.
इस टाउनशिप में चौड़ी सड़कें, बड़े हरित क्षेत्र, स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्कूल–कॉलेज, कॉर्पोरेट व बिजनेस ज़ोन, आवासीय सेक्टर और हाई–डेंसिटी ट्रांजिट कॉरिडोर तक की योजना शामिल है.
कैबिनेट में एक अन्य प्रमुख प्रस्ताव सीतामढ़ी में ‘सीतापुरम’ नाम की आध्यात्मिक सिटी को मंजूरी देने का भी है. मां जानकी की जन्मस्थली को वैश्विक धार्मिक–पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने के लिए यह टाउनशिप तैयार की जा रही है, ताकि यह मथुरा, अयोध्या और उज्जैन जैसे प्रमुख तीर्थ–केंद्रों की तरह स्थापित हो सके.
सभी प्रमंडलीय मुख्यालयों में सैटेलाइट सिटी का प्लान
नव नियुक्त नगर विकास मंत्री नितिन नवीन ने कार्यभार संभालते ही इस बड़े बदलाव को प्राथमिकता दी है. विभाग की ओर से सात प्रस्ताव कैबिनेट को भेजे गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है—बिहार के नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में मॉडल सिटी विकसित करने की योजना. इससे मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, चंपारण और अन्य प्रमुख शहरों में भी समान आधार पर सैटेलाइट टाउनशिप स्थापित की जाएँगी.
लैंड पूलिंग मॉडल: जमीन मालिकों को लाभ, सरकार पर कम बोझ
पिछले वर्ष अगस्त में राज्य सरकार ने नई टाउनशिप नीति को मंजूरी दी थी, जिसमें लैंड पूलिंग मॉडल को आधार बनाया गया है. दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा और गुजरात की तर्ज पर लागू होने वाले इस मॉडल में जमीन मालिकों की भूमि लेकर उसे विकसित किया जाएगा और फिर उन्हें विकसित प्लॉट का 55% हिस्सा वापस मिलेगा. बाकी भूमि का उपयोग इस प्रकार प्रस्तावित है—
22% सड़क और परिवहन ढांचा
5% पार्क, अस्पताल, सार्वजनिक उपयोग सेवाएँ
3% आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास
शेष 15% भाग सरकार बाजार मूल्य पर बेचेगी या कॉलोनी विकसित कर उपलब्ध कराएगी
बिहार का पहला मेगासिटी प्लान—दिल्ली एनसीआर मॉडल पर ग्रेटर पटना
ग्रेटर पटना को बिहार का पहला ऐसा मेगासिटी माना जा रहा है, जिसे पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ प्लान किया जा रहा है. ट्रैफिक प्रबंधन, जल निकासी, स्मार्ट ट्रांजिट व्यवस्था, कचरा निस्तारण, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों के विकास को इस परियोजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि पटना–सोनपुर कॉरिडोर आने वाले वर्षों में बिहार की आर्थिक ग्रोथ का प्रमुख केंद्र बने.
सोमवार देर रात तक नगर विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी—सचिव अभय कुमार और बुडको के एमडी अनिमेष कुमार—मंत्री नितिन नवीन के साथ प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा करते रहे. विभाग को भरोसा है कि इस बार कैबिनेट में परियोजनाओं को बिना किसी बदलाव के मंजूरी मिल जाएगी.
बिहार के शहरी भविष्य की नई तस्वीर
ग्रेटर पटना, सीतापुरम और नौ प्रमंडलों में प्रस्तावित सैटेलाइट सिटीज मिलकर बिहार के शहरी ढांचे को नई दिशा देने वाली हैं. इससे बड़े शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव में कमी आएगी, रोजगार के अवसर बनेंगे, ट्रैफिक और प्रदूषण का बोझ घटेगा और निवेशकों को बेहतर वातावरण मिलेगा. सरकार इन परियोजनाओं को आने वाले दशक की सबसे निर्णायक शहरी सुधार पहल मान रही है.
