Vaishali Raghopur Boat Accident : वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के रामपुर गांव में मंगलवार की शाम गंगा की धारा में नाव पलटने से कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई. हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है. मृतकों में ज्यादातर बच्चे हैं, जिनमें 10 बच्चियां शामिल हैं. सबसे दर्दनाक बात यह है कि एक ही परिवार के सात बच्चों की जान चली गई. जो बच्चे घर से भोज खाने के लिए निकले थे, उनके लौटने का इंतजार कर रहे परिजनों को रात में उनकी मौत की खबर मिली.
रात करीब एक बजे गांव का माहौल गम में डूबा हुआ था. घरों से महिलाओं के रोने और चीखने की आवाजें आ रही थीं. बच्चों को खोने वाले परिवारों के लोग बदहवास थे. गांव में ग्रामीणों के साथ अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी पहुंच रहे थे, लेकिन अपनों को खोने का दर्द इतना गहरा था कि किसी के पास उन्हें सांत्वना देने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं थे.
वैशाली में भोज खाने निकले 20 लोग नाव पलटने से डूबे, 13 की मौत; रामपुर श्यामचंद में मचा कोहराम
एक साथ सात बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ा
रामपुर गांव में नाव हादसे की सबसे भयावह तस्वीर उन परिवारों में दिखी, जहां एक साथ कई बच्चों की मौत हो गई. ग्रामीणों के मुताबिक, एक ही परिवार के सात बच्चे हादसे का शिकार हुए हैं. इनमें एक भाई की तीन बेटियां भी शामिल थीं. मृत बच्चों की उम्र करीब पांच से 17 साल के बीच बतायी गयी है.
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ परिवारों में चार से पांच बच्चों की भी मौत हुई है. जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की हंसी सुनाई दे रही थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. कई लोग सदमे में इस स्थिति में भी नहीं हैं कि ठीक से अपनी बात बता सकें.
भोज खाने जाने के दौरान गंगा की धारा में पलट गई नाव
हादसा मंगलवार की शाम करीब 7:30 बजे रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला स्थित माता महारानी स्थान के पास हुआ. बताया जा रहा है कि बच्चे और अन्य लोग गंगा की एक छोटी धारा पार कर भोज खाने जा रहे थे. इसी दौरान नाव पलट गई.
नाव पर करीब 20 से 25 लोगों के सवार होने की बात सामने आयी है. स्थानीय लोगों के अनुसार, नाव की क्षमता करीब छह लोगों की थी. नाव पुरानी होने की बात भी कही जा रही है. हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
अंधेरे में मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में तलाशते रहे लोग
नाव पलटने के बाद पानी में डूब रहे लोगों को बचाने के लिए आसपास के ग्रामीण जुट गये. रात का अंधेरा बचाव कार्य में बड़ी परेशानी बना. लोग मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में पानी में फंसे लोगों की तलाश करते रहे.
करीब एक घंटे तक चले प्रयास के बाद बच्चों के शवों को पानी से बाहर निकाला गया. कुछ शवों को ग्रामीण कंधे पर और खाट के सहारे सड़क तक लेकर पहुंचे. हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. कोई घटनास्थल पर अपनों की तलाश कर रहा था, तो कोई अस्पताल में उनके मिलने की उम्मीद लगाए बैठा था.
13 मौतों की पुष्टि, गंभीर घायलों को पटना भेजने की जानकारी
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने हादसे में 13 लोगों की मौत की पुष्टि की. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए पटना भेजने की जानकारी सामने आयी. एसडीआरएफ की टीम ने घटनास्थल पर बचाव और तलाशी अभियान चलाया. प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी रहने की जानकारी दी गयी.
हादसे के बाद नाव की क्षमता, नदी पार करने के दौरान सुरक्षा और उपलब्ध इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि नाव पुरानी थी और बाढ़ के समय अंचल कार्यालय की ओर से उपलब्ध करायी गयी थी. इन दावों की जांच के बाद ही हादसे के लिए जिम्मेदारी तय हो सकेगी.
मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये, पीएम राहत कोष से भी सहायता
हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया और मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की.
मुख्यमंत्री की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गयी. वहीं, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया गया.
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बाढ़ की परेशानी के बीच नाव हादसे ने बढ़ाया दर्द
राघोपुर पहले से ही बाढ़ की परेशानियों का सामना कर रहा था. इसी बीच नाव हादसे ने रामपुर गांव को ऐसी त्रासदी दे दी, जिससे पूरा इलाका सदमे में है. रात तक लोग पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन जिन परिवारों ने एक साथ कई बच्चों को खोया है, उनके लिए इस दुख से उबरना आसान नहीं होगा.
हादसे के बाद नाव की क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने, नाव की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब यह जांच का विषय है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाये जाएंगे. फिलहाल रामपुर गांव में उन बच्चों की यादें रह गयी हैं, जो भोज खाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन कभी लौटकर नहीं आए.
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