Fodder Scam Accused Arrest : चारा घोटाले में आरोपी सत्येंद्र कुमार की गिरफ्तारी के साथ 25 साल पुरानी फरारी का मामला एक बार फिर सामने आया है. वर्ष 2001 में सीबीआइ की ओर से आरोप पत्र दाखिल किये जाने के बाद से वह फरार था. गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पटना स्थित अपना आवास छोड़ दिया था. जांच एजेंसी को उसके नेपाल में रहने और वहां दवा कंपनी शुरू करने की सूचना भी मिली थी. आखिरकार गुरुवार की देर रात सीबीआइ ने उसे उत्तर प्रदेश के लखनऊ रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया.
सत्येंद्र कुमार को मध्यप्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ आने की सूचना मिली थी. इसके बाद सीबीआइ की टीम ने लखनऊ रेलवे स्टेशन पर निगरानी शुरू की. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही अधिकारियों ने बोगी में उसकी पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया. अदालत से उसके खिलाफ स्थायी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी था. आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया. अब उसे रांची लाकर संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जायेगा.
रांची के ड्रग्स सिंडिकेट के विदेशी तार थाईलैंड-नाइजीरिया तक? पैंट्री कार से तस्करी, 6 गिरफ्तार
Fodder Scam Accused Arrest : बीआइटी मेसरा में पढ़ाई, फिर दवा कंपनी बनायी
सत्येंद्र कुमार का परिवार रांची में कचहरी के पास रहता था. उसने अपने सहयोगी दिनेश राय के साथ बीआइटी मेसरा से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी. इसके बाद दोनों ने दवा निर्माण कंपनी बनायी. आरोप है कि चारा घोटाले के दौरान इसी फर्म के जरिये पशुपालन विभाग को 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवाओं की आपूर्ति दिखायी गयी और सरकारी खजाने से कथित तौर पर फर्जी तरीके से राशि निकाली गयी.
इस मामले में दिनेश राय पहले ही गिरफ्तार हो चुका है. अदालत उसे सजा भी सुना चुकी है. वहीं, सत्येंद्र कुमार आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से ही गिरफ्तारी से बचता रहा.
नेपाल में रहने की सूचना के बावजूद तलाश रही सीबीआइ
सत्येंद्र कुमार के फरार होने के बाद जांच एजेंसी लगातार उसकी तलाश कर रही थी. इस दौरान उसके नेपाल में दवा कंपनी शुरू करने और वहीं रहने की सूचना मिली थी. उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पटना स्थित अपना घर भी छोड़ दिया था. अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद वह लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया.
अब लखनऊ रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तारी के बाद सीबीआइ उसे रांची ला रही है. संबंधित विशेष अदालत में पेशी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जायेगी.
देवघर में बांका के युवक को लगी गोली, अस्पताल में डॉक्टर ने किया मृत घोषित
एकीकृत बिहार के समय हुआ था चारा घोटाला
चारा घोटाला एकीकृत बिहार के समय पशुपालन विभाग में हुआ था. वर्ष 1996 में सीबीआइ ने इसकी औपचारिक जांच शुरू की थी. इस घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद समेत कई राजनेताओं, अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं को सजा सुनायी जा चुकी है.
इसे भी पढ़ें-



