Purnia University PhD Rules: पूर्णिया विश्वविद्यालय ने पीएचडी शोधार्थियों के शोध कार्य की निगरानी को लेकर नई व्यवस्था लागू की है. अब प्रत्येक पंजीकृत शोधार्थी के शोध कार्य की हर सेमेस्टर समीक्षा होगी और उसे व्यक्तिगत रूप से अपने शोध की प्रगति का प्रस्तुतीकरण देना होगा. शोधार्थी को लिखित प्रगति प्रतिवेदन भी जमा करना होगा. यदि प्रगति संतोषजनक नहीं पायी जाती है तो रिसर्च एडवाइजरी कमिटी (RAC) कारण दर्ज कर सुधारात्मक उपाय तय करेगी.
निर्धारित सुधारात्मक उपायों का पालन नहीं करने पर शोधार्थी का पीएचडी पंजीकरण निरस्त करने की औपचारिक अनुशंसा भी की जा सकेगी.
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Purnia University PhD Rules: हर शोधार्थी के लिए बनेगी रिसर्च एडवाइजरी कमिटी
विश्वविद्यालय ने प्रत्येक पंजीकृत पीएचडी शोधार्थी के लिए संबंधित डिपार्टमेंटल रिसर्च कमिटी (DRC) के माध्यम से स्वतंत्र रिसर्च एडवाइजरी कमिटी गठित करना अनिवार्य किया है. यह व्यवस्था बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम, 2026 के क्लॉज 12.1 एवं 12.1.1 के प्रावधानों के अनुपालन में लागू की गयी है.
समिति के संयोजक संबंधित शोधार्थी के नामित शोध पर्यवेक्षक होंगे. उसी विभाग के एक वरिष्ठ शिक्षक को आंतरिक विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया जाएगा. वहीं बाह्य या सह-विषय विशेषज्ञ के तौर पर विश्वविद्यालय के किसी संबद्ध विभाग के शिक्षक अथवा बाहरी विशेषज्ञ को शामिल किया जा सकेगा.
आंतरिक और बाह्य अथवा सह-विषय विशेषज्ञों का नामांकन संबंधित विभागाध्यक्ष की स्वीकृति से किया जाएगा. समिति शोध विषय के व्यापक क्षेत्र में आवश्यक अकादमिक और विशिष्ट विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी.
शोध प्रस्ताव से थीसिस तक RAC की निगरानी
आरएसी केवल शोध की अंतिम अवस्था में ही सक्रिय नहीं होगी, बल्कि शोध प्रस्ताव से लेकर शोध प्रबंध जमा करने तक शोधार्थी के काम की निगरानी करेगी. समिति शोध प्रस्ताव की समीक्षा कर शोध के सटीक विषय को अंतिम रूप देने में भूमिका निभाएगी.
इसके साथ ही शोधार्थी को शोध पद्धति, अध्ययन की रूपरेखा और संबंधित विषय-क्षेत्रों की पहचान को लेकर अकादमिक मार्गदर्शन दिया जाएगा. इसका उद्देश्य शोध कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना और उसकी गुणवत्ता की नियमित समीक्षा करना है.
हर सेमेस्टर देना होगा शोध कार्य का हिसाब
नई व्यवस्था में प्रत्येक सेमेस्टर शोधार्थी की अनिवार्य प्रगति समीक्षा होगी. इसके लिए शोधार्थी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने शोध कार्य की प्रगति का प्रस्तुतीकरण देना होगा.
इसके साथ ही संक्षिप्त लिखित प्रगति प्रतिवेदन भी जमा करना होगा. आरएसी शोध कार्य की प्रगति का औपचारिक मूल्यांकन करेगी और आवश्यक अनुशंसाएं संबंधित विभाग को उपलब्ध कराएगी. प्रगति प्रतिवेदन की प्रति शोधार्थी को भी दी जाएगी.
संतोषजनक प्रगति नहीं तो सुधारात्मक उपाय
यदि आरएसी को शोधार्थी की प्रगति संतोषजनक नहीं लगती है तो उसके कारणों को अभिलिखित किया जाएगा. इसके बाद शोध कार्य में सुधार के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय तय किए जाएंगे.
यदि शोधार्थी इन निर्धारित उपायों का अनुपालन नहीं करता है तो आरएसी उसके पीएचडी पंजीकरण को निरस्त करने की औपचारिक अनुशंसा कर सकेगी. इस प्रावधान के जरिए शोध कार्य में नियमितता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गयी है.
थीसिस से पहले प्री-सबमिशन सेमिनार जरूरी
शोध प्रबंध जमा करने से पहले शोधार्थी को प्री-सबमिशन सेमिनार में प्रस्तुतीकरण देना होगा. आरएसी इस दौरान पूर्ण शोध प्रबंध के प्रारूप की समीक्षा करेगी और शोधार्थी के प्रस्तुतीकरण का अवलोकन करेगी.
विश्वविद्यालय के अनुसार अंतिम शोध प्रबंध जमा करने की स्वीकृति से पहले यह प्रस्तुतीकरण शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए खुला रहेगा. इससे शोध कार्य की अकादमिक समीक्षा और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था मजबूत होगी.
4 जुलाई से प्रभावी है नई व्यवस्था
विवि मीडिया पदाधिकारी प्रो. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था 04 जुलाई 2026 से प्रभावी बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम, 2026 के अनुरूप है. विश्वविद्यालय की 27वीं अकादमिक परिषद की 14 जुलाई 2026 को हुई बैठक में इन प्रावधानों को औपचारिक रूप से अंगीकृत किया गया था.
विश्वविद्यालय ने आरएसी से जुड़े प्रशासनिक और अकादमिक कार्यों में एकरूपता के लिए मानक प्रपत्र भी निर्धारित किए हैं. इनमें आरएसी गठन संबंधी कार्यालय आदेश और सेमेस्टरवार शोध प्रगति मूल्यांकन के लिए गोपनीय प्रगति प्रतिवेदन प्रपत्र शामिल हैं.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों, महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों और संबंधित अधिकारियों को अधिसूचना में निर्धारित प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
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