Petrol Diesel Price Cut : केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत देने के लिए अब तक तीन मौकों पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है. पहली कटौती नवंबर 2021 में हुई थी. इसके बाद मई 2022 में फिर उत्पाद शुल्क घटाया गया.
सबसे हालिया कटौती 10 मार्च 2026 को की गई, जब पेट्रोल और डीजल दोनों पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की राहत दी गई. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इन फैसलों का असर सरकार के राजस्व पर भी पड़ा.
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कच्चा तेल सस्ता हुआ तो उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीद बनी है. क्रूड ऑयल की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखने के लिए ईंधन की लगातार उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है. इसी वजह से सरकार ने पहले भी टैक्स में कटौती जैसे कदम उठाए हैं.
प्राइवेट पंपों की बिक्री पर सरकार की नजर
प्राइवेट कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित किए जाने को लेकर भी सवाल उठे. इस पर पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इस मामले में सरकार सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है.
पेट्रोलियम सचिव ने स्पष्ट किया कि किसी भी निजी कंपनी को ईंधन की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है. सरकार इस संबंध में पहले ही दिशानिर्देश जारी कर चुकी है.
अब कचरे से ईंधन तैयार करने पर जोर
सरकार की ऊर्जा रणनीति में कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी CBG को भी महत्वपूर्ण जगह दी जा रही है. गोवर्धन योजना के जरिए देश में CBG उत्पादन को मौजूदा स्तर से 10 गुना बढ़ाने की तैयारी है.
फिलहाल देश में 217 CBG प्लांट चालू हैं, जबकि 357 प्लांट निर्माण के स्तर पर हैं. सरकार ने CBG के लिए गारंटीड ऑफटेक की व्यवस्था भी की है, यानी उत्पादित गैस की निश्चित खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है.
पुराने कचरे के पहाड़ हटाने पर भी फोकस
CBG उत्पादन बढ़ाने के साथ शहरों में जमा पुराने कचरे के ढेरों के निपटारे पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकार पुराने कचरे को हटाने और वैज्ञानिक तरीके से वेस्ट प्रोसेसिंग की व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है.
सरकार की योजना में एलपीजी और बायोमास दोनों को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करने पर जोर है. एलपीजी सब्सिडी का उद्देश्य गरीब परिवारों पर ईंधन का आर्थिक बोझ कम करना है, जबकि बायोमास का अधिकतम उपयोग अब ऊर्जा और कचरा प्रबंधन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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