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East Central Railway:रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे ने देशव्यापी स्तर पर विशेष जांच अभियान शुरू किया है. हाल ही में एक ट्रेन के स्लीपर कोच में तकनीकी खामी सामने आने के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को कोचों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं. अभियान के तहत विशेष रूप से पुराने आईसीएफ कोचों की स्थिति का आकलन किया जाएगा और उनकी संरचनात्मक मजबूती की जांच की जाएगी.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह अभियान अगले कुछ दिनों तक लगातार चलाया जाएगा. इस दौरान कोचों के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां समय के साथ जंग, घिसाव या अन्य प्रकार की तकनीकी समस्याएं विकसित होने की संभावना रहती है.
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कमजोर कोचों को सेवा से हटाने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान जिन कोचों में गंभीर क्षरण, जंग या संरचनात्मक कमजोरी मिलेगी, उन्हें परिचालन से अलग कर दिया जाएगा. रेलवे का उद्देश्य किसी भी संभावित जोखिम को पहले ही पहचानकर उसे दूर करना है.
इसके लिए मुख्यालय, मंडल और वर्कशॉप स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को भी निरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया है. अधिकारी स्वयं कोचों की स्थिति की समीक्षा करेंगे और आवश्यक निर्णय लेंगे.
आधुनिक उपकरणों से होगी तकनीकी जांच
रेलवे ने जांच प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है. कोचों के अंदरूनी हिस्सों और छिपे हुए क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने के लिए उन्नत उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है.
तकनीकी विशेषज्ञ विशेष कैमरों और माप उपकरणों की सहायता से कोचों की मोटाई, मजबूती और क्षरण की स्थिति की जांच करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की कमजोरी का समय रहते पता लगाया जा सके.
रेलवे वर्कशॉप की भी होगी समीक्षा
सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने कोचों की मरम्मत और ओवरहॉलिंग करने वाली वर्कशॉपों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने का निर्णय लिया है. आने वाले दिनों में इन वर्कशॉपों का विशेष ऑडिट कराया जाएगा.
इसके साथ ही रखरखाव से जुड़े दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं को भी और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्याओं की संभावना कम हो सके.
सुरक्षा को लेकर रेलवे का फोकस
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य से पूरे नेटवर्क में कोचों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. विशेष जांच अभियान के जरिए ऐसे कोचों की समय रहते पहचान की जाएगी, जिन्हें मरम्मत या प्रतिस्थापन की आवश्यकता है, जिससे रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके.
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