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ईरान-अमेरिका शांति समझौते में भूमिका का श्रेय लेने की उम्मीद पर फिरा पानी, पाकिस्तान को नहीं मिला अपेक्षित फायदा?

US- Iran Peace Deal : ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान काफी उम्मीदें लगाए बैठा था. इस्लामाबाद चाहता था कि उसे इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका का श्रेय मिले, लेकिन अंतिम घटनाक्रम ने उसकी उम्मीदों को झटका दे दिया. समझौते के बाद पाकिस्तान की भागीदारी और उसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

US- Iran Peace Deal : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच संवाद की प्रक्रिया में अपनी भूमिका दिखाने की कोशिश की थी. इस्लामाबाद की उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच समझौते की प्रक्रिया में सहयोग देकर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकेगा. पाकिस्तान यह भी चाहता था कि इस पहल से उसकी छवि को मजबूती मिले, लेकिन घटनाक्रम ने उसकी उम्मीदों को पूरा नहीं होने दिया.

बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटा था इस्लामाबाद

ईरान और अमेरिका के बीच संपर्क और संदेशों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने सक्रियता दिखाई थी. इस सिलसिले में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद बुलाया गया था. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस प्रक्रिया को अहम उपलब्धि के रूप में देख रहे थे. माना जा रहा था कि यदि समझौता सफल होता है तो पाकिस्तान को भी इसका श्रेय मिलेगा.

हालांकि अंतिम नतीजे सामने आने के बाद पाकिस्तान को वैसी पहचान नहीं मिल सकी, जिसकी उसे उम्मीद थी.

प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले ही पूरी हो गई प्रक्रिया

ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” नाम दिया गया था. इसके तहत 19 जून को स्विट्जरलैंड में समझौते से जुड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित था. पाकिस्तान इस आयोजन को लेकर तैयारियों में भी जुटा हुआ था. 15 जून को शहबाज शरीफ ने भी इस कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा की थी.

लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही घटनाक्रम बदल गया. 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर कर दिए. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय में इसकी घोषणा भी कर दी.

पाकिस्तान की योजना को लगा झटका

समझौते की प्रक्रिया तय कार्यक्रम से पहले पूरी हो जाने के कारण पाकिस्तान को वह अवसर नहीं मिल पाया, जिसकी उसे प्रतीक्षा थी. इस्लामाबाद जिस कार्यक्रम को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना चाहता था, वह उसके बिना ही आगे बढ़ गया.

18 जून को शहबाज शरीफ ने भी इस मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए, लेकिन तब तक समझौते से जुड़ा मुख्य घटनाक्रम पूरा हो चुका था. ऐसे में पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका.

अंतिम समय में बदले घटनाक्रम से बढ़ी चर्चा

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते में सहयोगी भूमिका निभाकर वह दोनों देशों के बीच अपनी उपयोगिता साबित कर सकेगा. लेकिन अंतिम चरण में हुए बदलाव ने पूरा परिदृश्य बदल दिया.

घटनाक्रम के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई कि जिस कार्यक्रम को पाकिस्तान अपने लिए अहम मान रहा था, वह निर्धारित समय से पहले ही पूरा हो गया. इससे पाकिस्तान को वह महत्व नहीं मिल पाया जिसकी उसे उम्मीद थी.

विशेषज्ञ ने भूमिका को लेकर क्या कहा?

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. धनंजय त्रिपाठी का कहना है कि पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में भागीदारी जरूर निभाई, लेकिन उसकी भूमिका को वास्तविकता से अधिक महत्व देकर पेश किया गया. उनके अनुसार पाकिस्तान ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिश की, लेकिन अंतिम परिणामों में उसकी भूमिका उतनी निर्णायक नहीं रही.

उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते में पाकिस्तान की मौजूदगी से उसका अंतरराष्ट्रीय अलगाव कुछ हद तक कम जरूर हुआ, लेकिन उसे किसी बड़ी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता. उनके मुताबिक पाकिस्तान इस प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन ऐसा नहीं था कि उसके बिना समझौता संभव नहीं होता.

समझौते के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा

समझौते से जुड़े घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है. इस्लामाबाद ने इस प्रक्रिया में अपनी सक्रियता दिखाई, लेकिन अंतिम नतीजों में उसे वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उसे उम्मीद थी. यही वजह है कि समझौते के बाद पाकिस्तान की भागीदारी और उसके वास्तविक प्रभाव को लेकर बहस जारी है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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