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Purnia News: नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और मातृ पोषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्णिया जिले में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है. समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस अभियान के दौरान जिले के सभी प्रखंडों और स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा. सप्ताह भर जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और विशेष गतिविधियां आयोजित होंगी.
जन्म के पहले घंटे का स्तनपान सबसे अहम
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाना बेहद जरूरी है. इससे नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शिशु मृत्यु दर में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है.
उन्होंने बताया कि यदि शिशु को जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाए, तो डायरिया और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है.
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मां और बच्चे, दोनों को मिलता है लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और उनका आईक्यू स्तर भी अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है. वहीं, नियमित स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर और ओवेरियन कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है.
सभी स्वास्थ्य केंद्र बने ‘बोतल और डिब्बा बंद दूध मुक्त’
जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि अभियान के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को डिब्बा बंद दूध, बोतल और निपल मुक्त परिसर घोषित किया गया है. स्वास्थ्य कर्मियों को इसके दुष्प्रभावों की जानकारी दी जा रही है ताकि नवजातों को केवल स्तनपान के लिए प्रेरित किया जा सके.
हेल्दी बेबी शो और जागरूकता कार्यक्रम होंगे आयोजित
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान सभी प्रखंडों में कार्यशालाओं के साथ ‘हेल्दी बेबी शो’ का आयोजन किया जाएगा. इस प्रतियोगिता में स्वस्थ बच्चों और जागरूक माताओं को सम्मानित किया जाएगा. साथ ही प्रसव केंद्रों के पोस्ट नेटल वार्ड की प्रभारी सिस्टर को इस अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है.
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर देंगी सलाह
के.नगर प्रखंड के बीएचएम विभव कुमार ने बताया कि ‘मां (MAA)’ कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सेविकाएं वीएचएसएनडी सत्रों तथा घर-घर संपर्क अभियान के माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों की माताओं को स्तनपान और शिशु पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी देंगी.
पिताओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण
सिविल सर्जन ने कहा कि सिर्फ माताओं को ही नहीं, बल्कि पिताओं और परिवार के अन्य सदस्यों को भी स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना जरूरी है. प्रसव पूर्व जांच (ANC) से लेकर शिशु के जन्म तक माताओं को इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग (IYCF) से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि हर नवजात को जीवन की बेहतर शुरुआत मिल सके.
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