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Thursday, January 22, 2026
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Central Grant : मोदी सरकार ने जारी किया 723 करोड़ का पंचायत फंड, राजस्थान और झारखंड की ग्राम पंचायतों को सीधी राहत

Central Grant : केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए राजस्थान और झारखंड को 723 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान जारी किया है. यह राशि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत ग्राम, प्रखंड और जिला पंचायतों के विकास के लिए दी गई है. सरकार का उद्देश्य इस फंड के जरिए गांवों में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और जल प्रबंधन को बेहतर बनाना है.

Central Grant केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्तर की पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राजस्थान और झारखंड की ग्राम, प्रखंड और जिला पंचायतों के लिए 723 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि जारी की गई है.

यह राशि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अंतर्गत दी गई है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय विकास कार्यों को मजबूती मिल सके.

राजस्थान की पंचायतों को मिली अतिरिक्त ताकत

राजस्थान को वित्तीय वर्ष 2025–26 की शुरुआत में 303.04 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है. यह अनुदान राज्य की 24 जिला परिषदों, 339 पंचायत समितियों और 3,857 ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए निर्धारित है.

इसके साथ ही वर्ष 2024–25 में तकनीकी कारणों से रोकी गई 145.24 करोड़ रुपये की राशि भी अब जारी कर दी गई है. यह पैसा उन्हीं पंचायतों को दिया गया है, जिन्होंने केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा किया था.

झारखंड को मिली पहली किस्त

झारखंड को वित्तीय वर्ष 2024–25 के लिए 275.12 करोड़ रुपये की पहली किश्त दी गई है. इस सहायता से राज्य की 24 जिला परिषदों, 253 प्रखंड पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा. सरकार का लक्ष्य है कि इस धनराशि से गांवों में विकास योजनाएं तेज़ी से आगे बढ़ें.

कैसे जारी होता है पंचायत अनुदान

ग्रामीण निकायों को मिलने वाली यह राशि वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की जाती है. इसके लिए पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) की अनुशंसा ली जाती है. 15वें वित्त आयोग के तहत यह अनुदान आम तौर पर साल में दो चरणों में दिया जाता है.

दो हिस्सों में बांटी जाती है राशि

पंचायतों को मिलने वाला अनुदान दो प्रकार का होता है—अप्रतिबंधित और बंधित.
अप्रतिबंधित राशि का उपयोग पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकती हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल वेतन या कार्यालय खर्चों में नहीं किया जा सकता.

बुनियादी सुविधाओं पर होगा खर्च

बंधित अनुदान को केवल आवश्यक सेवाओं पर खर्च करना अनिवार्य है. इसमें स्वच्छता अभियान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, वर्षा जल संरक्षण और गंदे पानी के पुनः उपयोग जैसे कार्य शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में स्वच्छता, जल प्रबंधन और जीवन स्तर में ठोस सुधार आएगा.

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