Bhagalpur Cyber Crime : भागलपुर साइबर थाना पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें ग्रामीणों की जानकारी के बिना उनके नाम पर सिम जारी कर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है. पुलिस जांच में करीब आठ महीने के दौरान 72 सिम जारी किए जाने की बात सामने आई है. खास बात यह है कि जांच में इन सिम का इस्तेमाल झारखंड में सक्रिय साइबर अपराधियों की ओर से किए गए 124 साइबर अपराधों में होने की जानकारी मिली है.
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मामले में बांका जिले के पदमपुर निवासी अमित कुमार को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार वह पीओएस एजेंट के रूप में काम करता था और मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के नाम पर ग्रामीणों की जानकारी के बिना सिम जारी करता था. साइबर क्राइम सिक्योरिटी यूनिट पटना से मिली सूचना के बाद शुरू हुई तकनीकी जांच में यह पूरा मामला सामने आया.
पोर्ट कराने के नाम पर जारी किए सिम
पुलिस के अनुसार अमित कुमार ग्रामीणों के मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के नाम पर उनकी जानकारी के बिना सिम जारी करता था. करीब आठ महीने में ऐसे 72 सिम जारी किए जाने की बात जांच में सामने आई है.
पुलिस का आरोप है कि इन सिम को अवैध तरीके से निकालने के बाद झारखंड में सक्रिय साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया गया.
72 सिम का 124 अपराधों में इस्तेमाल
तकनीकी जांच में पुलिस को इन 72 सिम के इस्तेमाल से जुड़े अहम इनपुट मिले. पुलिस के अनुसार झारखंड में सक्रिय साइबर अपराधियों ने इन सिम का इस्तेमाल कुल 124 साइबर अपराधों में किया.
यही कड़ी इस मामले की जांच का अहम हिस्सा बनी है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिम जारी करने से लेकर उन्हें अपराधियों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित होती थी.
पटना से मिले इनपुट ने खोला मामला
साइबर क्राइम सिक्योरिटी यूनिट पटना से सूचना मिलने के बाद भागलपुर साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान शुरू किया. जांच में संबंधित मोबाइल नंबरों, सिम जारी होने की प्रक्रिया और उनके इस्तेमाल से जुड़े तकनीकी तथ्यों को खंगाला गया.
इसी दौरान अमित कुमार की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की.
हरचंडी चौक से पकड़ा गया अमित
तकनीकी अनुसंधान और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने अमित कुमार को बांका जिले के हरचंडी चौक से गिरफ्तार किया. उसके पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं.
अब जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही पुलिस
मामले में साइबर थाना में गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस अब सिम जारी करने की पूरी प्रक्रिया और संबंधित मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है. साथ ही झारखंड में सक्रिय साइबर अपराधियों के साथ अमित कुमार के कथित संपर्क की भी पड़ताल की जा रही है.
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अनुसंधान में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.
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