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Bihar Mountaineer Mitali Prasad : बिहार के नालंदा की रहने वाली पर्वतारोही मिताली प्रसाद ने एक बार फिर बिहार का नाम रोशन किया है. पटना विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा मिताली ने हाल ही में उत्तराखंड स्थित 12,500 फीट ऊंचे केदारकांठा शिखर पर सफल चढ़ाई पूरी कर अपनी उपलब्धियों की सूची में एक और मुकाम जोड़ लिया है. मई महीने में संपन्न इस अभियान के बाद उन्होंने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि ऊंची चोटी पर पहुंचकर बिहार का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व का विषय रहा.
मिताली ने बताया कि पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, धैर्य और संकल्प का भी प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है.
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना चुकी हैं पहचान
मिताली प्रसाद का नाम देश की उभरती पर्वतारोहियों में गिना जाता है. उन्होंने वर्ष 2020 में दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल 6,962 मीटर ऊंचे माउंट एकांकागुआ पर अकेले चढ़ाई कर विशेष पहचान बनाई थी. इस उपलब्धि के साथ वह ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही बनी थीं.
इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2022 में 7,077 मीटर ऊंचे माउंट कुन और एवरेस्ट बेस कैंप अभियान को भी सफलतापूर्वक पूरा किया. अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो और दक्षिण अमेरिका के माउंट बोनेटे पर भी वह तिरंगा फहरा चुकी हैं.
खेल और एनसीसी में भी दिखाया दम
पर्वतारोहण से पहले मिताली खेल जगत में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं. राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर चुकी मिताली कराटे में ब्लैक बेल्ट (सेकंड डैन) धारक हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
इसके अलावा उन्होंने एनसीसी एयर स्क्वाड्रन में ‘ए’ ग्रेड कैडेट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया है. आगरा में आयोजित पैरा बेसिक कोर्स भी उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया है.
अब प्रशासनिक सेवा और एवरेस्ट पर नजर
नालंदा जिले के मायापुर गांव से आने वाली मिताली किसान परिवार से संबंध रखती हैं. वर्तमान में वह बिहार के स्कूली बच्चों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही हैं. साथ ही बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी में भी जुटी हुई हैं और दो बार मुख्य परीक्षा तक पहुंच चुकी हैं.
मिताली का लक्ष्य भविष्य में अधिक से अधिक बच्चों, विशेषकर बेटियों को एडवेंचर स्पोर्ट्स और पर्वतारोहण से जोड़ना है. उनका अगला बड़ा सपना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है. हालांकि इसके लिए आवश्यक आर्थिक संसाधनों की व्यवस्था अभी भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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