Ethiopia’s volcano eruption ash could reach India: इथियोपिया में लगभग 10,000 वर्षों से शांत पड़े ज्वालामुखी के अचानक फटने के बाद वायुमंडल में उठा विशाल राख का गुबार अब भारत की ओर बढ़ रहा है. विशेषज्ञों और मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यह राख का बादल अगले 24–36 घंटों में पश्चिमी भारत में प्रवेश कर सकता है और फिर कई उत्तरी राज्यों को प्रभावित करेगा. फिलहाल एयरलाइंस और पर्यावरण एजेंसियाँ स्थिति की लगातार निगरानी कर रही हैं.
इथियोपिया में अप्रत्याशित विस्फोट, 15 किमी ऊपर तक उठा धुएँ का गुबार
अफार क्षेत्र की एर्टा अले रेंज में स्थित हायली गुब्बी ज्वालामुखी रविवार सुबह अचानक सक्रिय हो गया. तूलूज वोल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर (VAAC) के अनुसार, विस्फोट सुबह 8:30 बजे यूटीसी के आसपास शुरू हुआ और थोड़ी देर बाद शांत हो गया, लेकिन इससे उठी राख की एक विशाल परत 15 किलोमीटर तक ऊँचाई पर फैल गई. एजेंसियों का कहना है कि राख में सूक्ष्म काँच जैसे कण, ज्वालामुखीय धूल और सल्फर डाइऑक्साइड मौजूद है, जो दूर तक हवा के साथ तेजी से यात्रा कर सकते हैं.
राख का बादल भारत की ओर, मौसम एजेंसियों की नजर
IndiaMetSky Weather ने चेतावनी दी है कि यह राख का गुबार 100–120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भारत की दिशा में बढ़ रहा है.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार:
25 नवंबर की शाम तक यह बादल गुजरात के पश्चिमी हिस्सों को छू सकता है.
इसके बाद यह राजस्थान, उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की ओर बढ़ेगा.
रात तक यह परत हिमालयी क्षेत्रों तक पहुँच सकती है.
एजेंसी ने कहा कि राख का यह गुबार आसमान को सामान्य से अधिक धुँधला और गहरा दिखा सकता है. इसके अतिरिक्त उड़ानों के मार्ग बदलने या देरी की आशंका भी बढ़ सकती है.
मौसम सेवा ने यह भी बताया कि हायली गुब्बी से लेकर गुजरात तक फैली राख की एक लंबी पट्टी सैटेलाइट से साफ दिखाई दे रही है. विस्फोट भले ही थम चुका है, लेकिन हवा की ऊपरी परतों में मौजूद राख लगातार आगे बढ़ रही है.
हायली गुब्बी में विस्फोट क्यों हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार, हायली गुब्बी एक शील्ड ज्वालामुखी है और यह क्षेत्र अफार रिफ्ट जोन का हिस्सा है, जहाँ पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें धीरे-धीरे अलग हो रही हैं. इस प्रक्रिया से धरती की गहराई में मैग्मा के लिए रास्ते बनते हैं. काफी समय से दबाव झेल रहा मैग्मा धीरे-धीरे ऊपर आता गया और जब दबाव सीमा से आगे बढ़ गया, तो अचानक हिंसक विस्फोट हुआ. विशेषज्ञ मानते हैं कि रिफ्ट जोन में जारी गहरी टेक्टोनिक हलचल भविष्य में और बदलाव ला सकती है.
राख लाल सागर पार कर ओमान तक पहुंची
विस्फोट के बाद उठा राख का बादल लाल सागर पार करते हुए ओमान और यमन की दिशा में पहुँचा और फिर पूर्व की ओर मुड़ गया. इसके चलते मध्य पूर्व के कुछ इलाकों में हल्की ज्वालामुखी राख दर्ज की गई है. कई एयरलाइंस ने उड़ानों में सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए हैं, हालांकि भारत के लिए VAAC ने अब तक कोई औपचारिक चेतावनी जारी नहीं की है.
फिलहाल भारतीय मौसम एजेंसियाँ बादल की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और निकट भविष्य में इसका असर पश्चिमी और उत्तरी भारत के आसमान में देखने को मिल सकता है.
धर्मेंद्र की मौत पर बॉबी देओल का पुराना इंटरव्यू,.
