इस खबर में क्या है?
Vikramshila Bridge : भागलपुर में एक के बाद एक प्रमुख पुलों पर यातायात प्रभावित होने का असर अब बाइपास के टोल बूथ पर भी दिखने लगा है. विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद वाहनों की आवाजाही घटने से टोल कलेक्शन एजेंसी का पूरा आर्थिक गणित बिगड़ गया. स्थिति ऐसी बनी कि एनएचएआइ को एजेंसी से ली जाने वाली दैनिक राशि में भारी कटौती करनी पड़ी.
नवंबर में जिस टोल बूथ के लिए एजेंसी करीब 6.25 लाख रुपये प्रतिदिन एनएचएआइ को देने पर तैयार हुई थी, जुलाई की टेंडर प्रक्रिया में वही राशि घटकर 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन रह गयी. यानी एनएचएआइ को मिलने वाली दैनिक राशि में करीब पांच लाख रुपये की कमी आ गयी.
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तीन मई के बाद बदल गयी टोल बूथ की तस्वीर
विक्रमशिला सेतु के तीन मई को बंद होने के बाद वाहनों के सामान्य रूट में बड़ा बदलाव आया. इसका सीधा असर बाइपास स्थित टोल बूथ पर पड़ा. यहां से गुजरने वाले वाहनों की संख्या तेजी से कम हुई और टोल कलेक्शन गिरने लगा.
टोल का ठेका लेने वाली मुंबई की एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी के लिए हालात मुश्किल होते गये. एजेंसी को रोजाना करीब पांच लाख रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा. घाटा लगातार बढ़ने पर मई में एजेंसी ने एनएचएआइ को ठेका सरेंडर करने का प्रस्ताव भी दे दिया.
जून में सिर्फ एक बोली, जुलाई में तीन एजेंसियां मैदान में
ठेके को लेकर जून में फिर टेंडर कराया गया. हालांकि, इसमें सिर्फ एक ही बोली आयी. इसके बाद एसएस मल्टीसर्विस को ठेका विस्तार दिया गया.
जुलाई में एनएचएआइ ने दोबारा टेंडर जारी किया. इस बार तीन एजेंसियों ने बोली लगायी. एसएस मल्टीसर्विस ने 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन की सबसे ऊंची बोली लगायी और उसे ठेका मिल गया. अब एजेंसी को अनुबंध के तहत एनएचएआइ को रोजाना इतनी ही राशि देनी पड़ रही है.
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विक्रमशिला के बाद कोआ ब्रिज ने बढ़ायी चुनौती
टोल एजेंसी की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. विक्रमशिला सेतु के बाद कोआ ब्रिज के बंद होने से भी वाहनों के रूट में बदलाव हुआ है. इसका असर टोल बूथ पर आने वाले ट्रैफिक पर पड़ रहा है.
ऐसे में एजेंसी के सामने एक बार फिर ठेका जारी रखने या छोड़ने की स्थिति बन सकती है. मौजूदा परिस्थितियों में अक्टूबर में एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी ठेका छोड़ने का विकल्प चुन सकती है.
पुलों की कनेक्टिविटी का असर अब टोल के आंकड़ों में
भागलपुर की प्रमुख कनेक्टिविटी बाधित होने का असर अब टोल बूथ के आंकड़ों में भी साफ नजर आ रहा है. विक्रमशिला सेतु और कौआ ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से वाहनों की आवाजाही बदली है.
इसका असर केवल सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति तक सीमित नहीं है. टोल कलेक्शन में आयी गिरावट यह भी संकेत दे रही है कि शहर की कनेक्टिविटी में बदलाव का असर स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच रहा है.
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