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Bihar News : भागलपुर जिले के पीरपैंती में प्रस्तावित 2400 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना को लेकर आधारभूत संरचना तैयार करने की दिशा में काम तेज हो गया है. पावर प्लांट तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रेलवे लाइन और सड़क का संयुक्त कॉरिडोर बनाया जायेगा. प्रशासन ने इसके लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी करते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित कॉरिडोर लगभग पांच किलोमीटर लंबा और 120 मीटर चौड़ा होगा. रेलवे लाइन के माध्यम से कोयला सीधे पावर स्टेशन तक पहुंचाया जायेगा, जबकि साथ में बनने वाली सड़क का उपयोग परिवहन और स्थानीय आवागमन के लिए भी किया जा सकेगा. विभाग का मानना है कि इससे क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
समतल भूभाग से गुजरेगा कॉरिडोर
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित मार्ग सामान्य समतल इलाके से होकर गुजरेगा. परियोजना क्षेत्र में न तो पहाड़ी बाधा है और न ही बड़े स्तर पर बाढ़ प्रभावित भूभाग, जिससे निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है.
161 एकड़ से अधिक भूमि होगी अधिग्रहित
परियोजना के लिए कुल 161.0154 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी है. विभिन्न मौजों की जमीन को चिह्नित कर अर्जनाधीन सूची में शामिल कर लिया गया है. करीब 288 भू-स्वामियों की जमीन इस प्रक्रिया की जद में आयेगी. सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई शुरू की है.
रोजगार और संपर्क व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों का कहना है कि कॉरिडोर निर्माण और पावर परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे. निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में श्रमिकों और तकनीकी कर्मियों की जरूरत पड़ेगी. साथ ही नई सड़क बनने से आसपास के गांवों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. विभाग का दावा है कि परियोजना से होने वाले लाभ भूमि अधिग्रहण से होने वाले नुकसान की तुलना में अधिक होंगे.
इन मौजों में होगा भूमि अधिग्रहण
- खिदपुर : 17.475 एकड़
- इमामनगर : 10.2269 एकड़
- बसंतपुर : 65.992 एकड़
- ककरघट : 7.1960 एकड़
- हरिणकोल : 56.4686 एकड़
- महेशराम : 1.56 एकड़
- चौधरी बसंतपुर : 2.0969 एकड़
- बसंतपुर में सबसे अधिक जमीन अधिग्रहण
परियोजना के तहत सबसे ज्यादा भूमि बसंतपुर मौजा में अधिग्रहित की जायेगी. यहां 100 लोगों की जमीन चिह्नित की गयी है. वहीं सबसे कम महेशराम मौजा में केवल एक व्यक्ति की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आयेगी.
कितने लोगों की जमीन होगी प्रभावित
- खिदपुर : 46 लोग
- इमामनगर : 16 लोग
- बसंतपुर : 100 लोग
- ककरघट : 24 लोग
- हरिणकोल : 88 लोग
- महेशराम : 1 व्यक्ति
- चौधरी बसंतपुर : 13 लोग
अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉरिडोर निर्माण का काम शुरू कराया जायेगा. परियोजना के पूरा होने पर क्षेत्र में बिजली उत्पादन के साथ-साथ आधारभूत विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है.
थर्मल पावर परियोजना में बदला जमीन का दर्जा, अब होगी रैयती भूमि की खरीद
भागलपुर जिले के पीरपैंती स्थित प्रस्तावित थर्मल पावर परियोजना में जमीन अधिग्रहण से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है. जिन भूखंडों को पहले सरकारी और गैरमजरुआ मानकर अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर रखा गया था, वे अब जांच के दौरान रैयती भूमि निकले हैं. इसके बाद प्रशासन ने संबंधित जमीन को भी परियोजना के लिए अधिग्रहित करने की तैयारी शुरू कर दी है.
भूअर्जन विभाग के अनुसार, हरिणकोल और मुंडवा उर्फ तुंडवा गांव की कुछ जमीनें पहले अनाबाद बिहार खाते में दर्ज होने के कारण सरकारी मानी गयी थीं. इसी वजह से उन्हें भूमि अधिग्रहण की सूची में शामिल नहीं किया गया था. बाद में अभिलेखों और स्थानीय स्तर पर जांच के दौरान इन भूखंडों की प्रकृति रैयती पायी गयी.
दो गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित
विभागीय जानकारी के मुताबिक हरिणकोल गांव में करीब 2.72 एकड़ भूमि, जबकि मुंडवा उर्फ तुंडवा गांव में लगभग 0.65 एकड़ जमीन परियोजना के लिए चिह्नित की गयी है. अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि पहले से अधिग्रहित क्षेत्र के बीच स्थित है और परियोजना के मार्ग रेखांकन के अंदर आती है. इसलिए पावर परियोजना के सुचारु संचालन के लिए इसका अधिग्रहण जरूरी माना गया है.
पहले ही हो चुका है बड़े पैमाने पर अधिग्रहण
थर्मल पावर परियोजना के लिए पूर्व में हरिणकोल मौजा में 409 एकड़ तथा मुंडवा उर्फ तुंडवा में करीब 99.64 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है. अब नये सिरे से चिन्हित भूखंडों को भी परियोजना से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है.
पांच रैयतों की जमीन आयी दायरे में
प्रारंभिक अधिसूचना के अनुसार, हरिणकोल के चार और मुंडवा उर्फ तुंडवा के एक रैयत की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आयी है. विभाग का कहना है कि सीमित क्षेत्रफल होने के कारण किसी परिवार के विस्थापन की संभावना नहीं है.
सामाजिक प्रभाव अध्ययन नहीं कराया गया
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित जमीन को पहले सरकारी मान लिया गया था. इसी कारण सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआइए) अध्ययन नहीं कराया गया था. अब जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनायी जा रही है.
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