Bobby Deol On Dharmendra Death: बॉलीवुड के महानायक धर्मेंद्र ने 24 नवंबर को 89 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. उनका 90वां जन्मदिन कुछ ही दिनों बाद आने वाला था, लेकिन उससे पहले यह खबर पूरी फिल्म इंडस्ट्री और करोड़ों प्रशंसकों को झकझोर गई. इस बीच धर्मेंद्र के छोटे बेटे बॉबी देओल का एक पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने उस दर्दनाक अनुभव को याद किया है जब उन्होंने अपने पिता को पर्दे पर मरते हुए देखा था.
ऑन-स्क्रीन पिता की मौत का दृश्य देखकर टूट पड़े थे बॉबी
2023 में पिंकविला के साथ बातचीत में बॉबी देओल ने बताया था कि रॉकी और रानी की प्रेम कहानी देखते वक्त उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि फिल्म में धर्मेंद्र का किरदार समाप्त हो जाता है. उन्होंने कहा, “मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि पापा का किरदार फिल्म में मरने वाला है. जैसे ही वह सीन आया, मेरे अंदर का बेटा टूट गया. अगर यह रोल कोई और करता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन पापा ने उस किरदार में जो जादू डाला था, उसने मुझे तोड़कर रख दिया. मैं रोता रह गया और थिएटर छोड़कर बाहर निकल आया.”
उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार भावनाओं से भरा हुआ है और सब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. बॉबी ने बताया, “मुझे पता था कि वह सिर्फ किरदार निभा रहे हैं, लेकिन फिर भी यह सीन मेरे लिए बेहद भारी था. इसी तरह जब एनिमल रिलीज हुई थी, तो मेरी मां भी मेरा डेथ सीन नहीं देख पाईं.”
धर्मेंद्र के किरदार ने दर्शकों पर छोड़ा गहरा असर
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी जुलाई 2023 में रिलीज हुई थी. धर्मेंद्र ने इसमें रणवीर सिंह के दादा ‘कंवल’ की भूमिका निभाई थी. फिल्म में आलिया भट्ट, जया बच्चन, शबाना आजमी जैसे दिग्गज कलाकार भी शामिल थे. धर्मेंद्र के भावुक और दमदार दृश्य फिल्म का प्रमुख आकर्षण बने थे.
धर्मेंद्र का निधन, फिल्म जगत में शोक
धर्मेंद्र को कुछ दिन पहले सांस लेने में परेशानी होने के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने स्थिति स्थिर बताकर उन्हें घर भेज दिया था. उम्मीद थी कि आराम से उनकी सेहत सुधर जाएगी, लेकिन सोमवार सुबह अचानक हालत बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके जाने से सिनेमा जगत, फैंस और पूरा देश सदमे और शोक में डूब गया है.
Dharmendra Political Journey: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने 2004 में भारतीय राजनीति में एक ज़ोरदार एंट्री की थी. बीकानेर लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी. उनके प्रचार के दौरान भीड़ उमड़ पड़ती थी और उनका फिल्मी करिश्मा चुनावी मैदान में भी खूब चमका. धर्मेंद्र ने कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर लाल डूडी को करीब 60 हजार वोटों से हराया था. हालांकि जोरदार शुरुआत के बावजूद राजनीति में उनका सफर लंबा नहीं चला. सांसद चुने जाने के बाद वे इस दुनिया से जल्द ही उचटने लगे. 2009 में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ और उसके बाद उन्होंने बीकानेर या किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त नहीं की.
अभिनेता को अभिनेता ही रहना चाहिए: धर्मेंद्र का स्पष्ट मत
2008 में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने अपने राजनीतिक अनुभव पर खुलकर बात की थी. उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति उनके लिए सही राह नहीं थी. उन्होंने कहा था— “मैं यह नहीं कहूंगा कि राजनीति में आना गलती थी, लेकिन एक अभिनेता को इस क्षेत्र में नहीं आना चाहिए. इससे दर्शकों में विभाजन पैदा होता है. अभिनेता को हमेशा अभिनेता ही रहना चाहिए. मेरे लिए अपने प्रशंसकों का प्यार ही सबसे बड़ी उपलब्धि है.” 2010 में लुधियाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुले मंच से राजनीति में आने पर पछतावा जताया था.
