Advance Tax Deadline: सिर्फ नौकरी से मिलने वाली सैलरी पर निर्भर रहने वालों को अक्सर लगता है कि उनकी टैक्स देनदारी का हिसाब कंपनी का TDS ही संभाल लेगा. लेकिन साल के बीच में अगर ब्याज, किराया, शेयर या प्रॉपर्टी से कमाई, फ्रीलांसिंग या किसी दूसरे स्रोत से आय हुई है, तो टैक्स का पूरा हिसाब बदल सकता है. ऐसी स्थिति में एडवांस टैक्स की देनदारी भी बन सकती है.
टैक्स ईयर 2026-27 में जिन लोगों की अनुमानित टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा है, उन्हें एडवांस टैक्स के नियमों पर ध्यान देना होगा. 15 सितंबर तक इसकी दूसरी किस्त का भुगतान करना है.
सैलरी वालों को भी क्यों देना पड़ सकता है एडवांस टैक्स?
एडवांस टैक्स सिर्फ कारोबार या कंपनी चलाने वालों तक सीमित नहीं है. अगर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी से पर्याप्त TDS कट रहा है, लेकिन उसके पास कोई अतिरिक्त आय भी है और उस पर टैक्स बाकी रह जाता है, तो एडवांस टैक्स की जरूरत पड़ सकती है.
मान लीजिए किसी व्यक्ति की सैलरी से नियमित TDS कट रहा है, लेकिन इसी साल उसे शेयर बेचने से कैपिटल गेन हुआ, किराये से आय हुई या बैंक डिपॉजिट से ब्याज मिला. इन अतिरिक्त आमदनी के कारण साल की कुल टैक्स देनदारी बढ़ सकती है.
Advance Tax Deadline: शेयर या प्रॉपर्टी बेचने के बाद जरूर देखें टैक्स का हिसाब
साल की शुरुआत में किसी व्यक्ति ने अपनी आय का जो अनुमान लगाया था, जरूरी नहीं कि पूरे साल वही स्थिति बनी रहे. जून के बाद शेयर या प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन हुआ है तो एडवांस टैक्स का अनुमान दोबारा लगाना पड़ सकता है.
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यानी पहली किस्त भरने के बाद भी टैक्स का हिसाब खत्म नहीं होता. आय में बदलाव होने पर आगे की किस्तों में रकम को उसी हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है.
फ्रीलांसर और साइड इनकम वालों को भी रहना होगा सतर्क
फुल टाइम नौकरी के साथ फ्रीलांस काम करने वाले लोगों की भी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है. इसी तरह कंसल्टिंग, किराये, ब्याज या अन्य स्रोतों से मिलने वाली आय को भी सालाना टैक्स अनुमान में शामिल करना जरूरी है.
ऐसे मामलों में केवल सैलरी पर कटने वाले TDS को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि पूरा टैक्स चुका दिया गया है.
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एडवांस टैक्स के दायरे में कौन-कौन आएगा?
एडवांस टैक्स का नियम सिर्फ कारोबार करने वालों तक सीमित नहीं है. नौकरीपेशा व्यक्ति, फ्रीलांसर और दूसरे स्रोतों से कमाई करने वाले लोग भी इसके दायरे में आ सकते हैं. हालांकि, कुछ वरिष्ठ नागरिकों को इससे छूट दी गई है.
| करदाता की स्थिति | कब एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है? |
|---|---|
| ₹10,000 या अधिक टैक्स बाकी | TDS/TCS घटाने के बाद पूरे साल की अनुमानित टैक्स देनदारी ₹10,000 या उससे ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स लागू हो सकता है. |
| नौकरीपेशा व्यक्ति | सैलरी के अलावा ब्याज, किराये या शेयर बेचने से कैपिटल गेन जैसी आय हुई है और उस पर पर्याप्त TDS नहीं कटा है. |
| बिजनेसमैन और फ्रीलांसर | व्यापार, प्रोफेशन या फ्रीलांसिंग से कमाई करने वालों को अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी के आधार पर एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है. |
| वरिष्ठ नागरिक | भारत में रहने वाले ऐसे वरिष्ठ नागरिक जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई आय नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स से छूट है. |
15 सितंबर तक कितना एडवांस टैक्स होना चाहिए?
एडवांस टैक्स चार चरणों में जमा किया जाता है:
- 15 जून: कुल अनुमानित टैक्स का कम से कम 15%
- 15 सितंबर: कुल अनुमानित टैक्स का कम से कम 45%
- 15 दिसंबर: कुल अनुमानित टैक्स का कम से कम 75%
- 15 मार्च: कुल अनुमानित टैक्स का 100%
यह प्रतिशत क्युमुलेटिव है. इसलिए सितंबर तक 45% का मतलब यह नहीं है कि जून में जमा 15% के ऊपर फिर से 45% भुगतान करना है. जून की रकम को शामिल करने के बाद कुल भुगतान 45% तक पहुंचाना होता है.
पहले TDS और TCS घटाएं, फिर देखें कितना टैक्स बाकी है
एडवांस टैक्स का आकलन करते समय पूरे साल की अनुमानित टैक्स देनदारी निकालने के बाद उपलब्ध TDS और TCS को ध्यान में रखना चाहिए.
अगर TDS/TCS और पहले जमा एडवांस टैक्स को घटाने के बाद भी टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा रहती है, तो एडवांस टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं.
कम भुगतान किया तो ब्याज का बोझ बढ़ सकता है
तय समय तक जरूरी एडवांस टैक्स जमा नहीं करने या किस्त में कमी रहने पर ब्याज की देनदारी बन सकती है. इसलिए सिर्फ यह सोचकर भुगतान टालना ठीक नहीं है कि अंतिम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय पूरा हिसाब कर लेंगे.
खासकर उन लोगों को अभी अपनी आय की समीक्षा कर लेनी चाहिए जिनकी कमाई साल के बीच में बढ़ी है या जिनको कोई बड़ा कैपिटल गेन हुआ है.
15 सितंबर से पहले इनकम का यह हिसाब जरूर मिलाएं
- साल की अनुमानित कमाई: सैलरी के अलावा ब्याज, किराया, फ्रीलांसिंग, कैपिटल गेन और दूसरी आय जोड़ें.
- अब तक कट चुका TDS/TCS: अलग-अलग स्रोतों से कटे टैक्स का हिसाब देखें.
- पहले जमा एडवांस टैक्स: जून में कितना भुगतान किया था, उसे कुल देनदारी में शामिल करें.
- बाकी रकम: इन सभी को मिलाने के बाद देखें कि 15 सितंबर तक 45% के क्युमुलेटिव लक्ष्य को पूरा करने के लिए कितना भुगतान करना बाकी है.
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