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आईना, ओ आईना! लोग कसम क्यों नहीं खाते—मवेशियों को रेलवे ट्रैक पर नहीं चरने देंगे?

Bihar Jharkhand Railway : रेलवे ट्रैक पर मवेशियों की मौजूदगी से हादसे बढ़ते जा रहे हैं. पूर्वी रेलवे ने 3 महीनों में 72 घटनाएं दर्ज की हैं. लोगों से पशुओं को ट्रैक से दूर रखने की अपील की गई है.

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Bihar Jharkhand Railway : रेलवे ट्रैक पर मवेशियों की मौजूदगी से हादसे बढ़ते जा रहे हैं. पूर्वी रेलवे ने 3 महीनों में 72 घटनाएं दर्ज की हैं. लोगों से पशुओं को ट्रैक से दूर रखने की अपील की गई है.

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Bihar Jharkhand Railway : रेलवे ट्रैक केवल ट्रेनों के संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षित मार्ग होता है, लेकिन इसके बावजूद इंसान और मवेशियों की लगातार आवाजाही गंभीर हादसों को जन्म दे रही है. पूर्वी रेलवे ने इस समस्या को लेकर चिंता जताई है और लोगों से अधिक सतर्क रहने की अपील की है. 1 जनवरी से 25 मार्च 2026 के बीच 72 मवेशियों के ट्रेन से कटने की घटनाएं इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाती हैं.

ट्रैक पर अतिक्रमण बना बड़ी समस्या

रेलवे लाइन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, क्योंकि यह ट्रेनों की तेज गति और सुरक्षित संचालन से जुड़ा मामला है. इसके बावजूद कई ग्रामीण और आसपास के लोग ट्रैक को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में मवेशियों को भी खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे वे रेलवे लाइन तक पहुंच जाते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैक पर अचानक किसी भी अवरोध के आने से लोको पायलट के पास ट्रेन रोकने का पर्याप्त समय नहीं होता, जिससे हादसा टालना लगभग असंभव हो जाता है.

बेजुबान जानवर बन रहे हादसों का शिकार

जहां इंसान खतरे को समझ सकता है, वहीं मवेशियों के पास ऐसी कोई समझ नहीं होती. वे अक्सर चारे की तलाश में इधर-उधर घूमते हुए रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं और तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं. इस तरह की घटनाओं में न सिर्फ पशुओं की मौत होती है, बल्कि ट्रेन के इंजन और पटरियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है.

जागरूकता अभियान के बावजूद नहीं थम रहा सिलसिला

पूर्वी रेलवे द्वारा समय-समय पर गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों को रेलवे सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाती है. उन्हें बताया जाता है कि रेलवे ट्रैक पार करना या वहां मवेशियों को छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है.
रेलवे प्रशासन ने कई स्थानों पर ट्रैक के किनारे अवरोध (बैरीकेड) भी लगाए हैं, लेकिन कई बार लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं या मवेशी इन बाधाओं को पार कर जाते हैं. यही कारण है कि तमाम प्रयासों के बावजूद घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है.

चारे की तलाश में ट्रैक तक पहुंचते मवेशी

रेलवे पटरियों के बीच और किनारों पर उगने वाली घास और छोटे पौधे मवेशियों को आकर्षित करते हैं. खुले में छोड़े गए पशु इन पौधों को खाने के लिए ट्रैक तक पहुंच जाते हैं.
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पशुपालकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने मवेशियों को नियंत्रित रखें और उन्हें ट्रैक के आसपास भटकने न दें. थोड़ी सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है.

तीन महीने में 72 घटनाएं, संचालन भी प्रभावित

आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से 25 मार्च 2026 के बीच पूर्वी रेलवे में मवेशियों के ट्रेन से कटने की कुल 72 घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं के कारण कई बार ट्रेनों को रोकना पड़ा या उनकी गति धीमी करनी पड़ी, जिससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल पशुधन के नुकसान का कारण बनती हैं, बल्कि पूरे रेल नेटवर्क की समयबद्धता को भी प्रभावित करती हैं.

ये रेलखंड सबसे ज्यादा संवेदनशील

पूर्वी रेलवे ने जिन सेक्शनों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना है, उनमें सीतारामपुर-मधुपुर, अंडाल-आसनसोल, देवघर-बांका, सैंथिया-नलहाटी, भागलपुर-बांका, साहिबगंज-बरहरवा और किउल-भागलपुर शामिल हैं. इन इलाकों में बार-बार मवेशियों के ट्रैक पर आने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे खतरा लगातार बना हुआ है.

रेलवे की सख्त अपील: जिम्मेदारी निभाएं लोग

पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने कहा कि रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. यदि वे अपने मवेशियों को सुरक्षित रखें और उन्हें ट्रैक से दूर रखें, तो इससे न केवल पशुओं की जान बचेगी, बल्कि उनकी आर्थिक हानि भी नहीं होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है. रेलवे अपने स्तर पर सभी जरूरी कदम उठा रहा है, लेकिन स्थानीय भागीदारी के बिना इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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