Bihar : जमुई में सिकंदरा के कृषि फार्म की करीब 10 एकड़ सरकारी जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी नामों पर कराने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कार्रवाई तेज कर दी है. आर्थिक अपराध थाना में कांड संख्या 27/2026, 29 सितंबर 2026 को दर्ज करने के बाद ईओयू ने नामजद आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है. प्राथमिकी में गुड्डू यादव, उनकी पत्नी सह जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी, कथित सिंडिकेट के सदस्यों के अलावा सिकंदरा अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी, तत्कालीन राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है.
आरोप है कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर कर उसका अवैध निबंधन और दाखिल-खारिज कराया गया.
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जिस जमीन का 1959 में हुआ था अधिग्रहण, उसके लिए 1924-27 के दस्तावेज सामने लाए गए
ईओयू की जांच में कृषि फार्म की जमीन को लेकर दस्तावेजों की समय-सीमा पर ही गंभीर सवाल सामने आए हैं. जांच के अनुसार बिहार सरकार के कृषि विभाग ने संबंधित भूमि का वर्ष 1959 में विधिवत अधिग्रहण किया था. इसके बावजूद जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए वर्ष 1924 और 1927 के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.
जांच एजेंसी के मुताबिक इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 14 निबंधित डीड तैयार कराकर करीब 10 एकड़ सरकारी जमीन गुड्डू यादव, उनके परिजनों और कथित गिरोह से जुड़े लोगों के नाम कराई गई. इनमें तीन डीड के जरिए दुलारी देवी के नाम करीब सात एकड़ जमीन दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है. यह जमीन सरकारी दर यानी MVR से काफी कम कीमत पर दर्ज कराई गई.
अवर निबंधक, मुंगेर और अंचलाधिकारी, सिकंदरा की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में भी वर्ष 1924 और 1927 से जुड़े प्रस्तुत दस्तावेजों को फर्जी और मनगढ़ंत बताया गया है.
दो डीड पर हुआ दाखिल-खारिज, बाकी पर ग्रामीणों की आपत्ति बनी रोक
जमीन के फर्जीवाड़े में सिर्फ दस्तावेज तैयार करने का आरोप ही नहीं है, बल्कि उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड बदलने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में है. अनुसंधान के अनुसार 8 जनवरी 2019 को निष्पादित डीड संख्या 154 और 156 के आधार पर गुड्डू यादव और अनुज यादव के नाम खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज तत्कालीन अंचलाधिकारी विनोद कुमार चौधरी और तत्कालीन राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव ने किया.
ईओयू के अनुसार यह दाखिल-खारिज बिना स्थलीय और विधिक सत्यापन के किया गया. वहीं, कृषि फार्म की दूसरी जमीन से जुड़े निबंधित डीड पर स्थानीय ग्रामीणों ने आपत्ति और विरोध दर्ज कराया. इसके बाद उन डीड के आधार पर दाखिल-खारिज के अन्य आवेदनों को प्रशासनिक स्तर पर निरस्त कर दिया गया.
17 आरोपियों वाले पुराने केस से जुड़ी जांच में सामने आया नया फर्जीवाड़ा
कृषि फार्म की सरकारी जमीन से जुड़े इस मामले का खुलासा ईओयू की पहले से चल रही जांच के दौरान हुआ. कांड संख्या 14/2026, दिनांक 27 जुलाई 2026 में गुड्डू यादव समेत 17 नामजद आरोपियों के खिलाफ संगठित गिरोह बनाकर गरीब, कमजोर और असहाय लोगों की जमीन औने-पौने दाम पर हड़पने तथा अपराध से अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच चल रही है.
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इसी मामले की जांच के दौरान कृषि फार्म की सरकारी जमीन से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन जांच एजेंसी के सामने आए. रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ईओयू ने इसे अलग मामले के रूप में दर्ज किया और अब नामजद आरोपियों के ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है.
अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
नए केस में तत्कालीन अंचलाधिकारी, राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारियों को आरोपी बनाए जाने से जमीन के फर्जीवाड़े में राजस्व तंत्र की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है. ईओयू अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किस स्तर पर हुआ और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निबंधन व दाखिल-खारिज की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी.
जांच एजेंसी की कार्रवाई अभी जारी है. कृषि फार्म की जमीन से जुड़े कथित सिंडिकेट में शामिल अन्य लोगों, अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.
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