Delhi Building Collapse: नई दिल्ली के मोती बाग स्थित सत्य निकेतन इलाके में लगातार बारिश के बीच एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के समय इमारत के भीतर बड़ी संख्या में छात्रों के मौजूद होने की आशंका है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 से 60 छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई गई है. कुछ लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल भेजे जाने की भी सूचना है.
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हादसे की सूचना दोपहर करीब 1:34 बजे नानकपुरा गुरुद्वारे के पास से पीसीआर कॉल के जरिए साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को मिली. सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, कैट एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं. एनडीआरएफ की टीम ने भी मोर्चा संभालते हुए मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी.
बारिश के बीच अचानक ढही पूरी इमारत
बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों से इलाके में लगातार बारिश हो रही थी. इसी दौरान चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई और देखते ही देखते पूरा ढांचा मलबे में तब्दील हो गया. हादसे के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई. राहत और बचाव दल भारी मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए जेसीबी समेत अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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प्रत्यक्षदर्शी ने बताई हादसे की भयावहता
घटनास्थल के पास दुकान चलाने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, इमारत गिरने से पहले भूकंप जैसी तेज गड़गड़ाहट सुनाई दी. आवाज सुनकर जब वे बाहर निकले तो पूरी इमारत ढह चुकी थी और चारों तरफ धूल तथा मलबा फैला हुआ था. प्रत्यक्षदर्शी ने मलबे में कई बच्चों के दबे होने की आशंका जताई है. हालांकि, बचाए गए लोगों और हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है और आधिकारिक आंकड़े का इंतजार है.

नवीनीकरण के दौरान कमजोर हुए ढांचे पर सवाल
हादसे के बाद इमारत में चल रहे नवीनीकरण कार्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, भूतल पर किराए के लिए जगह तैयार करने और नीचे की तरफ निर्माण कार्य किए जाने की बात सामने आई है. दावा है कि इमारत के ऊपरी हिस्से को मजबूत किया गया था, जबकि निचले हिस्से के खंभों पर काम चल रहा था.
यदि यह जानकारी जांच में सही पाई जाती है, तो यह सवाल अहम होगा कि क्या नवीनीकरण के दौरान इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा के मानकों का पालन किया गया था. फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं है. एनडीआरएफ, पुलिस और दमकल की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं. प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है. हादसे के बाद आसपास स्थित पीजी और छात्र आवासों में रहने वाले लोगों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.
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