MP OBC Reservation : मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट के फैसले से भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अदालत ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले 2019 के संशोधन कानून को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है. इसके साथ ही राज्य में ओबीसी आरक्षण फिर 14 प्रतिशत रह जाएगा. कोर्ट ने लंबे समय से लंबित 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है.
इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति के इंतजार में हैं. वहीं, ओबीसी पक्ष ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.
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27% आरक्षण का कानून रद्द, 14% कोटा फिर लागू
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने 159 पन्नों के फैसले में कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार करने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति सामने नहीं आई. अदालत के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में इस सीमा से अधिक आरक्षण देना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है.
ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत करने के बाद मध्य प्रदेश में कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो गया था. इसके बाद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण जोड़ने से कुल आंकड़ा 73 प्रतिशत तक पहुंच गया था.
मध्य प्रदेश में कैसे 73% तक पहुंच गया था आरक्षण का आंकड़ा?
| वर्ग / श्रेणी | आरक्षण प्रतिशत |
| अनुसूचित जाति (SC) | 16% |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 20% |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC – प्रस्तावित) | 27% |
| आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) | 10% |
| सभी श्रेणियां मिलाकर कुल आरक्षण | 73% |
तीन महीने में पूरी करनी होगी नियुक्ति प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने का आदेश दिया है. इन पदों को लेकर लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता बनी हुई थी.
इस निर्देश का असर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) और अन्य भर्ती एजेंसियों की लंबित नियुक्तियों पर पड़ सकता है. नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को अब निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है.
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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
हाई कोर्ट के फैसले के बाद ओबीसी पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है. ऐसे में मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी नजर रहेगी. फिलहाल हाई कोर्ट ने होल्ड पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की है.
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