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कल है हरिशयनी एकादशी; शुरू होगा चातुर्मास, 4 माह तक ठप रहेंगे विवाह जैसे शुभ कार्य

Religious News हरिशयनी एकादशी छह जुलाई को मनाई जाएगी, जिसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होगा. चार महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा और व्यापार पर भी असर दिखेगा.

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Religious News हरिशयनी एकादशी छह जुलाई को मनाई जाएगी, जिसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होगा. चार महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा और व्यापार पर भी असर दिखेगा.

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Religious News: भागलपुर समेत पूरे हिंदू समाज में छह जुलाई को हरिशयनी एकादशी का विशेष महत्व है. इस दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जायेगा और भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जायेंगे. इसके साथ ही चार महीने तक वैवाहिक और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जायेगा. वहीं व्यापार जगत में भी मंदी का दौर शुरू होगा, जिसकी भरपाई सावन के बाजार से होने की उम्मीद रहेगी.

एकादशी पर बन रहे तीन शुभ योग, विष्णु योगनिद्रा में और शिव होंगे जागृत

पंडित आनंद मिश्रा के अनुसार, एकादशी तिथि पांच जुलाई को रात 6:28 बजे से शुरू होकर छह जुलाई की रात 8:22 बजे तक रहेगी. व्रत का पारण सात जुलाई की सुबह 5:29 से 8:16 के बीच होगा. इस एकादशी पर साध्य योग, शुभ योग और त्रिपुष्कर योग जैसे तीन शुभ संयोग बन रहे हैं. साथ ही तैतिल करण और विशाखा नक्षत्र का भी प्रभाव रहेगा.

चातुर्मास में ठप रहेंगे शुभ कार्य, 22 नवंबर से शुरू होंगे विवाह

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पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि एकादशी के दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवोत्थान एकादशी (1 नवंबर) को समाप्त होती है. हालांकि विवाह की लग्न तिथि कालशुद्धि के बाद 22 नवंबर से शुरू होगी. अन्य शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश आदि तीन नवंबर से किए जा सकेंगे.

शिव करेंगे सृष्टि का संचालन, सावन का बाजार देगा सहारा

पंडित अंजनी शर्मा के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं और भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं. इस दौरान बारिश का मौसम किसानों के लिए भी खास होता है. बाजार की बात करें, तो मांगलिक कार्य बंद रहने से मंदी जरूर आयेगी, लेकिन सावन के अवसर पर पूजन सामग्री, कपड़े और फलों की बिक्री से कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.

पौराणिक मान्यता
व्रत-त्योहार ग्रंथ और मिथिला पंचांग के अनुसार, यह केवल सामान्य शयन नहीं होता, बल्कि विष्णु की योगनिद्रा होती है, जिससे सृष्टि नवचेतना की ओर बढ़ती है. चातुर्मास के ये चार महीने आध्यात्मिक साधना और संयम के लिए माने जाते हैं.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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