Jitiya Vrat 2026 : जितिया व्रत के बाद बच्चों को लाल या विशेष जितिया धागा पहनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है. कहीं यह धागा बच्चों के गले में पहनाया जाता है तो कहीं हाथ या कलाई पर बांधा जाता है. लेकिन इस धागे को पहनाने की वजह क्या है, इसे कितने समय तक पहनकर रखना चाहिए और क्या इसे पहनाना जरूरी धार्मिक नियम है? इन सवालों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग परंपराएं हैं. लोकमान्यता में जितिया धागे को संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना का प्रतीक माना जाता है.
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Jitiya Vrat 2026 : जितिया धागा पहनाने के पीछे क्या है मान्यता?
एस्ट्रोलॉजर नितेश निरंजन के अनुसार, जितिया पूजा के बाद कई क्षेत्रों में बच्चों को लाल या विशेष जितिया धागा पहनाने की परंपरा है. इसे कहीं गले में और कहीं हाथ या कलाई पर बांधा जाता है.
लोकमान्यता के अनुसार यह धागा संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना का प्रतीक है. गले में धागा पहनाने की परंपरा को मां और संतान के बीच भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़ा जाता है.
हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में धागा पहनाने की परंपरा अलग है. इसलिए इसे पूरे हिंदू समाज के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए.
धागा कितने समय तक पहनकर रखें?
जितिया धागे को कितने समय तक पहनना है, इसका कोई एक सार्वभौमिक शास्त्रीय नियम नहीं मिलता. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसे लेकर अलग परंपराएं हैं.
कहीं धागा 24 घंटे रखने की परंपरा हो सकती है, तो कहीं इसे कुछ दिनों या उससे अधिक समय तक पहनाया जाता है. धागा उतारने के बाद उसे सम्मानपूर्वक रखने या विसर्जित करने की परंपरा भी क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है.
इसलिए धागे को कितने समय तक रखना है, यह स्थानीय रीति और परिवार की परंपरा के अनुसार तय किया जाता है.
क्या जितिया धागा पहनाना जरूरी है?
जितिया व्रत में धागा पहनाना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए. इसका महत्व मुख्य रूप से लोकपरंपरा और धार्मिक भावना से जुड़ा है.
जितिया व्रत का मूल भाव संतान के कल्याण की प्रार्थना है. पूजा, व्रत, कथा और संकल्प के साथ धागे को भी इसी मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है.
ज्योतिष में धागे को लेकर क्या मान्यता है?
ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष धागे को पहनने से संतान की आयु निश्चित रूप से बढ़ती है, ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. धार्मिक परंपरा में इसे संकल्प और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
मां जितिया पूजा के दौरान संतान की कुशलता की कामना करती है और धागा उसी संकल्प की याद दिलाने वाला प्रतीक माना जाता है.
जितिया व्रत कब रखा जाएगा?
इस साल यानी 2026 में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार यह आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है.
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जितिया की परंपरा तीन दिनों तक चलती है. इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है. इसके बाद मुख्य दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं.
व्रत से जुड़ी कथा में राजा जीमूतवाहन, गरुड़ और नाग शंखचूड़ का प्रसंग मिलता है. धार्मिक मान्यता में जितिया व्रत मातृत्व प्रेम, त्याग और संतान की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है.
पूजा में तेल और खली चढ़ाने की भी परंपरा
कुछ स्थानों पर जितिया पूजा में सरसों का तेल और खली चढ़ाने की परंपरा है. लोकमान्यता के अनुसार बाद में इसे बच्चों के सिर पर लगाने की परंपरा भी मिलती है.
इस तरह जितिया धागा, पूजा की सामग्री और अन्य लोकपरंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में संतान की कुशलता और मंगलकामना से जुड़ी हुई हैं.
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