Toll System New Rule: हाईवे पर सफर करने वालों को आने वाले समय में टोल प्लाजा पर लंबी कतारों से राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार देश में टोल वसूली की पूरी व्यवस्था बदलने की तैयारी में है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari ने संकेत दिए हैं कि 2026 के आखिर तक देशभर के फिजिकल टोल प्लाजा हटाए जा सकते हैं.
सरकार की योजना नई Automated Distance-Based Toll Collection System लागू करने की है, जिसमें वाहन जितनी दूरी तय करेगा, उसी हिसाब से टोल अपने-आप कट जाएगा. इससे यात्रियों को बिना रुके सफर करने की सुविधा मिल सकती है.
बिना रुके होगा हाईवे सफर
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ड्राइवरों को टोल प्लाजा पर गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सरकार Multi-Lane Free Flow (MLFF) तकनीक पर काम कर रही है, जिसके जरिए हाईवे पर बैरियर-फ्री यात्रा संभव हो सकेगी.
इसके तहत हाईवे पर बड़े डिजिटल गैंट्री लगाए जाएंगे. इनमें कैमरे, सेंसर और FASTag स्कैनिंग सिस्टम मौजूद होंगे, जो चलते वाहन की पहचान कर सीधे उसके FASTag अकाउंट से टोल राशि काट देंगे.
सरकार का मानना है कि इस तकनीक से हाईवे पर ट्रैफिक जाम कम होगा और वाहन लगातार बेहतर स्पीड में चल सकेंगे.
टोल शुल्क में भी मिल सकती है राहत
नई Distance-Based Tolling व्यवस्था लागू होने के बाद कई रूट्स पर टोल खर्च घटने की संभावना जताई जा रही है. सरकार के अनुसार, कुछ मार्गों पर जहां अभी लोगों को 125 से 150 रुपये तक भुगतान करना पड़ता है, वहां भविष्य में शुल्क काफी कम हो सकता है.
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल सकता है जो रोजाना हाईवे का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बार-बार रुकने से होने वाला फ्यूल खर्च कम हो सकता है.
कई जगहों पर हो चुका है परीक्षण
सरकार इस नई तकनीक का ट्रायल देश के कई टोल प्वाइंट्स पर कर चुकी है. शुरुआती परीक्षणों में ट्रैफिक मूवमेंट बेहतर होने और यात्रा समय घटने के संकेत मिले हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भारत के हाईवे सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. दुनिया के कई देशों में पहले से ही इस तरह के ऑटोमेटेड टोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.
सैटेलाइट और नंबर प्लेट टेक्नोलॉजी पर भी फोकस
सरकार FASTag के अलावा Automatic Number Plate Recognition (ANPR) और Satellite-Based Tolling System पर भी काम कर रही है. इन तकनीकों की मदद से बिना किसी रुकावट के टोल वसूली को और सटीक बनाया जा सकेगा.
हालांकि, विशेषज्ञों ने डेटा सुरक्षा और तकनीक इस्तेमाल करने में दिक्कत झेलने वाले लोगों को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई हैं.
ट्रांसपोर्ट सेक्टर को होगा बड़ा फायदा
नई टोल व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रक ऑपरेटर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत कम हो सकती है. लगातार सफर जारी रहने से डिलीवरी समय घटेगा और ईंधन की बचत भी होगी.
सरकार का मानना है कि इससे देश में परिवहन लागत कम करने और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी.
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