Bhagalpur Municipal Court : भागलपुर में अब अवैध निर्माण, अतिक्रमण और बिना ट्रेड लाइसेंस चल रहे कारोबार पर कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रहेगी. नगर निगम ने न्यायिक व निगरानी शाखा का पुनर्गठन कर नगर निगम न्यायालय (म्युनिसिपल कोर्ट) शुरू करने का आदेश जारी किया है. इस व्यवस्था के तहत नगरपालिका कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई होगी और सामान्य परिस्थितियों में किसी भी वाद को दो महीने से अधिक लंबित नहीं रखने का लक्ष्य तय किया गया है. निगम का मानना है कि इससे शिकायतों का त्वरित निपटारा और प्रवर्तन कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी.
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किन मामलों की होगी सुनवाई
नगर निगम न्यायालय में अवैध निर्माण, स्वीकृत नक्शे से विचलन, अतिक्रमण, बिना ट्रेड लाइसेंस व्यवसाय, अवैध पीजी-हॉस्टल व अन्य व्यावसायिक गतिविधियां, कचरा फैलाने, प्रदूषण तथा नागरिक दायित्वों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई की जायेगी. अवैध निर्माण शाखा के सभी कार्य व दायित्व भी इसी न्यायालय में समाहित कर दिये गये हैं.
तीन उप नगर आयुक्तों को मिली न्यायिक शक्ति
सप्ताह के अलग-अलग दिनों में सुनवाई के लिए तीन उप नगर आयुक्तों को अधिकृत किया गया है.
| अधिकारी | सुनवाई का दिन |
|---|---|
| उप नगर आयुक्त राजेश कुमार पासवान | सोमवार व मंगलवार |
| उप नगर आयुक्त आमीर सुहैल | बुधवार व गुरुवार |
| उप नगर आयुक्त सुजीत कुमार | शुक्रवार व शनिवार |
अजय शर्मा को प्रभारी नगर निगम न्यायालय बनाया गया है.
शिकायत नहीं, अब स्वत: भी होगी कार्रवाई
नई व्यवस्था में नागरिक शिकायत मिलने पर संबंधित शाखा और इंफोर्समेंट डिविजन पहले प्राथमिक जांच करेंगे. उल्लंघन मिलने पर वाद दर्ज कर नगर निगम न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा. वहीं इंफोर्समेंट डिविजन को स्वत: संज्ञान लेकर भी अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अन्य उल्लंघनों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है. लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मियों पर अनुशासनिक कार्रवाई होगी.
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दो महीने में निपटारा, साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य
नगर निगम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी मामले को दो माह से अधिक लंबित नहीं रखा जाये. न्यायालय से जुड़े मामलों के लिए नगर निगम अधिवक्ताओं का पैनल बनाया जायेगा, जिसमें रवि मोहन भारद्वाज, शिव शंकर रजक और चुन्नु कुमार की प्रतिनियुक्ति की गयी है.
प्रभारी अधिकारी प्रत्येक सप्ताह शिकायतों, दर्ज वाद, लंबित मामलों, अगली सुनवाई, दो माह से अधिक लंबित प्रकरणों, पारित आदेशों, उनके अनुपालन और प्रवर्तन कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपेंगे.
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