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Bihar News: चिट्ठी-पार्सल अब ढूंढना होगा आसान, बिहार के हर मकान को मिलेगा डिजिपिन

Bihar News: बिहार में अब हर घर को मिलेगा अपना अलग डिजिपिन (Digital Postal Index Number), जिससे चिट्ठी और पार्सल सही पते पर समय से पहुंचेंगे. डाक विभाग ने पूरे राज्य की गली-मोहल्लों की डिजिटल मैपिंग पूरी कर ली है, जिससे डाक सेवा और भी सटीक हो जाएगी.

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Bihar News: बिहार में अब हर घर को मिलेगा अपना अलग डिजिपिन (Digital Postal Index Number), जिससे चिट्ठी और पार्सल सही पते पर समय से पहुंचेंगे. डाक विभाग ने पूरे राज्य की गली-मोहल्लों की डिजिटल मैपिंग पूरी कर ली है, जिससे डाक सेवा और भी सटीक हो जाएगी.

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Bihar News: अब बिहार में किसी भी चिट्ठी या पार्सल का पता लगाना आसान हो जाएगा. डाक विभाग ने राज्य के सभी गली-मोहल्लों को डिजिटल लोकेशन से जोड़ने का काम पूरा कर लिया है. इसके तहत प्रत्येक घर को डिजिपिन (डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर) जारी किया जाएगा.

एक करोड़ से ज्यादा मोहल्लों का डिजिटल सर्वे

अधिकारियों के अनुसार, अब तक एक करोड़ से अधिक गली और मोहल्लों की डिजिटल मैपिंग की जा चुकी है. इस तकनीक से हर घर की सटीक लोकेशन दर्ज होगी, जिसे डाकिया मोबाइल से देख सीधे उस पते तक पहुंच सकेगा.

30 डिवीजनों में लागू होगी योजना

बिहार सर्किल के करीब 30 डिवीजन इस परियोजना में शामिल किए गए हैं. फिलहाल पिन कोड व्यवस्था लागू है, लेकिन डिजिपिन के बाद हर घर का अलग डिजिटल कोड होगा. इससे किसी भी इलाके या मोहल्ले में घर तक पहुंचना और आसान होगा.

अधूरे पते से खत्म होगी परेशानी

अब तक आधे-अधूरे पते के कारण बड़ी संख्या में डाक और पार्सल सही जगह नहीं पहुंच पाते थे. आंकड़ों के अनुसार, 45 फीसदी तक डाक गलत पते की वजह से अटक जाती थी और 30-35 फीसदी वापस लौट जाती थी. डिजिपिन लागू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी और हर डाक सही पते पर पहुंचेगी.

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डाक कर्मियों को मिलेगी डिजिटल ट्रेनिंग

राज्य में मौजूद 10 हजार से अधिक डाकियों को इस नई व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. इन्हें मोबाइल पर लाइव लोकेशन देखने और डिजिपिन की मदद से पते खोजने का तरीका सिखाया जाएगा. इससे पार्सल और चिट्ठियों की डिलीवरी तेज और सुचारू हो सकेगी.

क्या है डिजिपिन?

डिजिपिन 10 अंकों का यूनिक कोड है, जो डिजिटल एड्रेस सिस्टम पर आधारित है. इसमें हर गली, मोहल्ले और घर को 4 मीटर के दायरे में चिह्नित किया जाता है. इस तकनीक को आईआईटी हैदराबाद और इसरो के एनआरएससी की मदद से डाक विभाग ने विकसित किया है. इसके जरिए अब किसी भी जगह का सटीक डिजिटल पता आसानी से पता लगाया जा सकेगा.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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