राजनीति में घुटन महसूस होती थी, सिर पटककर पछताया था
धर्मेंद्र ने पीटीआई से बातचीत में अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा था, “राजनीति में मुझे घुटन महसूस होती थी. मैं भावुक होकर इसमें आ गया था. जिस दिन मैंने हां कहा, उसी दिन वॉशरूम में जाकर शीशे में अपना सिर पटक दिया और खुद पर गुस्सा किया. राजनीति वह काम नहीं था, जिसे मैं कभी करना चाहता था.”
हेमा मालिनी को भी राजनीति में कदम रखने से रोका था
धर्मेंद्र का राजनीति से मोहभंग इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी को भी राजनीति में आने से मना किया था. पिछले वर्ष न्यूज18 को दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया था कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने की बात कही, तो धर्मेंद्र ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी. हेमा के अनुसार— “धरमजी ने कहा कि यह बहुत कठिन काम है. उन्होंने खुद कठिनाइयां झेली थीं. उनकी बात सुनकर मुझे लगा कि शायद मुझे इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए.”
धर्मेंद्र के इन बयानों से साफ झलकता है कि राजनीति ने उन्हें कभी वह सहजता नहीं दी, जो फिल्मों में मिली. और इसीलिए वे हमेशा मानते रहे— एक कलाकार के लिए उसका असली मंच सिनेमा ही है.
Bihar Panchayat Chunav: बिहार में विधानसभा चुनाव खत्म होते ही अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हलचल बढ़ गई है. पंचायती राज विभाग ने अगली प्रक्रिया की शुरुआती तैयारी शुरू कर दी है. संभावित उम्मीदवार भी अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो चुके हैं.
अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच हो सकता है मतदान
सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव का शेड्यूल अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच तय किया जा सकता है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद अब पंचायत स्तर पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ने लगी है. मुखिया, सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच जैसे पद गांव की सत्ता संरचना का केंद्र माने जाते हैं, इसलिए पंचायत चुनाव हमेशा से प्रभावशाली माने जाते हैं. इसी वजह से संभावित दावेदारों ने अपने–अपने इलाकों में जनसंपर्क तेज कर दिया है.
आरक्षण रोस्टर में बड़े बदलाव की संभावना
इस बार पंचायत चुनावों में आरक्षण रोस्टर बदलने की पूरी संभावना है. बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 और पंचायत निर्वाचन नियमावली में प्रावधान है कि हर 10 वर्ष में रोस्टर अद्यतन किया जाता है. 2026 के इस बदलाव से कई पंचायतों में पदों के आरक्षण वर्ग बदल सकते हैं. महिला, अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और सामान्य श्रेणी के आरक्षण में फेरबदल संभव है. यही कारण है कि संभावित उम्मीदवार अपने क्षेत्र में भविष्य के आरक्षण को लेकर तेजी से सक्रिय हो रहे हैं. हालांकि अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन प्रखंड स्तर पर राजनीतिक तैयारी साफ दिखाई देने लगी है.
दिसंबर–जनवरी से होगी मतदाता सूची का अद्यतन
चुनाव की प्रक्रिया दिसंबर–जनवरी से तेज होगी, जब मतदाता सूची के अद्यतन का काम शुरू किया जाएगा. इसके बाद वार्डवार मतदाताओं की संख्या का नया विभाजन किया जाएगा और मतदान केंद्रों का निर्धारण होगा. माना जा रहा है कि इस बार पंचायत चुनाव का मुकाबला बेहद कड़ा और रोचक रहने वाला है, क्योंकि कई स्थानों पर राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत पहले ही दिखाई देने लगे हैं.
Ram Mandir Flag Hoisting: अयोध्या में राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह के लिए मंगलवार 25 नवंबर, 2025 बेहद खास रहेगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर शिखर पर भगवा ध्वज फहराएंगे. यह ध्वज मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक माना जा रहा है. पूरे परिसर को सजाया गया है और सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत की गई है.
सप्त मंदिर से शुरू होगा प्रधानमंत्री का दौरा
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे पीएम मोदी अपने कार्यक्रम की शुरुआत सप्त मंदिर से करेंगे. यहां महर्षि वशिष्ठ, अगस्त्य, विश्वामित्र, वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर स्थित हैं. दर्शन के बाद उनका अगला पड़ाव शेषावतार मंदिर होगा.
