MSME Bill 2026: देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने संसद में MSME Development (Amendment) Bill, 2026 पेश किया है. प्रस्तावित कानून का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को समय पर भुगतान दिलाना, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाना और कारोबार से जुड़े नियमों को सरल बनाना है. बिल लागू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा उन MSME इकाइयों को मिल सकता है, जो सरकारी कंपनियों के साथ कारोबार करती हैं.
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सरकारी कंपनियों को TReDS प्लेटफॉर्म से करना होगा भुगतान
प्रस्तावित बिल के अनुसार, सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (Central PSUs) को MSME के इनवॉइस Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोसेस करने होंगे. इससे छोटे कारोबारियों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें जल्दी वर्किंग कैपिटल भी उपलब्ध हो सकेगा.
बिल में राज्य सरकारों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वे चाहें तो अपनी सरकारी कंपनियों के लिए भी यही व्यवस्था लागू कर सकती हैं.
MSME Bill 2026: मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा MSME रजिस्ट्रेशन
सरकार ने MSME के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त होगी.
नई व्यवस्था से:
- MSME का पंजीकरण आसान होगा.
- सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी.
- अलग-अलग विभागों की प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होगा.
- कागजी औपचारिकताओं का बोझ घटेगा.
पेमेंट विवादों का होगा जल्द समाधान
बिल में भुगतान से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे पर भी विशेष जोर दिया गया है. इसके लिए राज्यों को अतिरिक्त MSME Facilitation Councils गठित करने होंगे, ताकि लंबित मामलों का तेजी से समाधान हो सके.
साथ ही, यदि किसी MSME के पक्ष में फैसला आता है और खरीदार उस फैसले को अदालत में चुनौती देता है, लेकिन मामला छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो उसे अवॉर्ड राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करना पड़ सकता है. अदालत को भी अपील के दौरान जमा राशि में से भुगतान कराने का अधिकार मिलेगा. इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों की नकदी संबंधी समस्याओं को कम करना है.
नियमों में होंगे ये अहम बदलाव
प्रस्तावित संशोधन के तहत कई अन्य बदलाव भी किए गए हैं.
- कुछ मामलों में आपराधिक सजा की जगह चेतावनी और निर्धारित आर्थिक दंड का प्रावधान होगा.
- पेनाल्टी लगने पर कारोबारी को अपील करने का अधिकार मिलेगा.
- प्रत्येक MSME Facilitation Council में 3 से 5 सदस्य होंगे और एक कानूनी विशेषज्ञ को शामिल करना अनिवार्य होगा.
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से MSME क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, तेज और कारोबार के अनुकूल व्यवस्था मिल सकेगी.
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