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200 से अधिक वारदातों का आरोपी माओवादी नेता नहीं रहे, 1 करोड़ का था इनाम

Prashant Bose Death: भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का शुक्रवार को रांची में निधन हो गया. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सरायकेला जेल से रिम्स अस्पताल लाया गया था. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई और प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की है.

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Prashant Bose Death: रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में शुक्रवार को भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का निधन हो गया. वह 75 वर्ष के थे. जेल में उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

सुबह सांस लेने में हुई दिक्कत

प्रशांत बोस सरायकेला जेल में बंद थे. शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उनकी हालत बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें रांची लाया गया.

रिम्स पहुंचने के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनका इलाज शुरू किया. कुछ घंटे बाद सुबह करीब 10 बजे उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई. मामले को देखते हुए जेल और अस्पताल प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई है.

माओवादी संगठन में बड़ी भूमिका

प्रशांत बोस को भाकपा (माओवादी) में शीर्ष नेताओं में गिना जाता था. उन्हें संगठन के महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था. वह केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे. इसके अलावा उन्होंने ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ के सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली थी.

संगठन के भीतर उनकी पहचान ‘किशन दा’, ‘मनीष’ और ‘बूढ़ा’ नाम से थी. उनका नाम संगठन के रणनीतिक फैसलों और दिशा तय करने से जुड़ा रहा.

2021 में हुई थी गिरफ्तारी

12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास प्रशांत बोस को गिरफ्तार किया गया था. उस समय उनकी पत्नी शीला मरांडी भी उनके साथ थीं. गिरफ्तारी के वक्त उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 200 से अधिक नक्सली वारदातों में उनका नाम सामने आया था. कई बड़े हमले और संगठनात्मक फैसले उनके नेतृत्व में लिए गए थे.

लंबे समय से बीमार चल रहे थे

प्रशांत बोस करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे. उन्हें संगठन का ‘थिंक टैंक’ माना जाता था. गिरफ्तारी के बाद वह जेल में थे और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे.

उनकी उम्र लगभग 75 वर्ष बताई जाती है. लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका शरीर कमजोर हो गया था.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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