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Prashant Kishor: बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार अब सिर्फ चुनावी नतीजे तक सीमित नहीं रह गई है. हार की वजह को लेकर प्रशांत किशोर के बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. पीके ने जहां बीजेपी की हार को स्थानीय नेतृत्व से जोड़ा, वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए उन्हें 2030 में बांकीपुर से फिर चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी.
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने प्रशांत किशोर के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी में चुनाव जीतने और हारने का फैसला किसी एक नेता की इच्छा से नहीं होता.
PK ने युवाओं के आंदोलन को बताया असरहीन
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि युवाओं के विरोध प्रदर्शन का बीजेपी की हार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा. उनके मुताबिक चुनाव में बीजेपी को स्थानीय कारणों से नुकसान उठाना पड़ा.
पीके ने हार के पीछे स्थानीय नेतृत्व को सबसे बड़ी वजह बताया. उन्होंने कहा कि पहले लालू यादव के डर की वजह से लोग बीजेपी के पक्ष में मतदान करते थे, लेकिन अब जन सुराज के रूप में जनता के पास एक मजबूत विकल्प मौजूद है.
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यही बयान बीजेपी के लिए पलटवार का आधार बन गया.
BJP बोली- चुनाव किसी मुख्यमंत्री की मर्जी से नहीं हारती पार्टी
अजय आलोक ने प्रशांत किशोर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पीके को ‘प्रखर कुटिल महोदय’ कहते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी की कार्यशैली और लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना चाहिए.
उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के समय वाली राजनीति नहीं है, जहां मुख्यमंत्री की मर्जी से कोई चुनाव जीतता या हारता हो. बीजेपी एक लोकतांत्रिक विचारों वाली पार्टी है और यहां फैसले इस तरह नहीं होते.
कांग्रेस का साथ छोड़िए, उसी के लिए काम कीजिए- BJP
अजय आलोक ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक भूमिका पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पीके कांग्रेस का समर्थन करते हैं, इसलिए उन्हें बिहार की चिंता करने का दिखावा छोड़कर कांग्रेस के लिए काम करना चाहिए.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि प्रशांत किशोर पहले तेलंगाना और कर्नाटक में राजनीति चमकाने पहुंचे थे और अब बिहार को लेकर बयान दे रहे हैं. उनके मुताबिक पीके अपनी सुविधा के अनुसार राजनीतिक बयान देते हैं.
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अब BJP ने PK को दे दी सीधी चुनौती
बयानबाजी यहीं नहीं रुकी. बीजेपी ने प्रशांत किशोर के सामने 2030 के बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीधी चुनौती रख दी.
अजय आलोक ने कहा कि अगर प्रशांत किशोर को बांकीपुर में अपनी लोकप्रियता और जन सुराज के प्रभाव पर इतना भरोसा है, तो उन्हें 2030 में एक बार फिर इसी सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान करना चाहिए.
यानी बीजेपी ने पीके के दावे का जवाब बयान से नहीं, बल्कि अगले चुनाव की चुनौती से देने की कोशिश की है.
सम्राट चौधरी पर सवाल उठाने से भी BJP नाराज
प्रशांत किशोर के उस दावे को भी बीजेपी ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सम्राट चौधरी को बीजेपी की हार की वजह बताया था.
अजय आलोक ने कहा कि बीजेपी में मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को हराने की साजिश नहीं करता. उनका तर्क था कि अगर सम्राट चौधरी वास्तव में ऐसा चाहते तो बीजेपी का खाता एक भी बूथ पर नहीं खुलता.
उन्होंने कहा कि बीजेपी में इस तरह की राजनीतिक संस्कृति नहीं है.
इस तरह बांकीपुर उपचुनाव की हार को लेकर शुरू हुई बहस अब स्थानीय नेतृत्व, जन सुराज की ताकत और 2030 के चुनाव तक पहुंच गई है.
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