Ranchi Railway Safety: ट्रेन के पहिए में खराबी हो या एक्सल बॉक्स का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाए, अब ऐसी गड़बड़ी को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा. रांची रेल मंडल ट्रेनों की संरक्षा मजबूत करने के लिए ऐसी तकनीकों का दायरा बढ़ा रहा है, जो ट्रेन के परिचालन के दौरान ही पहियों और एक्सल से जुड़ी गड़बड़ियों का पता लगा सकती हैं. लोदमा स्टेशन के पास व्हील इंपैक्ट लोड डिटेक्टर (WILD) लगाया जा रहा है, जबकि हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्शन (HABD) सिस्टम पहले से 9 रेल सेक्शनों में काम कर रहा है.
पहिए में गड़बड़ी हुई तो सिस्टम खुद देगा संकेत
WILD तकनीक का इस्तेमाल चलती ट्रेन के पहियों पर पड़ने वाले असामान्य दबाव और भार की निगरानी के लिए किया जाता है. इसके लिए रेलवे ट्रैक पर विशेष लोड सेंसर लगाए जाते हैं, जो ट्रेन के गुजरते समय पहियों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करते हैं.
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अगर किसी पहिये में फ्लैटनेस, टूट-फूट या किसी तरह की असमानता के कारण निर्धारित सीमा से ज्यादा इंपैक्ट लोड मिलता है, तो सेंसर इसकी जानकारी कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचाते हैं.
इसके बाद सॉफ्टवेयर संबंधित कोच और खराबी वाले पहिये की लोकेशन के साथ ऑटोमैटिक रिपोर्ट तैयार करता है. इससे खराब पहिये की पहचान समय रहते हो सकती है और उसकी मरम्मत या उसे बदलने की कार्रवाई की जा सकती है.
लोदमा के बाद दूसरे प्रमुख स्टेशनों तक पहुंचेगी तकनीक
रांची मंडल में WILD तकनीक की शुरुआत लोदमा स्टेशन के पास की जा रही है. इसे चरणबद्ध तरीके से मंडल के अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी स्थापित करने की योजना है.
इस तकनीक के विस्तार का उद्देश्य ट्रेन के पहियों में ऐसी खराबियों का शुरुआती स्तर पर पता लगाना है, जो आगे चलकर परिचालन के दौरान परेशानी पैदा कर सकती हैं.
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एक्सल गर्म हुआ तो कंट्रोल रूम में बजेगा अलार्म
रांची मंडल में सिर्फ पहियों की निगरानी ही नहीं की जा रही है, बल्कि एक्सल बॉक्स और बेयरिंग की स्थिति पर भी तकनीक के जरिए नजर रखी जा रही है.
HABD सिस्टम हारूबेरा, सुईसा, टांगरबसली, टाटीसिलवे, गंगाघाट, झालदा के अप और डाउन तथा पोकला के अप और डाउन समेत 9 रेल सेक्शनों में चालू है.
यह प्रणाली ट्रैक के किनारे लगे इन्फ्रारेड सेंसर से चलती ट्रेन के एक्सल बॉक्स और बेयरिंग का तापमान मापती है. यदि घर्षण या लुब्रिकेशन की कमी के कारण किसी बेयरिंग का तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है, तो सिस्टम इसकी सूचना कंट्रोल रूम को अलार्म के जरिए देता है.
समय रहते गड़बड़ी का पता चलने से पहिया जाम होने, एक्सल टूटने और ट्रेन के बेपटरी होने जैसी स्थिति का खतरा कम किया जा सकता है.
15 और सेक्शनों में HABD लगाने का काम जारी
रांची मंडल में HABD का इस्तेमाल अभी 9 सेक्शनों में हो रहा है. इसके अलावा 15 अन्य रेल सेक्शनों में भी इस प्रणाली को स्थापित करने का काम चल रहा है.
इस तरह मंडल में संरक्षा से जुड़ी निगरानी को और व्यापक बनाने की तैयारी है. एक तरफ WILD के जरिए पहियों पर पड़ने वाले असामान्य इंपैक्ट का पता लगाने की व्यवस्था की जा रही है, वहीं HABD एक्सल बॉक्स और बेयरिंग के तापमान में होने वाले बदलाव को पकड़ रहा है.
डिरेलमेंट की घटनाओं के बाद बढ़ा संरक्षा पर जोर
रांची रेल मंडल में पिछले कुछ समय में डिरेलमेंट की घटनाएं भी हुई हैं. अगस्त 2026 में सिल्ली-बोकारो रेलखंड पर श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन की बोगी और मुरी में मेला स्पेशल ट्रेन बेपटरी हुई थी.
इससे पहले अक्टूबर 2025 में कानारोवां के पास मालगाड़ी और सितंबर 2024 में मुरी-सुईसा क्षेत्र में दो इंजन पटरी से उतरे थे.
इन घटनाओं के बाद रेल मंडल में संरक्षा को लेकर तकनीकी उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है. मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह के अनुसार, संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. WILD और HABD जैसी तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल भविष्य में रेल दुर्घटनाओं को कम करने और परिचालन को सुरक्षित व सुगम बनाने में मदद करेगा.
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