विज्ञापन

वायरल वीडियो

बिहार में भूजल बचाने की नई पहल, बारिश का पानी सीधे जमीन के अंदर पहुंचाने की तैयारी

Bihar News: बिहार में भूजल स्तर सुधारने के लिए सरकार इंजेक्शन वेल तकनीक लागू करने की तैयारी में है. इस योजना के तहत वर्षा जल को सीधे भूगर्भीय जल भंडार तक पहुंचाया जाएगा. जल-जीवन-हरियाली अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं.

Bihar News: बिहार में गिरते भूजल स्तर की चुनौती से निपटने के लिए सरकार नई तकनीक अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. लघु जल संसाधन विभाग ने वर्षा जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इंजेक्शन वेल प्रणाली लागू करने की योजना बनाई है. इस व्यवस्था के जरिए बारिश के पानी को सीधे भूगर्भीय जल भंडार तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भविष्य में जल उपलब्धता को मजबूत आधार मिल सके.

वर्षा जल को मिलेगा सीधा भूजल भंडार का रास्ता

प्रस्तावित योजना के तहत ऐसे विशेष कुएं विकसित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से वर्षा का पानी सीधे एक्वीफर तक पहुंचेगा. विभाग का मानना है कि इससे भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया तेज होगी और लगातार नीचे जा रहे जलस्तर को संतुलित करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही भूजल दोहन पर निगरानी के लिए नया नियामक ढांचा भी तैयार किया जा रहा है.

जल-जीवन-हरियाली अभियान के दिखे असर

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान का असर भी आंकड़ों में दिखाई देने लगा है. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में राज्य के 102 प्रखंड अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहित श्रेणी में शामिल थे. वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर 64 पर पहुंच गई है, जिसे जल संरक्षण प्रयासों की उपलब्धि माना जा रहा है.

जल संरक्षण के लिए कई स्तरों पर काम

राज्य में जल संसाधनों को सहेजने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम किया गया है. इसके तहत तालाबों, आहर-पोखरों और पुराने कुओं का पुनर्जीवन किया गया. साथ ही वर्षा जल संचयन, चेकडैम निर्माण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया गया, जिससे पानी के संरक्षण की क्षमता में वृद्धि हुई है.

हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर

जल संरक्षण के साथ-साथ हरियाली बढ़ाने की दिशा में भी अभियान चलाया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य का हरित आवरण पहले 9 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 15.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसे और बढ़ाकर 17 प्रतिशत तक ले जाने के लक्ष्य के साथ व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं.

खेती पर भी पड़ा सकारात्मक असर

जल संरक्षण उपायों का लाभ कृषि क्षेत्र में भी देखने को मिला है. जैविक खेती और टपक सिंचाई जैसी तकनीकों को बढ़ावा मिलने से किसानों की सिंचाई व्यवस्था बेहतर हुई है. विभागीय आकलन के अनुसार इससे किसानों की आय में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल

जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल संरक्षण और हरित क्षेत्र विस्तार की योजनाएं इसी तरह जारी रहीं, तो आने वाले वर्षों में जल संकट की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा. इंजेक्शन वेल जैसी तकनीकें भूजल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

इसे भी पढ़ें-

सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

Patna
scattered clouds
37.2 ° C
37.2 °
37.2 °
25%
7.3m/s
27%
Wed
37 °
Thu
42 °
Fri
41 °
Sat
43 °
Sun
44 °

अन्य खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here