Vikramshila Setu Update : भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को लेकर मंगलवार को राहत भरी प्रगति सामने आयी. पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर अस्थायी बेली ब्रिज का ढांचा सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है. इसके बाद प्रशासन और तकनीकी एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही यहां सीमित स्तर पर यातायात बहाल किया जा सकेगा.
बीआरओ की टीम कई दिनों से कर रही थी तैयारी
सेतु के टूटने के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की टीम लगातार मौके पर काम कर रही थी. इंजीनियरों ने पुल की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की योजना बनायी. मंगलवार को बेली ब्रिज लॉन्चिंग की प्रक्रिया पूरी होने के साथ इस दिशा में बड़ी सफलता मिली.
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विक्रमशिला सेतु पर ध्वस्त हुए स्लैब की जगह बेली ब्रिज को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है.
— HelloCities24 (@Hc24News) May 19, 2026
तकनीकी टीम की निगरानी में ब्रिज लॉन्चिंग का काम पूरा किया गया है. अब जल्द आवागमन बहाल होने की उम्मीद है.#Bhagalpur #Bihar #Vikramshila_setu pic.twitter.com/Sioy6wLhfF
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि तकनीकी परीक्षण संतोषजनक रहा है और आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है.
सेतु टूटने से प्रभावित हुआ था संपर्क
कुछ दिन पहले विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद भागलपुर का कई जिलों और पड़ोसी राज्यों से सड़क संपर्क प्रभावित हो गया. पुल बंद होने से लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से सहयोग मांगा था, जिसके बाद बीआरओ की टीम को मरम्मत और वैकल्पिक संपर्क बहाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी.
मजबूत हिस्से पर तैयार किया गया वैकल्पिक ढांचा
तकनीकी जांच में पुल के कुछ हिस्सों को सुरक्षित पाया गया. इसी आधार पर इंजीनियरों ने टूटे हुए भाग से अलग स्थान पर अस्थायी बेली ब्रिज लगाने का निर्णय लिया. इसके लिए कई दिनों तक माप, जांच और संरचनात्मक परीक्षण किए गए.
आपदा के समय उपयोगी होता है बेली ब्रिज
बेली ब्रिज स्टील से तैयार किया जाने वाला अस्थायी पुल होता है, जिसे कम समय में जोड़कर तैयार किया जा सकता है. इसका उपयोग आमतौर पर आपदा, युद्ध या पुल क्षतिग्रस्त होने जैसी परिस्थितियों में किया जाता है.
इस तरह के पुल भारी वाहनों का भार सहने में सक्षम होते हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें दूसरी जगह भी स्थापित किया जा सकता है. यही कारण है कि सेना और बीआरओ जैसी एजेंसियां कठिन परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल करती हैं.
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