Maha Ashtami 2026: शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा का खोइछा भरने की परंपरा का विशेष महत्व है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में सुहागिन महिलाएं इस रस्म को श्रद्धा के साथ निभाती हैं. मान्यता है कि मां का खोइछा भरने से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है. संतान की कामना से भी महिलाएं यह रस्म पूरी करती हैं. इस वर्ष महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर 2026, रविवार को रखा जाएगा. ऐसे में जानिए खोइछा भरने का समय, जरूरी सामग्री, मंत्र और इससे जुड़े नियम.
Maha Ashtami 2026 : 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने महावीर पंचांग का संदर्भ देते हुए बताया कि महाअष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगी.
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महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन पूरे दिन अष्टमी तिथि रहने के कारण उदया तिथि के आधार पर व्रत रखने की परंपरा है.
महाअष्टमी पर कब भरें मां दुर्गा का खोइछा?
महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा का खोइछा भरने के लिए 18 अक्टूबर, रविवार का दिन निर्धारित है. पंचांग के अनुसार, इस दिन पूरे दिन अष्टमी तिथि रहने के कारण महिलाएं दिनभर भगवती का खोइछा भर सकती हैं.
खोइछा भरने की परंपरा का क्या है महत्व?
मां दुर्गा का खोइछा भरने की रस्म को आंचल भरने के नाम से भी जाना जाता है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सुहागिन महिलाएं महाअष्टमी पर यह परंपरा निभाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का खोइछा भरने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है. यह रस्म संतान की कामना से भी जुड़ी मानी जाती है.
खोइछा भरते समय मां दुर्गा से क्या मांगें?
खोइछा भरते समय महिलाएं मां दुर्गा से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली की कामना करती हैं. इस दौरान मन ही मन मां से प्रार्थना की जाती है कि जिस तरह वे श्रद्धा से अपना आंचल पसारकर देवी का खोइछा भर रही हैं, उसी तरह मां उनके घर-परिवार को सुख-समृद्धि और सौभाग्य से भर दें.
मां दुर्गा का खोइछा भरने का मंत्र
खोइछा भरते समय मां दुर्गा के इस मंत्र का पाठ किया जाता है.
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते
अर्थ- हे नारायणी देवी! आप मंगलमयी और कल्याणकारिणी हैं.आप शरण में आए हुए भक्तों को शरण देती हैं. आपको नमस्कार है.
खोइछा भरने के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?
मां दुर्गा का खोइछा भरने के लिए इन सामग्रियों की जरूरत होती है.
- कपड़ा: लाल या पीले रंग का सूती वस्त्र अथवा चुनरी.
- अक्षत: पांच मुट्ठी साबूत अरवा चावल.
- हल्दी: हल्दी की एक गांठ या गांठ उपलब्ध नहीं होने पर पिसी हुई हल्दी.
- पान और सुपारी: एक पान का पत्ता, जिस पर सिंदूर से पांच बार टीका लगाया जाता है, और एक साबूत सुपारी.
- श्रृंगार सामग्री: सिंदूर, बिंदी, लहठी या चूड़ियां.
- पूजा सामग्री: कम से कम एक और अधिकतम पांच दूर्वा, लौंग, हरी इलायची और लाल फूल.
- मिठाई: बताशा या कोई अन्य मिठाई.
- दक्षिणा: अपनी क्षमता के अनुसार पांच, 11 या 21 रुपये आदि.
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खोइछा भरने के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
मां दुर्गा का खोइछा दोनों हाथों से पांच बार भरा जाता है. यह रस्म पूरी करने के बाद उसमें से पांच चुटकी या थोड़ा-सा चावल निकाल लिया जाता है. इसके बाद बाकी सामग्री की पोटली बनाकर मां दुर्गा के पास रख दी जाती है.
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