इस खबर में क्या है?
Deoghar Shravani Mela 2026: 30 जुलाई से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले को लेकर झारखंड पुलिस ने इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. एक माह तक चलने वाले मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसी को देखते हुए पहली बार सुरक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. पुलिस मुख्यालय स्तर पर तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन की सुविधा मिल सके.
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क्राउड मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा जोर
डीजीपी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 20 बिंदुओं पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं. सबसे अधिक फोकस भीड़ नियंत्रण पर रखा गया है. रूट प्लान इस तरह तैयार किया गया है कि शहर के किसी हिस्से में तय सीमा से अधिक भीड़ जमा न हो.
भीड़ बढ़ी तो प्रवेश बिंदुओं पर रोके जाएंगे श्रद्धालु
यदि श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक होती है तो बिहार की ओर से आने वाले कांवरियों और अन्य श्रद्धालुओं को प्रवेश बिंदुओं पर अस्थायी रूप से रोका जाएगा. वहां पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें देवघर की ओर भेजा जाएगा.
Deoghar Shravani Mela 2026: रेलवे स्टेशनों पर भी होगी विशेष व्यवस्था
धनबाद, देवघर, दुमका समेत प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए जाएंगे. प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए आसपास ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी. वहीं, 24 घंटे संचालित होने वाला कंपोजिट कंट्रोल रूम एआई तकनीक की मदद से पूरे मेले की निगरानी करेगा.
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आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए शहर से बाहर निकालने के वैकल्पिक मार्ग पहले से चिन्हित कर रिजर्व रखे गए हैं. बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं का आवागमन बिना रुकावट जारी रहे.
पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
श्रावणी मेले के दौरान अतीत में कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं. वर्ष 2006 में भीड़ नियंत्रण को लेकर पुलिस और पंडा समाज के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे. वर्ष 2007 में उमा भवन में भगदड़ से पांच महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई. वर्ष 2008 में गर्भगृह में करंट लगने से दो कांवरिये झुलस गए थे. वहीं 10 अगस्त 2015 को बेलपत्र प्रदर्शनी के दौरान मची भगदड़ में 10 कांवरियों की जान चली गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे.
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डीजीपी
डीजीपी तदाशा मिश्र ने कहा कि श्रावणी मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा झारखंड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की तैनाती की जा रही है. सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
मुख्य बिंदु
- 30 जुलाई से शुरू होगा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला, एक माह तक चलेगा आयोजन.
- पहली बार एआई (Artificial Intelligence) की मदद से भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी होगी.
- 24 घंटे कंपोजिट कंट्रोल रूम से एआई आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी.
- भीड़ तय सीमा से अधिक होने पर श्रद्धालुओं को प्रवेश बिंदुओं पर अस्थायी रूप से रोका जाएगा.
- धनबाद, देवघर और दुमका रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम रहेंगे.
- मंदिर परिसर में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की जाएगी.
- आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक मार्ग पहले से रिजर्व रखे गए हैं.
- डीजीपी ने क्राउड मैनेजमेंट को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 20 बिंदुओं पर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं.
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने पर विशेष फोकस रहेगा.
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