Russia Drone Attack: यूक्रेन के निप्रो शहर में रेलवे स्टेशन पर खड़ी दो ट्रेनों पर ड्रोन हमले में 13 लोगों की मौत और 10 लोगों के घायल होने के बाद रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका, यूरोपीय संघ और G7 देशों से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है. उनका सवाल है कि रूसी ऊर्जा क्षेत्र और कुछ उद्योगपतियों को प्रतिबंधों में राहत मिलने के बावजूद हमले क्यों नहीं रुक रहे हैं.
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13 मौतों के बाद रूस पर दबाव बढ़ाने की मांग
निप्रो के रेलवे स्टेशन पर हमला उस समय हुआ, जब प्लेटफॉर्म पर एक लोकल ट्रेन और एक निर्धारित यात्री ट्रेन खड़ी थीं. ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की जान चली गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए. घटना के बाद आपातकालीन सेवाओं ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया.
जेलेंस्की ने इस हमले पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की. इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों से रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और सख्त करने की अपील की. उनकी मांग है कि रूस की युद्ध क्षमता और सैन्य अभियान पर दबाव बढ़ाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने के बजाय नए कदम उठाए जाएं.
प्रतिबंधों में राहत पर जेलेंस्की ने उठाए सवाल
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रूस का युद्ध जारी रहने तक मॉस्को और उसकी युद्ध मशीन पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने अमेरिका, यूरोपीय संघ और G7 देशों से इस दिशा में कार्रवाई करने का आग्रह किया.
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A horrific Russian strike on the railway station in Dnipro. The Russians launched a drone attack on a platform where an ordinary commuter train and a scheduled passenger train were standing. Unfortunately, 13 people have been confirmed killed as of now. My condolences to their families and loved ones. Ten more people were injured. All necessary emergency services are working at the scene.Just how many terrorist strikes has Russia carried out against our people since sanctions were lifted on certain Russian oligarchs and the Russian energy sector, rather than de-escalating? This is precisely why Ukraine has always said that just and decisive action by America and Europe is needed in response to Russian escalation – sanctions against Moscow and its war machine must not be eased for as long as this Russian war continues. It is time for new, stronger sanctions steps by the EU, the United States, and the G7. I thank everyone who is ready to help in this way.
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) October 29, 2026
जेलेंस्की ने खास तौर पर सवाल उठाया कि रूस के कुछ उद्योगपतियों और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों में राहत देने के बाद भी हमले जारी हैं. उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर है कि रूस की सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए पश्चिमी देशों को अपना दबाव बनाए रखना चाहिए.
युद्धविराम की घोषणा और जमीनी हालात पर सवाल
अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने 27 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम मॉस्को के समयानुसार सुबह 4 बजे से प्रभावी हो गया है. उनके अनुसार, युद्धविराम तय समय से दो दिन पहले शुरू किया गया था, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
मेलानिया ट्रंप ने यह भी बताया था कि युद्धविराम का दायरा खेरसॉन क्षेत्र के ओलेश्की से आगे बढ़ाया गया, जिससे राहत सामग्री लेकर जाने वाले काफिलों को सुरक्षित रास्ता मिल सके. उन्होंने रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख जनरल वालेरी वासिलिविच की ओर से इसकी पुष्टि किए जाने का उल्लेख किया था.
निप्रो में हुए हमले और युद्धविराम की घोषणा के बीच का घटनाक्रम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि हमला घोषित युद्धविराम के दायरे में आता था या नहीं.
ट्रंप के साथ लक्ष्य एक, लेकिन रास्ते अलग: जेलेंस्की
‘द सन’ को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ युद्ध समाप्त करने की रणनीति पर मतभेदों की बात स्वीकार की. उन्होंने कहा कि दोनों युद्ध खत्म करना चाहते हैं, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के तरीके अलग-अलग हैं.
जेलेंस्की का कहना था कि यूक्रेन रूस और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानसिकता को बेहतर समझता है, क्योंकि यूक्रेन के लोगों का रूस के साथ लंबे समय तक जुड़ाव रहा है. उन्होंने अपनी पीढ़ी के सोवियत संघ के दौर में जन्म लेने का भी जिक्र किया.
उन्होंने दावा किया कि रूस में कुछ लोग पुतिन के डर से फैसले लेते हैं और यूक्रेन के खिलाफ लड़ने से इनकार करने वाले रूसी सैनिकों को भी सजा का भय रहता है.
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अमेरिका के साथ संबंधों पर जेलेंस्की ने यह भी माना कि वॉशिंगटन ने कई मुद्दों पर यूक्रेन का समर्थन किया है, लेकिन युद्ध समाप्त करने की रणनीति को लेकर दोनों पक्षों की राय हर बार एक जैसी नहीं होती.
निप्रो हमले के बाद जेलेंस्की की मांग अब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर केंद्रित है. उन्होंने पश्चिमी देशों से स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक रूस का युद्ध जारी है, तब तक प्रतिबंधों में राहत देने के बजाय कड़े कदमों पर विचार किया जाना चाहिए.
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