Vaishali Boat Accident : वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे के बाद गंगा घाट पर ऐसा मंजर दिखा, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी गमगीन कर दिया. अपने बच्चों को खो चुके परिवारों के लोग रोते-बिलखते रहे. माताओं की चीख और परिजनों के आंसुओं के बीच किसी के पास उन्हें सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं थे. इसी दौरान वैशाली की डीएम वर्षा सिंह भी घाट पर पहुंचीं.
दुख से बेहाल एक महिला को उन्होंने गले लगाया, तो वह उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी. इस दृश्य के बीच डीएम भी भावुक हो गयीं और महिला को ढांढस बंधाने लगीं.
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मां का दर्द देख डीएम वर्षा सिंह ने लगाया गले
नाव हादसे में बच्चों की मौत के बाद घाट पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. अपने बच्चे को खोने के गम में बेहाल एक महिला डीएम वर्षा सिंह से लिपटकर रोने लगी. महिला की हालत देखकर डीएम ने उसे गले लगा लिया और सांत्वना देने की कोशिश की.
मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था. जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया था, उनके दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल था. हादसे के बाद घाट पर मातम पसरा रहा और परिजन अपनों को याद कर बिलखते रहे.
डीएम ने बतायी हादसे के बारे में
वैशाली की जिला मजिस्ट्रेट वर्षा सिंह ने हादसे को बेहद दुखद बताया. उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद पता चला कि नाव पर 15 से 20 बच्चे सवार थे. ये बच्चे पास के गांव में भोज खाने जा रहे थे, इसी दौरान नाव पलट गयी.
डीएम के मुताबिक, हादसे के बाद सात लोगों को बचाया गया था और उन्हें इलाज के लिए एनएमसीएच भेजा गया. उन्होंने बताया कि सभी की स्थिति स्थिर थी. घटनास्थल पर एसडीआरएफ की टीम मौजूद थी और स्थानीय गोताखोरों की मदद से बचाव अभियान चलाया जा रहा था. उन्होंने कुल 13 बच्चों की मौत की पुष्टि की. मृत बच्चे 15 साल या उससे कम उम्र के थे.
अस्पताल में मेडिकल इंतजाम दुरुस्त रखने का दिया था निर्देश
हादसे की सूचना मिलने के बाद डीएम वर्षा सिंह पहले अस्पताल पहुंचीं. वहां उन्होंने मेडिकल इंतजाम दुरुस्त रखने के निर्देश दिए, ताकि घायलों को इलाज मिलने में परेशानी न हो. इसके बाद वह घटनास्थल पर पहुंचीं.
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घाट पर परिजनों की चीख-पुकार के बीच प्रशासनिक अधिकारियों को लोगों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा. डीएम के पहुंचने के दौरान वहां मौजूद लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की.
सुबह तक जारी रहा बचाव अभियान, नाव की हालत पर उठे सवाल
हादसे के बाद बुधवार सुबह भी एसडीआरएफ की टीम राहत और बचाव अभियान में जुटी रही. हादसे में सात लोग बचकर किनारे पहुंचने में सफल रहे, जबकि 13 बच्चों की मौत हो गयी.
स्थानीय लोगों का कहना था कि नाव पहले से खराब थी और इसकी जानकारी प्रशासन को भी दी गयी थी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया. हालांकि, नाव की स्थिति और हादसे के कारणों की जांच के बाद ही इन आरोपों की पुष्टि हो सकेगी.
इस हादसे ने राघोपुर में कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. घाट पर अपनों को खोने वालों का विलाप जारी रहा, जबकि बचाव अभियान के साथ हादसे की परिस्थितियों को लेकर सवाल भी उठते रहे.
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