Cyber Crime: साइबर ठगी के अलग-अलग नेटवर्क में झारखंड और बिहार के कई जिले देश के शीर्ष 15 जिलों में शामिल हैं. साइबर अपराध के मामलों में बिहार का नवादा देश में दूसरे और झारखंड का देवघर तीसरे स्थान पर है. वहीं, झारखंड के दुमका को 14वां स्थान मिला है. फर्जी सिम कार्ड जारी करने से लेकर ठगी की रकम निकालने तक के मामलों में भी दोनों राज्यों के जिलों की मौजूदगी सामने आई है.
अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान जारी सूची में साइबर अपराध, अवैध सिम कार्ड, किराए के बैंक खाते और एटीएम व चेक से रकम निकालने जैसे चार मानकों के आधार पर जिलों की स्थिति बताई गई है.
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Cyber Crime: फर्जी सिम कार्ड से रकम निकालने तक, अलग-अलग नेटवर्क में जिलों की मौजूदगी
साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी सिम कार्ड जारी करने के मामले में झारखंड का गिरिडीह देश में 10वें स्थान पर है. इस श्रेणी में बिहार का नालंदा दूसरे और अरवल चौथे स्थान पर है. वहीं, ठगी की रकम एटीएम के जरिए निकालने के मामलों में झारखंड का धनबाद 13वें स्थान पर दर्ज किया गया है. इससे पता चलता है कि साइबर ठगी के नेटवर्क में अलग-अलग जिलों की भूमिका अलग-अलग तरह के मामलों में सामने आ रही है.
साइबर अपराध के मामलों में नवादा दूसरे, देवघर तीसरे स्थान पर
साइबर अपराध के सर्वाधिक मामलों के आधार पर तैयार सूची में बिहार का नवादा देश में दूसरे स्थान पर है. झारखंड का देवघर तीसरे, बिहार का नालंदा चौथे और पटना नौवें स्थान पर है. झारखंड के दुमका को इस श्रेणी में 14वां स्थान मिला है. कभी साइबर ठगी के प्रमुख केंद्र के रूप में चर्चित जामताड़ा के अलावा अब झारखंड के दूसरे जिले भी इस तरह के अपराधों को लेकर सूची में जगह बना रहे हैं.
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ठगी की रकम निकालने में कोलकाता और पटना आगे
ठगी से हासिल रकम को एटीएम और चेक के माध्यम से निकालने के मामलों में कोलकाता देश में पहले और पटना दूसरे स्थान पर है. वहीं, किराए के बैंक खातों के जरिए अवैध रकम निकालने के मामले में पटना नौवें स्थान पर है. ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है.
फर्जी दस्तावेजों से सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल
साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी पहचान पत्रों या दूसरे लोगों के दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम कार्ड हासिल करते हैं. ठगी के बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित किया जाता है और एटीएम या चेक से निकाला जाता है. किराए पर उपलब्ध कराए गए बैंक खाते भी इस नेटवर्क में इस्तेमाल होते हैं. इन अलग-अलग कड़ियों के कारण पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती बढ़ जाती है.
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