Bihar Police Promotion 2026: बिहार पुलिस में लंबे समय से एएसआई के पद पर काम कर रहे करीब 6800 पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी अब बढ़ने जा रही है. पुलिस मुख्यालय ने इन्हें पुलिस अवर निरीक्षक यानी दारोगा के पद पर अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार देने का आदेश जारी किया है. इस फैसले के बाद संबंधित एएसआई दारोगा की जिम्मेदारी संभाल सकेंगे और पदभार ग्रहण करने की तारीख से उन्हें दारोगा के वेतनमान का आर्थिक लाभ भी मिलेगा.
यह निर्णय एक सितंबर और उसके बाद हुई केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठकों में लिए गए फैसलों के आधार पर लिया गया है. प्रमोशन पाने वाले पुलिसकर्मियों में ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिपाही के पद से की थी. लगातार विभागीय प्रोन्नति के बाद अब वे दारोगा के पद तक पहुंचे हैं. इनमें 1990 से पहले पुलिस विभाग में नियुक्त हुए कई कर्मी भी शामिल हैं.
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सिपाही से दारोगा तक पहुंचा सफर
इस प्रोन्नति में ऐसे पुलिसकर्मियों की संख्या भी काफी है, जिन्होंने विभाग में सिपाही के तौर पर नौकरी शुरू की थी. समय-समय पर मिली प्रोन्नति के बाद अब उन्हें दारोगा की जिम्मेदारी मिलने जा रही है.
इनमें 1990 से पहले नियुक्त हुए कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. इस तरह वर्षों से पुलिस विभाग में सेवा दे रहे इन कर्मियों के लिए यह प्रोन्नति उनके करियर के एक अहम पड़ाव के तौर पर सामने आई है.
पदभार लेते ही मिलेगा आर्थिक लाभ
पुलिस मुख्यालय के आदेश के मुताबिक इन एएसआई को दारोगा कोटि में अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार दिया गया है. दारोगा का वेतनमान भी मिलेगा, लेकिन इसका लाभ तभी से देय होगा जब संबंधित पदाधिकारी दारोगा का पदभार ग्रहण करेंगे.
हर एएसआई को नहीं मिलेगा कार्यकारी प्रभार
मुख्यालय ने इस व्यवस्था के साथ कुछ शर्तें भी स्पष्ट की हैं. जिन पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही, निगरानी, फौजदारी या आपराधिक मामला विचाराधीन है, उन्हें दारोगा का कार्यकारी प्रभार नहीं दिया जाएगा.
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यानी किसी पुलिसकर्मी को सिर्फ प्रोन्नति सूची में शामिल होने के आधार पर कार्यकारी प्रभार का लाभ नहीं मिलेगा. लंबित मामलों से जुड़े पदाधिकारियों पर मुख्यालय के आदेश की यह शर्त लागू होगी.
थानों में बढ़ेगी दारोगा स्तर की जिम्मेदारी
6800 एएसआई को दारोगा का कार्यकारी प्रभार मिलने से पुलिस थानों में अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है. इससे लंबे समय से लंबित मामलों के साथ सामान्य मामलों के निपटारे में भी तेजी आ सकती है.
पुलिस मुख्यालय के इस फैसले का असर आम लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई और पुलिसिंग की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है. थानों में अधिकारियों की संख्या बढ़ने से कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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