Student Silent March : रांची की सड़कों पर मंगलवार को विरोध का रंग बदला हुआ था. एक दिन पहले जहां JPSC-JSSC अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़ते हुए पुलिस से आमने-सामने थे, वहीं मंगलवार को वही आंदोलनकारी हाथों में फूल लेकर खामोश कदमों से आगे बढ़ते नजर आए. न नारे लगे, न शोर हुआ. छात्रों ने मौन रहकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की.
जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकला यह मौन मार्च JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेतृत्व में हुआ. भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को 18वें दिन भी जारी रहा.
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विरोध का तरीका बदला, मांगें वही रहीं
छात्रों ने मंगलवार को आक्रामक तेवरों के बजाय शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता चुना. हाथों में फूल लेकर निकले अभ्यर्थियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए है.
मौन मार्च में शामिल छात्रों का कहना था कि सरकारी नौकरी की परीक्षा उनके लिए केवल एक परीक्षा नहीं होती. इसके पीछे वर्षों की तैयारी, मेहनत और परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का जवाब मिलना जरूरी है.
18 दिन से सड़कों पर हैं अभ्यर्थी
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्र 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं. कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन में धरना, भूख हड़ताल और सरकार के साथ बातचीत के बाद अब विरोध का यह नया तरीका सामने आया.
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हालांकि, आंदोलन के 18वें दिन भी छात्रों और सरकार के बीच विवादित मुद्दों पर पूरी तरह सहमति नहीं बन सकी है.
सिर्फ आश्वासन नहीं, जांच और कार्रवाई चाहते हैं छात्र
आंदोलनकारियों की मांग केवल परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव तक सीमित नहीं है. छात्र उन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच चाहते हैं, जिनमें कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.
मंच की ओर से CBI जांच की मांग की जा रही है. इसके अलावा राज्य के बाहर के उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का पैनल बनाकर जांच कराने का विकल्प भी रखा गया है. छात्रों का कहना है कि जांच ऐसी व्यवस्था से होनी चाहिए, जिससे उसकी निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे.
छह छात्र भूख हड़ताल पर, दो अस्पताल में
आंदोलन के बीच छह छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इनमें दो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
भूख हड़ताल और लगातार जारी प्रदर्शन के बीच छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत या आश्वासन से बात नहीं बनेगी. वे अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं.
सरकार से छह दौर की बातचीत, फिर भी नहीं टूटा गतिरोध
छात्रों और झारखंड सरकार के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं. रविवार को छठे दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन कोई ऐसा फैसला सामने नहीं आया जिससे आंदोलन खत्म हो सके.
यही वजह है कि बातचीत के साथ-साथ सड़कों पर छात्रों का दबाव भी बना हुआ है. सोमवार के घटनाक्रम के बाद मंगलवार का मौन मार्च आंदोलन की रणनीति में आए बदलाव के तौर पर देखा गया.
फूलों के पीछे छिपा था विरोध का संदेश
मंगलवार के मार्च में सबसे ज्यादा ध्यान छात्रों के हाथों में मौजूद फूलों ने खींचा. यह प्रदर्शन नारेबाजी के जरिए नहीं, बल्कि खामोशी के जरिए अपनी बात कह रहा था.
छात्रों ने साफ किया कि वे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और व्यवस्था में सुधार चाहते हैं. अब सवाल यह है कि फूलों और खामोशी के इस संदेश के बाद सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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