Nepal Flood: तिब्बती पठार पर तेजी से सिकुड़ रहे हिमनद भविष्य में अचानक बाढ़ और हिमनद से जुड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ा सकते हैं. चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के डिप्टी डायरेक्टर गाओ रोंग ने कहा है कि पिछले 60 वर्षों में तिब्बती पठार का हिमनद क्षेत्र करीब 24 प्रतिशत सिकुड़ चुका है और लगभग 7,000 छोटे हिमनद पूरी तरह खत्म हो गए हैं.
कमजोर हो रहे हिमनद, बढ़ सकता है आपदाओं का दायरा
हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के अनुसार, गाओ रोंग ने बताया कि आने वाले समय में तिब्बती पठार के हिमनद और अस्थिर हो सकते हैं. इसका असर तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ सकता है.
उनके मुताबिक, हिमनद से जुड़ी अचानक बाढ़ और अन्य आपदाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है. ऐसी घटनाओं का असर एक साथ कई इलाकों में पड़ सकता है, जिससे तबाही का दायरा भी पहले से बड़ा हो सकता है.
नेपाल में एक ही घर से मिले 23 शव; 962 मौतों के बीच 4 हजार लोग अब भी लापता
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी. इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई. इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई.
नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 1,252 पहुंचा
चीनी अधिकारियों की ओर से बुधवार (2 सितंबर) को जारी आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल सीमा से लगे तिब्बत के ग्यारोंग पोर्ट पर पिछले हफ्ते आई अचानक बाढ़ में 21 लोगों की मौत हुई, जबकि 541 लोग लापता हैं.
सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने तिब्बत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों में लापता लोगों में 261 विदेशी शामिल थे. इनमें भारत और 22 अन्य देशों के 49 लोग शामिल हैं.
नेपाल में प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या गुरुवार (3 अगस्त) को बढ़कर 1,252 हो गई.
सात मिनट में 22 किलोमीटर तक पहुंचा मलबा
‘चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतन प्लेटू रिसर्च’ की हालिया रिपोर्ट में आपदा के एक और खतरनाक पहलू का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, हिमनद के टूटने से बना मलबा घाटी में करीब 22 किलोमीटर तक बहा और सिर्फ सात मिनट में तिब्बत सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंच गया.
बुधवार (2 सितंबर) को ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में निगरानी और पूर्वानुमान प्रणाली को अपडेट करने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया है.
इसे भी पढ़ें-



