Bhagalpur Traffic Jam: भागलपुर में गुड़हट्टा चौक से पटलबाबू रोड के बीच करीब 500 मीटर की सड़क अब सिर्फ जाम की जगह नहीं, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी बन गई है. सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक वाहनों का दबाव बना रहता है. सड़क पर लगने वाले जाम का असर सिर्फ वाहन चालकों के समय पर नहीं पड़ रहा, बल्कि ईंधन की बर्बादी, कारोबार, आपात सेवाओं और आसपास की गलियों की आवाजाही तक पहुंच गया है.
गुरुवार को भी इस मार्ग पर यही स्थिति रही. कई जगह वाहन रुक गए तो कई स्थानों पर गाड़ियां बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती रहीं. दोपहिया चालकों ने किनारे से निकलने की कोशिश की, जबकि बसों और चारपहिया वाहनों की कतार ने सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया.
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एक जाम, कई रास्तों पर असर
गुड़हट्टा चौक से पटलबाबू रोड के बीच जब मुख्य सड़क पर वाहनों की रफ्तार थमती है, तो उसका असर आसपास की गलियों पर भी दिखाई देता है. मुख्य मार्ग से बचने के लिए वाहन चालक गलियों में प्रवेश करते हैं और वहां भी दबाव बढ़ जाता है.
इस तरह करीब 500 मीटर की सड़क का जाम धीरे-धीरे आसपास के रास्तों तक फैल जाता है. यही वजह है कि इस इलाके में समस्या सिर्फ सड़क पर खड़ी गाड़ियों की नहीं, बल्कि पूरे ट्रैफिक नेटवर्क की बन गई है.
पुलिस पहुंची, लेकिन सड़क पर खड़ी बसों ने बढ़ाई मुश्किल
जाम को संभालने के लिए मोजाहिदपुर थाना, लोहिया पुल और डिक्सन मोड़ पुलिस शिविर से पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे. यातायात को सामान्य कराने की कोशिश की गई, लेकिन आधा दर्जन से अधिक बसों और दूसरे वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग के कारण स्थिति ज्यादा नहीं सुधर सकी.
यात्रियों को चढ़ाने-उतारने के लिए बसों का सड़क और लोहिया पुल पर रुकना भी यातायात की रफ्तार रोकने वाली प्रमुख वजहों में शामिल है.
जाम की असली कड़ी कहां जुड़ती है?
इस पूरे इलाके में यातायात दबाव बढ़ने के पीछे कई कारण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.
- भोलानाथ आरओबी के निर्माण के कारण दो रास्तों में से एक पर वाहनों का दबाव दूसरे रास्ते पर बढ़ गया है.
- रिक्शाडीह भेजे गए बस स्टैंड को वापस कोयला डिपो में लाया गया है.
- बस स्टैंड से एक साथ कई बसें निकलकर लोहिया पुल की तरफ पहुंचती हैं.
- लोहिया पुल पर बसें आड़े-तिरछे खड़ी कर दी जाती हैं.
- यात्रियों को चढ़ाने और उतारने के लिए पुल के बीच में बसें रोक दी जाती हैं.
- पुल के बीच डिवाइडर होने से बसों को मोड़ने में भी परेशानी होती है.
- ट्रैफिक पोस्ट के सामने यात्रियों के इंतजार में ई-रिक्शा की कतार लगी रहती है.
- लोहिया पुल पर अस्थायी दुकानें भी यातायात को प्रभावित करती हैं.
- दोनों तरफ की गलियों से वाहन मुख्य सड़क पर निकलते रहते हैं.
- अतिक्रमण नहीं हटाए जाने से सड़क पर उपलब्ध जगह कम हो गई है.
- थाना के सामने चल रहे अवैध ऑटो स्टैंड से भी यातायात प्रभावित होता है.
- 30 मिनट का जाम, 25 हजार रुपये का ईंधन
इस जाम की आर्थिक कीमत का अंदाजा एक छोटे से हिसाब से लगाया जा सकता है. यदि करीब 1,000 वाहन आधे घंटे तक फंसे रहें और हर वाहन का औसतन 25 रुपये का ईंधन खड़े या रेंगते हुए खर्च हो जाए, तो करीब 25 हजार रुपये का ईंधन बर्बाद होने का अनुमान है.
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यह केवल आधे घंटे और 1,000 वाहनों के आधार पर किया गया अनुमान है. सुबह से रात तक अलग-अलग समय में जाम की स्थिति बनी रहने पर ईंधन की बर्बादी इससे कहीं अधिक हो सकती है.
धूप में फंसे लोग, जरूरी काम पर देर
गुरुवार को जाम में फंसे दोपहिया वाहन चालक चिलचिलाती धूप में परेशान रहे. कई लोग लगातार आगे रास्ता खुलने का इंतजार करते दिखे. कार्यालय, बाजार और दूसरे जरूरी काम से निकले लोगों को देरी का सामना करना पड़ा.
कुछ वाहन चालकों ने जाम से बचने के लिए गलियों का रास्ता चुना, लेकिन मुख्य सड़क का दबाव वहां पहुंचने से वैकल्पिक रास्ते भी प्रभावित हो गए.
एंबुलेंस फंसी तो बढ़ सकती है परेशानी
इस तरह के जाम का सबसे गंभीर असर आपात सेवाओं पर पड़ सकता है. सड़क पर बसों और वाहनों के बेतरतीब खड़े रहने से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी वाहनों के लिए रास्ता मिलना मुश्किल हो सकता है.
जाम का असर पैदल यात्रियों पर भी पड़ता है. बसों और वाहनों के बीच उन्हें सड़क पार करने या आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ती है.
व्यापार से वाहन के रखरखाव तक असर
लगातार जाम का असर आसपास के कारोबार पर भी पड़ता है. दुकानों के सामने वाहन फंसे रहने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है. दूसरी ओर बार-बार ब्रेक, क्लच और एक्सीलेरेटर का इस्तेमाल करने से वाहनों में ईंधन के साथ रखरखाव का खर्च भी बढ़ता है.
लंबे समय तक इंजन चालू रहने से धुआं और प्रदूषण बढ़ने का खतरा भी रहता है. रोजाना इसी रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों और यात्रियों के लिए लगातार जाम मानसिक तनाव का कारण भी बन रहा है.
500 मीटर की सड़क पर व्यवस्था की परीक्षा
गुड़हट्टा चौक से पटलबाबू रोड तक की दूरी महज 500 मीटर है, लेकिन इसे पार करने में कई बार आधे घंटे से ज्यादा लग जाता है. इस छोटे से हिस्से पर बसों का ठहराव, ई-रिक्शा और ऑटो की अव्यवस्था, अतिक्रमण, अस्थायी दुकानें और गलियों से मुख्य सड़क पर आने वाले वाहनों का दबाव एक साथ समस्या पैदा कर रहा है.
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जाम कब खुलेगा, बल्कि यह है कि 500 मीटर की इस सड़क को रोजाना जाम से मुक्त रखने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था कब बदलेगी.
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