#WATCH | Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath reached Ayodhya to review the preparedness of the flag-hoisting ceremony of Shri Ram Janmabhoomi Temple, which will be attended by Prime Minister Narendra Modi tomorrow. pic.twitter.com/Qfqq51hAlQ
करीब 11 बजे प्रधानमंत्री माता अन्नपूर्णा मंदिर में मत्था टेकेंगे और इसके पश्चात राम दरबार के गर्भगृह में जाकर पूजा-अर्चना करेंगे. इस पूरे आयोजन के लिए राम मंदिर परिसर और अयोध्या को विशेष रूप से सजाया गया है.
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार ध्वजारोहण के लिए तैयार किया गया ध्वज समकोण त्रिभुज आकार का है, जिसकी ऊंचाई 10 फुट और लंबाई 20 फुट होगी. ध्वज पर दीप्तिमान सूर्य की आकृति उकेरी गई है, जो भगवान राम के तेज व शौर्य का प्रतीक मानी जाती है. साथ ही ‘ॐ’ की आकृति और कोविदार वृक्ष की तस्वीर भी इसमें शामिल है.
पीएमओ ने बताया कि यह पवित्र ध्वज भारतीय सांस्कृतिक एकता और राम राज्य के आदर्शों का संदेश देगा. इसे पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में बने मंदिर शिखर पर स्थापित किया जाएगा. वहीं लगभग 800 मीटर का परकोटा दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है, जो मंदिर की वास्तु विविधता को दर्शाता है.
कार्यक्रम में जनता को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री
समारोह के दौरान पीएम मोदी उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे. राम मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों से प्रेरित 87 दृश्य पत्थरों की जटिल नक्काशी के रूप में उकेरे गए हैं. इसके अलावा घेरे की दीवारों पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती 79 कांस्य मूर्तियां भी लगाई गई हैं.
सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी निगरानी
ध्वजारोहण समारोह को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के अत्यंत कड़े इंतजाम किए गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को खुद तैयारियों की समीक्षा करने पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. सुरक्षा के लिए पुलिस अधीक्षक रैंक के 30 अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक स्तर के 90 अधिकारी, 242 उपनिरीक्षक, 1060 पुरुष निरीक्षक, 80 महिला अधिकारी, 3090 पुरुष हेड कांस्टेबल और 448 महिला हेड कांस्टेबल तैनात किए गए हैं. इसके अतिरिक्त यातायात विभाग के 800 से अधिक कर्मी भी लगाया जा रहे हैं. शहर में गश्त बढ़ा दी गई है और महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष इकाइयों समेत भारी पुलिस बल तैनात है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सके.
सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में डायलिसिस सेवा बढ़ेगी.
Bihar News : सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में किडनी रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की गई है. सोमवार को अस्पताल में पहली बार किडनी रोगी का डायलिसिस किया गया, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया. लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे इस मरीज के लिए यह उपचार जीवन रक्षक साबित हुआ है और अस्पताल की उपलब्धियों में यह एक मील का पत्थर माना जा रहा है.
क्षेत्र के मरीजों को बड़ी राहत, डायलिसिस की व्यवस्था सुदृढ़.
डायलिसिस की प्रक्रिया अस्पताल के उपाधीक्षक डा. अजय कुमार की पर्यवेक्षण में किडनी रोग विशेषज्ञ डा. हिमाद्री शंकर द्वारा की गई, जिसमें नेफ्रोलॉजी विभाग की नर्सों और तकनीकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. संदीप लाल ने बताया कि मधेपुरा के आलमनगर निवासी 45 वर्षीय सुनील मंडल का डायलिसिस किया गया है. उनका क्रिएटिनिन स्तर 10 और यूरिया 324 होने के कारण तुरंत डायलिसिस आवश्यक था.
प्राचार्य ने जानकारी दी कि अस्पताल में फिलहाल चार बेड पर डायलिसिस सेवा शुरू कर दी गई है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अब दूसरे शहरों में जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि सेवाएँ उपलब्ध होते ही मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है और अस्पताल आने वाले दिनों में क्षमता और बढ़ाने की तैयारी में है.
इस उपलब्धि ने मरीजों में उम्मीद और भरोसा दोनों बढ़ाया है.