Bhagalpur Municipal Corporation Meeting : वार्डों के विकास के लिए मिलने वाली राशि पर अधिकार की लड़ाई शनिवार को नगर निगम की सामान्य बोर्ड की बैठक तक पहुंच गयी. मामला मेयर और डिप्टी मेयर के लिए अलग से फंड निर्धारित करने का था. प्रस्ताव में वार्डों की योजना राशि से मेयर के लिए 10 प्रतिशत और डिप्टी मेयर के लिए पांच प्रतिशत हिस्सा निकालने की बात कही गयी.
इस पर पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम अधिनियम में ऐसी व्यवस्था ही नहीं है तो किस अधिकार से यह राशि निर्धारित की जा रही है. विरोध बढ़ा तो मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और डिप्टी मेयर डॉ. सलाउद्दीन अहसन बैठक बीच में छोड़कर अपने चैंबर में चले गये.
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इस प्रस्ताव ने सदन में जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकार और विकास राशि के इस्तेमाल को लेकर मतभेद उजागर कर दिया. वार्ड-8 के पार्षद जाबीर अंसारी ने यह प्रस्ताव रखा था. उनका पक्ष था कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास भी विकास कार्यों के लिए राशि होनी चाहिए, ताकि जनता की ओर से दिये गये आवेदनों के आधार पर काम कराया जा सके.
लेकिन पार्षद संघ के अध्यक्ष अनिल पासवान ने इस पर आपत्ति जताते हुए नगर निगम अधिनियम का प्रावधान सदन में दिखाने की मांग की. वार्ड-21 के संजय सिन्हा और वार्ड-43 के रंजीत मंडल समेत कई पार्षद भी विरोध में खड़े हो गये.
अनिल पासवान का कहना था कि मेयर और डिप्टी मेयर को इस तरह राशि आवंटित करने का अधिकार न तो नगर निगम अधिनियम में है और न ही सरकार की ओर से ऐसी कोई शक्ति दी गयी है. यदि कोई नियम है तो उसे सदन के सामने रखा जाये. इस मांग पर सहमति नहीं बनने और बहस तेज होने के बीच मेयर व डिप्टी मेयर सदन से बाहर चले गये. बाद में पार्षदों ने पहल कर दोनों को वापस बुलाया. अंततः इस पर फैसला लेने के बजाय नगर आयुक्त को सरकार से मार्गदर्शन लेने की जिम्मेदारी दी गयी.
होल्डिंग टैक्स में चार प्रतिशत कमीशन पर भी नहीं बनी सहमति
बैठक में केवल विकास राशि का मामला ही नहीं उलझा. होल्डिंग टैक्स वसूली की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी के माध्यम से कराने की योजना भी पार्षदों की आपत्ति के बाद आगे नहीं बढ़ सकी. नगर आयुक्त ने बताया कि इस व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर तैयार हो चुका है. कलेक्शन और सॉफ्टवेयर के मद में चार प्रतिशत कमीशन निर्धारित किया गया है. इससे टैक्स से संबंधित डेटा भी सुरक्षित रहेगा.
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पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम के पास अपना तहसीलदार और वसूली की व्यवस्था है तो इसके लिए चार प्रतिशत कमीशन क्यों दिया जाये. उनका सुझाव था कि निगम जरूरत के अनुसार अपना सॉफ्टवेयर खरीदकर खुद टैक्स वसूली कर सकता है. विरोध के बाद प्रस्ताव को विचाराधीन कर दिया गया.
बैठक में शहर के विकास से जुड़े ये फैसले भी हुए
- दिसंबर तक अतिक्रमण और अवैध निर्माण के 2600 मामलों की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया. जनवरी से सड़कों की मापी कराकर स्थायी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी. पिछले वर्ष ऐसे 80 मामले लंबित थे, जो अब बढ़कर 2600 हो गये हैं.
- पार्किंग व्यवस्था विकसित करने के लिए टीम गठित की गयी है. दिसंबर में इस दिशा में काम करने की तैयारी है.
- अर्बन चैलेंज फंड से 50 योजनाओं पर काम कराने पर चर्चा हुई. वार्ड-1 से 51 तक जर्जर सड़क, नाला, ढक्कनयुक्त आरसीसी नाली और पीसीसी सड़क निर्माण की योजनाओं को मंजूरी मिली.
- खाली जमीन पर पार्क और लेक विकसित करने तथा रिवर फ्रंट बनाने के लिए पार्षदों से प्रस्ताव मांगे गये. इनके आधार पर डीपीआर तैयार होगी.
- पटना की तर्ज पर म्युनिसिपल बांड जारी करने पर चर्चा हुई. पटना नगर निगम ने बांड से 200 करोड़ रुपये जुटाये हैं. भागलपुर में बोर्ड की सहमति के बाद विभाग से अनुमति ली जायेगी.
- ट्रेड लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाने पर विचार हुआ.
- वार्ड-20 में आचार्य कौटिल्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा और सैंडिस कंपाउंड स्थित लोकनायक जयप्रकाश उद्यान में जयप्रकाश नारायण की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जायेगी. वेरायटी चौक का नाम अग्रसेन चौक करने का प्रस्ताव लिया गया.
- किलाघाट मुहर्रम मेला मैदान और छोटी खंजरपुर मकबरा समेत अन्य स्थलों पर पेवर ब्लॉक और रोशनी की व्यवस्था होगी. विसर्जन घाटों के विकास पर भी विचार हुआ.
- बंद प्याऊ में नयी बोरिंग, नये स्थानों पर पाइपलाइनयुक्त प्याऊ और डीप बोरिंग तथा निचले इलाकों में जलनिकासी के लिए पंपिंग स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया.
- दीपावली, छठ और काली पूजा पर सफाई व सौंदर्यीकरण, सफाई कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, खराब निगम वाहनों की मरम्मत और वार्डों में डस्टबिन उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ.
- पार्षदों पर दर्ज केस वापस लेने की पहल करने और कार्यालय अधीक्षक को दो दिनों का अवकाश देने का निर्णय लिया गया. पूर्व सैनिकों को नगर निगम में गार्ड रखने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई.
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