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विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव, 2026 में ₹2.2 लाख करोड़ से अधिक की निकासी

FPI Outflow: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुझान के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं. इसका सीधा असर घरेलू बाजार की स्थिरता और भारतीय रुपये की स्थिति पर देखने को मिल रहा है. 2026 में अब तक FPI की निकासी पिछले सभी आंकड़ों को पार कर चुकी है और यह ट्रेंड लगातार जारी है.

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FPI Outflow: भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. इसका सीधा असर बाजार के साथ-साथ रुपये पर भी देखने को मिल रहा है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी ₹2.2 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल के पूरे आंकड़े से भी ज्यादा है.

मई में भी जारी रही भारी बिकवाली

मई महीने के शुरुआती दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने करीब ₹27,048 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है. इससे पहले मार्च और अप्रैल में भी बड़े पैमाने पर आउटफ्लो देखने को मिला था. इस तरह साल 2026 में लगातार पूंजी बाजार से बाहर जा रही है.

2026 में FPI का मासिक फ्लो

  • जनवरी: ₹35,962 करोड़ की निकासी
  • फरवरी: ₹22,615 करोड़ का निवेश
  • मार्च: ₹1,17,000 करोड़ की भारी बिकवाली
  • अप्रैल: ₹60,847 करोड़ की निकासी
  • मई: ₹27,048 करोड़ की बिकवाली (अब तक)

विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि इस लगातार निकासी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:

  • दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थिति से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिससे निवेश जोखिम बढ़ गया है
  • अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती के कारण विकसित बाजार निवेशकों को ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक लग रहे हैं
  • ब्याज दरों को लेकर वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी बाहर जा रही है

रुपये पर भारी दबाव

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिख रहा है. रुपये में तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह साल की शुरुआत में करीब ₹90 प्रति डॉलर के स्तर से गिरकर ₹96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है, जो हाल के समय का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है.

बाजार के लिए आगे की चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते और ब्याज दरों को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली जारी रह सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

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Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश से जुड़े किसी भी तरह के खरीद-फरोख्त का सुझाव HelloCities24 द्वारा नहीं दिया जाता है. यहां प्रकाशित बाजार विश्लेषण विभिन्न मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज संस्थानों के आकलन पर आधारित होते हैं. निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें.

सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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