JPSC Scam: जेपीएससी परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी. न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने मामले में दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया. अदालत के सामने केस डायरी, सह-अभियुक्तों के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य जैसे दस्तावेज रखे गये थे.
जिन तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक के सहायक और संयुक्त सचिव के निजी सहायक सोनू कुमार, टीएसआर के निदेशक रामबीर सिंह और जेपीएससी की एक सदस्य के निजी सहायक बृज कुमार राम शामिल हैं.
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ओएमआर शीट में हेरफेर के आरोप पर अदालत ने देखा रिकॉर्ड
अदालत ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लिया. केस डायरी, सह-अभियुक्तों के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पहली नजर में ओएमआर शीट में हेरफेर और परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी जैसे आरोप सामने आने की बात कही गयी.
कॉल रिकॉर्ड में आरोपियों के बीच हुई कुछ संदिग्ध बातचीत का भी उल्लेख हुआ. अदालत के अनुसार, इन रिकॉर्ड से आरोपियों के बीच मिलीभगत की आशंका सामने आती है.
परीक्षा व्यवस्था में सेंधमारी को अदालत ने माना गंभीर
अदालत ने प्रतियोगी परीक्षाओं में संगठित धांधली के व्यापक प्रभाव पर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि इस तरह की धांधली से केवल राज्य को आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य और पब्लिक के भरोसे पर भी गहरा असर पड़ता है.
तीनों आरोपियों को जमानत नहीं मिलने के बाद जेपीएससी परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में अदालत के सामने रखे गये साक्ष्य एक बार फिर केंद्र में आ गये हैं.
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