India US Interim Trade Deal: भारत और अमेरिका ने अपने व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देते हुए एक अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट) के ढांचे पर सहमति बना ली है. इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिहाज से बड़ा और रणनीतिक कदम माना जा रहा है. शनिवार को जारी संयुक्त बयान में बताया गया कि यह सहमति लंबे समय से चल रही वार्ताओं का परिणाम है, जिसकी शुरुआत शीर्ष स्तर की बातचीत से हुई थी. समझौते का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को ज्यादा संतुलित बनाना और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना है, ताकि दोनों देशों को भरोसेमंद कारोबारी साझेदार मिल सकें.
अमेरिका भारत में बने उत्पादों पर कितना लगाएगा शुल्क?
संयुक्त बयान के मुताबिक अमेरिका भारत में बने कई उत्पादों पर 18 फीसदी तक का पारस्परिक शुल्क लगाएगा. जिन सेक्टरों पर इसका असर पड़ेगा, उनमें टेक्सटाइल, जूते-चप्पल, लेदर गुड्स, प्लास्टिक उत्पाद, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर आइटम, हस्तशिल्प और कुछ मशीनें शामिल हैं.
हालांकि, समझौते के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद कुछ प्रमुख भारतीय निर्यात वस्तुओं को राहत देने की बात भी कही गई है. अमेरिका जेनेरिक दवाओं, हीरे-जवाहरात और विमानन क्षेत्र से जुड़े पुर्जों पर लगाए गए शुल्क हटाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा. इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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भारत की ओर से बाजार खोलने की तैयारी
समझौते की शर्तों के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर आयात शुल्क या तो समाप्त करने या काफी कम करने पर सहमति दी है. इसके अलावा अमेरिका से आने वाले कई कृषि और खाद्य उत्पादों को भी रियायत दी जाएगी. इसमें ट्री नट्स (मेवे), ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं.
पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले लाल ज्वार और सूखे अनाज पर भी ड्यूटी में नरमी लाई जाएगी. यह कदम अमेरिकी कृषि निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक खुला बनाएगा.
500 बिलियन डॉलर की खरीद का टारगेट
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर के सामान की खरीद का लक्ष्य तय किया है. इस बड़े खरीद पैकेज में ऊर्जा उत्पाद, विमानन उपकरण, कीमती धातुएं और डेटा सेंटर से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण शामिल रहेंगे. माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल आकार तेजी से बढ़ सकता है और रणनीतिक क्षेत्रों में निर्भरता भी मजबूत होगी.
स्टील, एल्युमीनियम और दवा सेक्टर पर स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के कारण स्टील और एल्युमीनियम से जुड़े व्यापार पर विशेष प्रावधान रखे गए हैं. बयान में कहा गया है कि भारतीय विमानन पुर्जों पर लगाए गए कुछ शुल्क हटाए जा सकते हैं. ऑटो पार्ट्स के निर्यात के लिए भारत को विशेष कोटा देने की भी बात सामने आई है.
फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा आगे भी जारी रहेगी, ताकि दोनों पक्षों के हित संतुलित रह सकें.
गैर-टैरिफ बाधाएं और आसान कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार भारत उन नीतिगत रुकावटों को कम करेगा, जिनकी वजह से अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेज, आईसीटी उत्पाद और कृषि सामान के आयात में दिक्कत आती थी. अगले छह महीनों में दोनों देश मिलकर मानकों, सर्टिफिकेशन और टेस्टिंग प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाने पर काम करेंगे. इसका उद्देश्य व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना और लागत घटाना है.
समझौते के पीछे किस तरह की बताई जा रही है सोच?
इस समझौते के पीछे एक रणनीतिक सोच भी बताई जा रही है. दोनों देश ऐसी नीतियों का मुकाबला करना चाहते हैं, जो गैर-बाजार आधारित मानी जाती हैं. इसे चीन की व्यापारिक रणनीतियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
साथ ही डिजिटल व्यापार, डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी और हाई-एंड कंप्यूटिंग उपकरण जैसे जीपीयू के लेनदेन को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है. इससे टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग बढ़ने की संभावना है.
फिलहाल यह व्यवस्था अंतरिम रूप में लागू होगी, लेकिन इसे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इसे अंतिम रूप देने की कोशिश होगी. माना जा रहा है कि इस पहल से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी और गहरी होगी.
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