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Bhagalpur News : भागलपुर जिले के सुलतानगंज प्रखंड में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर शिक्षा विभाग सख्त हो गया है. विद्यालयों को मरम्मत और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए दी गई राशि का हिसाब अब तक जमा नहीं होने पर विभाग ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया है. दो दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
50-50 हजार रुपये दिए गए थे
शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक विद्यालय को 50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी. यह राशि भवन मरम्मत, शौचालय, रैंप, बिजली व्यवस्था, रोशनी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दी गई थी.
बीआरसी कार्यालय के अनुसार, विभागीय निर्देश के तहत 28 फरवरी तक राशि खर्च कर उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य था, लेकिन कई विद्यालयों ने अब तक इसका हिसाब नहीं सौंपा है.
विभाग ने मांगा जवाब
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यूसी जमा नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी. साथ ही संबंधित प्रधानाध्यापकों से देरी का कारण भी पूछा गया है.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
खर्च नहीं हुआ तो लौटानी होगी राशि
बीआरसी लेखापाल पवन कुमार ने बताया कि जिन विद्यालयों ने राशि खर्च नहीं की है, उन्हें पूरी रकम डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से शिक्षा विभाग को वापस करनी होगी.
उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान जिन स्कूलों में मतदान केंद्र बनाए गए थे, वहां बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने के उद्देश्य से यह राशि उपलब्ध कराई गई थी.
इन विद्यालयों से लंबित है उपयोगिता प्रमाण पत्र
शिक्षा विभाग के अनुसार जिन स्कूलों से अब तक उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, उनमें शामिल हैं:
- एमएस महेशी
- एनपीएस नारायणपुर
- मध्य विद्यालय बड़हरा
- प्राथमिक विद्यालय अकबरनगर कन्या
- मध्य विद्यालय कोलगामा
- मध्य विद्यालय मिर्जापुर
- मध्य विद्यालय दुधैला
- केएमएस दौलतपुर
- प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर डमखोरिया
- मध्य विद्यालय किसनपुर
- उच्च माध्यमिक विद्यालय अकबरनगर
- पीएमश्री असरगंज सरस्वती हाई स्कूल बेलारी
- एनएम हाई स्कूल पैन
कई स्कूलों ने कहा- जल्द जमा करेंगे रिपोर्ट
कुछ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि राशि खर्च की जा चुकी है और उपयोगिता प्रमाण पत्र तैयार किया जा रहा है. जल्द ही संबंधित दस्तावेज बीआरसी कार्यालय में जमा कर दिए जाएंगे.
वहीं स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर स्कूलों की सुविधाओं और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है.
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