JPSC CID Probe: 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अब उस मोड़ पर पहुंच गई है, जहां आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को फिलहाल जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला है. सीआईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. जांच एजेंसी ने अदालत में उनकी भूमिका को लेकर गंभीर आरोप रखे हैं.
मामले में सबसे अहम बात यह है कि सीआईडी की जांच का दायरा केवल परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं है. एजेंसी परीक्षा कराने के लिए निजी कंपनी के चयन, उससे जुड़े फैसलों और कथित आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाल रही है.
निजी कंपनी के चयन पर उठे सवाल
सीआईडी के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी ट्रिपल डी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को JPSC की परीक्षाएं आयोजित करने का काम दिलाने में एल खियांग्ते की कथित अहम भूमिका थी.
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जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कंपनी को काम दिलाने की प्रक्रिया के पीछे आर्थिक लाभ का मामला भी जुड़ा था. सीआईडी के मुताबिक, इस संबंध में भारी कमीशन लिए जाने का आरोप जांच में सामने आया है.
यानी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अब इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी तक कैसे पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी.
सीआईडी के आरोपों पर बचाव पक्ष की अलग दलील
अदालत में बचाव पक्ष ने इन आरोपों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव वाला बताया. एल खियांग्ते के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है.
बचाव पक्ष ने सीआईडी की छापेमारी का भी हवाला दिया. दलील दी गई कि छापेमारी के दौरान ऐसा कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या सामग्री नहीं मिली, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके. इसी आधार पर जमानत देने की मांग की गई.
साक्ष्य से छेड़छाड़ के आरोप ने बढ़ाई गंभीरता
सीआईडी ने जमानत का विरोध करते हुए सिर्फ परीक्षा संचालन से जुड़े आरोपों पर ही जोर नहीं दिया. जांच एजेंसी ने पूछताछ के दौरान साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश से जुड़े तथ्य सामने आने का भी दावा किया.
इसी आधार पर एजेंसी ने एल खियांग्ते की भूमिका को गंभीर बताते हुए अदालत से जमानत नहीं देने का आग्रह किया. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रखा था और अब जमानत याचिका खारिज कर दी.
जांच में आगे क्या अहम होगा
एल खियांग्ते को जमानत नहीं मिलने के बाद अब सीआईडी की आगे की जांच महत्वपूर्ण हो गई है. एजेंसी पूर्व अधिकारियों के साथ निजी कंपनी के प्रतिनिधियों और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा संचालन से जुड़े फैसलों में किस स्तर पर अनियमितता हुई और कथित आर्थिक लेनदेन की कड़ियां कहां तक जाती हैं.
जेल में रहेंगे पूर्व अध्यक्ष
अदालत के फैसले के बाद एल खियांग्ते फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे. उनकी जमानत याचिका खारिज होने से 14वीं JPSC परीक्षा मामले में जांच के बीच उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली है.
अब इस मामले में सीआईडी की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले साक्ष्य पर नजर रहेगी. परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े से जुड़े इस मामले में पूर्व अधिकारियों और निजी एजेंसी की भूमिका की जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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